{"_id":"6a9b1860eb726c62990bcd9d","slug":"wife-gets-interim-relief-despite-refusal-to-marry-mandi-news-c-90-1-ssml1045-211871-2026-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: विवाह से इन्कार के बावजूद पत्नी को मिली अंतरिम राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: विवाह से इन्कार के बावजूद पत्नी को मिली अंतरिम राहत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच हजार रुपये मासिक भरण-पोषण देने के दिए आदेश
शादी की तस्वीरों को प्रथम दृष्टया अहम मानते हुए फैमिली कोर्ट मंडी ने दिए आदेश
डिजिटल पर न चलाएं...
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट मंडी ने एक महिला को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में पांच हजार रुपये प्रतिमाह देने के आदेश दिए हैं। महिला ने पति से 30 हजार रुपये मासिक भरण-पोषण की मांग की थी। अदालत ने यह राशि आवेदन दाखिल करने की तिथि से देने के निर्देश दिए।
महिला ने आरोप लगाया कि पति ने उसे छोड़ दिया है और उसकी आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है। उसने पति की मासिक आय करीब 80 हजार रुपये होने का दावा किया। वहीं, पति ने विवाह समेत अन्य आरोपों से इन्कार करते हुए अपनी आर्थिक स्थिति सीमित बताई।
प्रतिवादी ने मंडी अदालत के क्षेत्राधिकार पर भी आपत्ति जताई थी। अदालत ने बीएनएसएस की धारा 144 का हवाला देते हुए कहा कि पत्नी जहां निवास कर रही हो, वहां भरण-पोषण की याचिका दायर की जा सकती है। इसलिए क्षेत्राधिकार संबंधी आपत्ति खारिज कर दी गई। विवाह को लेकर विवाद पर अदालत ने महिला की ओर से पेश तस्वीरों और शपथपत्र को प्रथम दृष्टया उसके दावे का समर्थन करने वाला माना। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम भरण-पोषण के स्तर पर विवाह का अंतिम निर्णय नहीं किया जा रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए पांच हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण उचित माना और राशि आवेदन की तिथि से देने के आदेश दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
शादी की तस्वीरों को प्रथम दृष्टया अहम मानते हुए फैमिली कोर्ट मंडी ने दिए आदेश
डिजिटल पर न चलाएं...
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट मंडी ने एक महिला को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में पांच हजार रुपये प्रतिमाह देने के आदेश दिए हैं। महिला ने पति से 30 हजार रुपये मासिक भरण-पोषण की मांग की थी। अदालत ने यह राशि आवेदन दाखिल करने की तिथि से देने के निर्देश दिए।
महिला ने आरोप लगाया कि पति ने उसे छोड़ दिया है और उसकी आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है। उसने पति की मासिक आय करीब 80 हजार रुपये होने का दावा किया। वहीं, पति ने विवाह समेत अन्य आरोपों से इन्कार करते हुए अपनी आर्थिक स्थिति सीमित बताई।
विज्ञापन
प्रतिवादी ने मंडी अदालत के क्षेत्राधिकार पर भी आपत्ति जताई थी। अदालत ने बीएनएसएस की धारा 144 का हवाला देते हुए कहा कि पत्नी जहां निवास कर रही हो, वहां भरण-पोषण की याचिका दायर की जा सकती है। इसलिए क्षेत्राधिकार संबंधी आपत्ति खारिज कर दी गई। विवाह को लेकर विवाद पर अदालत ने महिला की ओर से पेश तस्वीरों और शपथपत्र को प्रथम दृष्टया उसके दावे का समर्थन करने वाला माना। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम भरण-पोषण के स्तर पर विवाह का अंतिम निर्णय नहीं किया जा रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए पांच हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण उचित माना और राशि आवेदन की तिथि से देने के आदेश दिए।
विज्ञापन