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Mandi News: सीएचसी गागल में डॉक्टरों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं, रामभरोसे 'व्यवस्था'
Tue, 27 Aug 2024 07:18 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Tue, 27 Aug 2024 07:18 PM IST
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सब सेंटर भवन में चल रहे सीएचसी में सीसीटीवी और सुरक्षा कर्मी तक तैनात नहीं
असुरक्षा के माहौल में सेवाएं देने को मजबूर हैं डॉक्टर और महिला स्टाफ
स्वास्थ्य अभियान 6
संवाद न्यूज एजेंसी
बैहना (मंडी)। ग्रामीण क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गागल में डॉक्टरों की सुरक्षा राम भरोसे है। यहां तक कि महिला स्टाफ के लिए भी सुरक्षा के कोई प्रावधान नहीं हैं। सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो यहां पर दिन में ही ओपीडी होती है, सायं के समय अस्पताल बंद हो जाता है। ऐसे में दिन के समय भी कोई सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। खास तौर पर महिला स्टाफ की सुरक्षा का प्रबंध नहीं होने के चलते यह असुरक्षा के माहौल में काम करने को मजबूर हैं। बिजली बल्ब तक टूटे हुए हैं।
सब सेंटर भवन में चल रहे सीएचसी में न ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं न ही डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कोई सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। स्टाफ की बात करें तो यहां पर स्वास्थ्य केंद्र में 2 मेडिकल ऑफिसर, एक डेंटल विशेषज्ञ, एक स्टाफ नर्स, एक फार्मासिस्ट, एक लैब तकनीशियन व एक फीमेल हेल्थ वर्कर तैनात हैं। यहां पर रोजाना 50 ओपीडी होती है। स्टाफ का कहना है कि हर समय में नशेड़ी और असामाजिक तत्वों के कारण हर समय असुरक्षा रहती है।
बता दें कि बल्ह के लोगों की सुविधा के लिए वर्ष 2022 में पीएचसी गागल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा प्रदान किया गया था, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कोई अभी तक भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस बारे में सीएमओ मंडी डॉ नरेंद्र भारद्वाज ने कहा कि सीएचसी और पीएचसी स्तर पर सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती पर विचार विमर्श किया जाएगा।
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आए दिन अस्पताल पहुंच जाते हैं नशेड़ी
बहुत से नशेड़ी प्रवृत्ति के लोगों का भी अस्पताल में आना जाना लगा रहता है। पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज के बाहर तैनात होमगार्ड के जवान को ही एक नशेड़ी ने बुरी तरह से पीट डाला था। ऐसे में सीएचसी में भी सुरक्षा कर्मचारी की तैनाती होना बहुत जरूरी है ताकि स्टाफ सुरक्षा की चिंता को छोड़ सुरक्षित माहौल में काम कर सके।
बॉक्स
सुरक्षा के प्रबंध किए जाएं पुख्ता
स्थानीय निवासियों अश्वनी पंडित, संजना देवी, योगेश व तिलक राज ने बताया कि आए दिन डॉक्टरों के साथ कई वारदातों की खबरों से डॉक्टर स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने सरकार और विभाग से यहां पर सुरक्षा के प्रबंध पुख्ता करने का आग्रह किया है।
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असुरक्षा के माहौल में सेवाएं देने को मजबूर हैं डॉक्टर और महिला स्टाफ
स्वास्थ्य अभियान 6
संवाद न्यूज एजेंसी
बैहना (मंडी)। ग्रामीण क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गागल में डॉक्टरों की सुरक्षा राम भरोसे है। यहां तक कि महिला स्टाफ के लिए भी सुरक्षा के कोई प्रावधान नहीं हैं। सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो यहां पर दिन में ही ओपीडी होती है, सायं के समय अस्पताल बंद हो जाता है। ऐसे में दिन के समय भी कोई सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। खास तौर पर महिला स्टाफ की सुरक्षा का प्रबंध नहीं होने के चलते यह असुरक्षा के माहौल में काम करने को मजबूर हैं। बिजली बल्ब तक टूटे हुए हैं।
सब सेंटर भवन में चल रहे सीएचसी में न ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं न ही डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कोई सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। स्टाफ की बात करें तो यहां पर स्वास्थ्य केंद्र में 2 मेडिकल ऑफिसर, एक डेंटल विशेषज्ञ, एक स्टाफ नर्स, एक फार्मासिस्ट, एक लैब तकनीशियन व एक फीमेल हेल्थ वर्कर तैनात हैं। यहां पर रोजाना 50 ओपीडी होती है। स्टाफ का कहना है कि हर समय में नशेड़ी और असामाजिक तत्वों के कारण हर समय असुरक्षा रहती है।
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बता दें कि बल्ह के लोगों की सुविधा के लिए वर्ष 2022 में पीएचसी गागल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा प्रदान किया गया था, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कोई अभी तक भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस बारे में सीएमओ मंडी डॉ नरेंद्र भारद्वाज ने कहा कि सीएचसी और पीएचसी स्तर पर सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती पर विचार विमर्श किया जाएगा।
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आए दिन अस्पताल पहुंच जाते हैं नशेड़ी
बहुत से नशेड़ी प्रवृत्ति के लोगों का भी अस्पताल में आना जाना लगा रहता है। पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज के बाहर तैनात होमगार्ड के जवान को ही एक नशेड़ी ने बुरी तरह से पीट डाला था। ऐसे में सीएचसी में भी सुरक्षा कर्मचारी की तैनाती होना बहुत जरूरी है ताकि स्टाफ सुरक्षा की चिंता को छोड़ सुरक्षित माहौल में काम कर सके।
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सुरक्षा के प्रबंध किए जाएं पुख्ता
स्थानीय निवासियों अश्वनी पंडित, संजना देवी, योगेश व तिलक राज ने बताया कि आए दिन डॉक्टरों के साथ कई वारदातों की खबरों से डॉक्टर स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने सरकार और विभाग से यहां पर सुरक्षा के प्रबंध पुख्ता करने का आग्रह किया है।