{"_id":"6ab41dc3f76c9cea1a01f544","slug":"the-school-wall-was-found-to-be-encroaching-on-the-neighbors-land-not-government-property-mandi-news-c-90-1-mnd1001-214596-2026-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: स्कूल की दीवार सरकारी नहीं, पड़ोसी की जमीन पर निकली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: स्कूल की दीवार सरकारी नहीं, पड़ोसी की जमीन पर निकली
विज्ञापन
मंडी। सरकाघाट की सिविल जज कोर्ट नंबर-2 ने जमीन पर अतिक्रमण के मामले में राजेंद्र कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने पाया कि कला मेमोरियल स्कूल, बतैल की सुरक्षा दीवार पड़ोसी की जमीन में पर बनी थी। अदालत ने दीवार गिराकर अतिक्रमित भूमि को मूल स्थिति में बहाल करने के आदेश दिए हैं।
राजेंद्र कुमार ने वर्ष 2018 में दो लोगों के खिलाफ स्थायी एवं अनिवार्य निषेधाज्ञा का मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि जनवरी 2015 में स्कूल के खेल मैदान का विस्तार करते हुए उनकी संयुक्त भूमि के हिस्से में सुरक्षा दीवार खड़ी कर दी गई। 27 मई 2015 को राजस्व विभाग की निशानदेही में भूमि पर अतिक्रमण पाया गया था।
अदालत में बचाव पक्ष ने कहा कि दीवार उनकी अपनी खसरा नंबर 1089 की जमीन पर बनाई गई है। हालांकि, अदालत ने 2015 की निशानदेही रिपोर्ट और मौके की ततीमा को विश्वसनीय माना। वहीं, 2016 की निशानदेही में प्रक्रिया संबंधी खामियां पाए जाने पर उसे पर्याप्त आधार नहीं माना गया।
विज्ञापन
सिविल जज ने 23 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए प्रतिवादी को अतिक्रमित भूमि खाली करने, सुरक्षा दीवार गिराने और जमीन को मूल स्थिति में बहाल कर राजेंद्र कुमार को सौंपने के आदेश दिए। अदालत ने दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च वहन करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
राजेंद्र कुमार ने वर्ष 2018 में दो लोगों के खिलाफ स्थायी एवं अनिवार्य निषेधाज्ञा का मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि जनवरी 2015 में स्कूल के खेल मैदान का विस्तार करते हुए उनकी संयुक्त भूमि के हिस्से में सुरक्षा दीवार खड़ी कर दी गई। 27 मई 2015 को राजस्व विभाग की निशानदेही में भूमि पर अतिक्रमण पाया गया था।
विज्ञापन
अदालत में बचाव पक्ष ने कहा कि दीवार उनकी अपनी खसरा नंबर 1089 की जमीन पर बनाई गई है। हालांकि, अदालत ने 2015 की निशानदेही रिपोर्ट और मौके की ततीमा को विश्वसनीय माना। वहीं, 2016 की निशानदेही में प्रक्रिया संबंधी खामियां पाए जाने पर उसे पर्याप्त आधार नहीं माना गया।
विज्ञापन
सिविल जज ने 23 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए प्रतिवादी को अतिक्रमित भूमि खाली करने, सुरक्षा दीवार गिराने और जमीन को मूल स्थिति में बहाल कर राजेंद्र कुमार को सौंपने के आदेश दिए। अदालत ने दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च वहन करने के निर्देश दिए हैं।