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Mandi News: धान की नर्सरी लगाने का सबसे उपयुक्त समय 15 मई से 7 जून रहेगा
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मक्का, चारे के लिए भी यह समय उपयोगी
कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर ने जारी किए सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी
डैहर (मंडी)। सुंदरनगर कृषि विज्ञान केंद्र ने बुधवार को किसानों और पशुपालकों के लिए मई माह के महत्वपूर्ण कृषि सुझाव जारी किए। प्रभारी पंकज सूद ने बताया कि धान की नर्सरी लगाने का सही समय 15 मई से 7 जून है, इसके लिए आरपी-2421, एचपीआर-1068 और कस्तूरी बासमती जैसी उन्नत किस्में अपनाने तथा बीज उपचार जरूरी है। मध्य व ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मई-जून में मक्का की बुआई की सलाह दी गई, जबकि निचले क्षेत्रों में टमाटर, मिर्च और बैंगन में निराई-गुड़ाई व खाद का उपयोग करने को कहा गया।
सब्जियों में भिंडी, फ्रांसबीन, कद्दू वर्गीय फसलों की बुआई के लिए यह समय उपयुक्त है, वहीं उच्च क्षेत्रों में फूलगोभी, पत्ता गोभी, गाजर, मूली व पालक के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया गया। टमाटर और मिर्च को रोगों से बचाने के लिए छिड़काव और खेतों में कच्चे गोबर के उपयोग से बचने की सलाह दी गई। पशुपालकों को पशुओं को गर्मी और लू से बचाने, छायादार स्थान, ठंडा पानी, समय पर टीकाकरण व परजीवी नियंत्रण पर ध्यान देने को कहा गया। मछली पालन में तालाब का जल स्तर 5–6 फीट रखने और संतुलित आहार देने की सलाह भी दी गई।
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कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर ने जारी किए सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी
डैहर (मंडी)। सुंदरनगर कृषि विज्ञान केंद्र ने बुधवार को किसानों और पशुपालकों के लिए मई माह के महत्वपूर्ण कृषि सुझाव जारी किए। प्रभारी पंकज सूद ने बताया कि धान की नर्सरी लगाने का सही समय 15 मई से 7 जून है, इसके लिए आरपी-2421, एचपीआर-1068 और कस्तूरी बासमती जैसी उन्नत किस्में अपनाने तथा बीज उपचार जरूरी है। मध्य व ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मई-जून में मक्का की बुआई की सलाह दी गई, जबकि निचले क्षेत्रों में टमाटर, मिर्च और बैंगन में निराई-गुड़ाई व खाद का उपयोग करने को कहा गया।
सब्जियों में भिंडी, फ्रांसबीन, कद्दू वर्गीय फसलों की बुआई के लिए यह समय उपयुक्त है, वहीं उच्च क्षेत्रों में फूलगोभी, पत्ता गोभी, गाजर, मूली व पालक के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया गया। टमाटर और मिर्च को रोगों से बचाने के लिए छिड़काव और खेतों में कच्चे गोबर के उपयोग से बचने की सलाह दी गई। पशुपालकों को पशुओं को गर्मी और लू से बचाने, छायादार स्थान, ठंडा पानी, समय पर टीकाकरण व परजीवी नियंत्रण पर ध्यान देने को कहा गया। मछली पालन में तालाब का जल स्तर 5–6 फीट रखने और संतुलित आहार देने की सलाह भी दी गई।
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