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Mandi News: आईआईटी मंडी में पोस्टर विवाद पर विराम, जांच समिति ने जारी की रिपोर्ट
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एससी, एसटी एक्ट की धाराएं खारिज, किसी समुदाय को आहत करने की नहीं थी नीयत
अनुशासनात्मक कार्रवाई की जगह छात्रों की होगी काउंसिलिंग, परिसर के लिए बनेंगे नए नियम
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी परिसर में बीते 4 सितंबर को छात्रों की ओर से आयोजित जन्माष्टमी कार्यक्रम में प्रदर्शित एक पोस्टर को लेकर उत्पन्न विवाद पर संस्थान प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। कुलसचिव (रजिस्ट्रार) डॉ. एसके पांडे की ओर से जारी आधिकारिक मीडिया बयान के अनुसार मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है। जांच प्रक्रिया में संस्थान के रिजर्वेशन सेल की भी पूर्ण सहभागिता रही। जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्यक्रम संस्थान का आधिकारिक आयोजन नहीं था। इसमें न तो किसी मान्यता प्राप्त छात्र संस्था की भागीदारी थी और न ही संस्थान के फंड का इस्तेमाल किया गया था। आयोजन का पूरा खर्च छात्रों ने ऐच्छिक सहयोग के माध्यम से वहन किया था। समिति ने स्पष्ट किया कि विवादित पोस्टर को किसी प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त नहीं थी। यह एक व्यक्तिगत छात्र की व्याख्या थी, जो संस्थान के आधिकारिक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व नहीं करती। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस मामले में किसी व्यक्ति या समुदाय को ठेस पहुंचाने की कोई मंशा नहीं थी। समिति के निष्कर्ष के अनुसार, मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधान लागू नहीं होते हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच समिति ने संबंधित छात्रों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक या दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय उन्हें जागरूक करने और काउंसलिंग प्रदान करने की सिफारिश की है। साथ ही, परिसर में इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर स्पष्ट नियमों की कमी को भी चिह्नित किया गया है। समिति ने प्राथमिकता के आधार पर ऐसे आयोजनों के लिए स्पष्ट और प्रभावी दिशा-निर्देश तैयार करने का सुझाव दिया है। आईआईटी मंडी प्रशासन ने जांच समिति की सभी सिफारिशों को स्वीकार करते हुए उन पर अमल शुरू कर दिया है। संस्थान ने परिसर में प्रत्येक सदस्य की गरिमा, समानता और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
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अनुशासनात्मक कार्रवाई की जगह छात्रों की होगी काउंसिलिंग, परिसर के लिए बनेंगे नए नियम
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी परिसर में बीते 4 सितंबर को छात्रों की ओर से आयोजित जन्माष्टमी कार्यक्रम में प्रदर्शित एक पोस्टर को लेकर उत्पन्न विवाद पर संस्थान प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। कुलसचिव (रजिस्ट्रार) डॉ. एसके पांडे की ओर से जारी आधिकारिक मीडिया बयान के अनुसार मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है। जांच प्रक्रिया में संस्थान के रिजर्वेशन सेल की भी पूर्ण सहभागिता रही। जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्यक्रम संस्थान का आधिकारिक आयोजन नहीं था। इसमें न तो किसी मान्यता प्राप्त छात्र संस्था की भागीदारी थी और न ही संस्थान के फंड का इस्तेमाल किया गया था। आयोजन का पूरा खर्च छात्रों ने ऐच्छिक सहयोग के माध्यम से वहन किया था। समिति ने स्पष्ट किया कि विवादित पोस्टर को किसी प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त नहीं थी। यह एक व्यक्तिगत छात्र की व्याख्या थी, जो संस्थान के आधिकारिक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व नहीं करती। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस मामले में किसी व्यक्ति या समुदाय को ठेस पहुंचाने की कोई मंशा नहीं थी। समिति के निष्कर्ष के अनुसार, मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधान लागू नहीं होते हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच समिति ने संबंधित छात्रों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक या दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय उन्हें जागरूक करने और काउंसलिंग प्रदान करने की सिफारिश की है। साथ ही, परिसर में इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर स्पष्ट नियमों की कमी को भी चिह्नित किया गया है। समिति ने प्राथमिकता के आधार पर ऐसे आयोजनों के लिए स्पष्ट और प्रभावी दिशा-निर्देश तैयार करने का सुझाव दिया है। आईआईटी मंडी प्रशासन ने जांच समिति की सभी सिफारिशों को स्वीकार करते हुए उन पर अमल शुरू कर दिया है। संस्थान ने परिसर में प्रत्येक सदस्य की गरिमा, समानता और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।