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Mandi News: सहायक वन रक्षक भर्ती के फैसले का कड़ा विरोध
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लडभड़ोल वन कर्मचारी महासंघ ने उठाए सवाल
सरकार से फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
लडभड़ोल (मंडी)। राज्य सरकार की ओर से हाल ही में सहायक वन रक्षक की भर्ती शुरू करने संबंधी कैबिनेट निर्णय का वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ, वन परिक्षेत्र लडभड़ोल इकाई ने कड़ा विरोध किया है। महासंघ ने सरकार से इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करने की मांग की है।
वन परिक्षेत्र लडभड़ोल इकाई के प्रधान कमल कांत ने इस निर्णय पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वन विभाग में पहले से ही वन रक्षकों के 600 से अधिक पद रिक्त हैं, जिसके कारण जमीनी स्तर पर विभागीय कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में खाली पदों को भरने के बजाय सहायक वन रक्षक जैसे नए पद सृजित कर भर्ती करना संसाधनों की बर्बादी है और इससे विभागीय ढांचा और कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि एक ही बीट में वन रक्षक, सहायक वन रक्षक और वन मित्र जैसी अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू करने से कार्यक्षेत्र में भ्रम की स्थिति पैदा होगी तथा प्रशासनिक टकराव की आशंका बढ़ेगी। इससे फील्ड स्तर पर काम सुचारु रूप से होने के बजाय और अधिक बाधाएं उत्पन्न होंगी।
महासंघ ने स्पष्ट किया है कि सरकार को नई और अव्यवहारिक व्यवस्थाएं लागू करने के बजाय पहले से मौजूद वन रक्षकों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने पर ध्यान देना चाहिए।
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सरकार से फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
लडभड़ोल (मंडी)। राज्य सरकार की ओर से हाल ही में सहायक वन रक्षक की भर्ती शुरू करने संबंधी कैबिनेट निर्णय का वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ, वन परिक्षेत्र लडभड़ोल इकाई ने कड़ा विरोध किया है। महासंघ ने सरकार से इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करने की मांग की है।
वन परिक्षेत्र लडभड़ोल इकाई के प्रधान कमल कांत ने इस निर्णय पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वन विभाग में पहले से ही वन रक्षकों के 600 से अधिक पद रिक्त हैं, जिसके कारण जमीनी स्तर पर विभागीय कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में खाली पदों को भरने के बजाय सहायक वन रक्षक जैसे नए पद सृजित कर भर्ती करना संसाधनों की बर्बादी है और इससे विभागीय ढांचा और कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि एक ही बीट में वन रक्षक, सहायक वन रक्षक और वन मित्र जैसी अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू करने से कार्यक्षेत्र में भ्रम की स्थिति पैदा होगी तथा प्रशासनिक टकराव की आशंका बढ़ेगी। इससे फील्ड स्तर पर काम सुचारु रूप से होने के बजाय और अधिक बाधाएं उत्पन्न होंगी।
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महासंघ ने स्पष्ट किया है कि सरकार को नई और अव्यवहारिक व्यवस्थाएं लागू करने के बजाय पहले से मौजूद वन रक्षकों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने पर ध्यान देना चाहिए।
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