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Mandi News: पसीने से सींची फसल, अब अच्छे भाव की आस
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नाचन की ज्यूणी घाटी के लोट गांव में लहलहाती मटर की फसल। संवाद
ज्यूणी घाटी में मटर-धनिया की खेती में जुटे किसान
फसल अच्छी तो घर की आर्थिकी होगी मजबूत
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। सुबह की पहली किरण के साथ खेतों में पहुंचना और शाम ढलने तक फसल की देखभाल करना ज्यूणी घाटी के किसानों की दिनचर्या बन गई है। बरसात के बाद खेतों में लहलहा रही मटर और धनिये की फसल किसानों की मेहनत और पसीने की कहानी बयां कर रही है। अब किसानों को उम्मीद है कि उनकी मेहनत का फल बाजार में अच्छे दाम के रूप में मिलेगा।
शाला, तुना, दाड़ी, जाच्छ, धंग्यारा, लोट, सरयाच, तोखर, चवाली, देवीदड़ और काहूली क्षेत्रों में किसानों ने बड़े पैमाने पर मटर और धनिये की खेती की है। फसल को तैयार करने के लिए किसान निराई-गुड़ाई, सिंचाई समेत अन्य कृषि कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं। किसानों का कहना है कि खेती में मेहनत तो हर साल करनी पड़ती है लेकिन असली चिंता बाजार भाव को लेकर रहती है। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च करने के बाद यदि मटर और धनिये के अच्छे दाम मिल जाएं तो परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ अगले सीजन की खेती में भी निवेश किया जा सकता है। फसल को खेत में तैयार करना किसान के हाथ में है लेकिन उसकी कीमत बाजार तय करता है।
किसानों की बात
इस बार मटर की फसल काफी अच्छी हुई है। मौसम ने साथ दिया तो उत्पादन भी बेहतर रहने की उम्मीद है। यदि मंडियों में उचित दाम मिले तो किसानों की मेहनत रंग लाएगी और आमदनी में बढ़ोतरी होगी। -हरीश कुमार, किसान
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मटर और धनिये की फसल अच्छी हुई है। किसानों के लिए सबसे जरूरी है कि उपज बेचने के लिए बेहतर विपणन सुविधा के साथ उचित दाम मिलें। यदि स्थानीय स्तर पर बाजार और अच्छी कीमत की सुविधा उपलब्ध हो तो किसानों की आर्थिकी को काफी मजबूती मिल सकती है। -यादव ठाकुर, किसान
धनिये की फसल इस बार खेतों में अच्छी तैयार हुई है। किसानों ने मेहनत के साथ फसल को तैयार किया है। अब उम्मीद है कि बाजार में अच्छे भाव मिलेंगे, जिससे खेती से होने वाली आमदनी बढ़ेगी। -चिंत राम, किसान
स्थानीय स्तर पर खरीद की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को अपनी फसल दूर की मंडियों तक ले जानी पड़ती है। इससे परिवहन खर्च बढ़ता है और कई बार बिचौलियों के कारण उचित दाम भी नहीं मिल पाता। क्षेत्र में विपणन केंद्र, खरीद की व्यवस्था और किसानों को सीधे मंडियों से जोड़ने की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। -पंकज कुमार, किसान
नाचन क्षेत्र में मटर सहित धनिया और अन्य फसलें किसानों की प्रमुख नगदी फसलें हैं। क्षेत्र में नगदी फसलों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। किसान फसल बेचकर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। -राम चंद्र चौधरी, कृषि उपनिदेशक, मंडी
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फसल अच्छी तो घर की आर्थिकी होगी मजबूत
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। सुबह की पहली किरण के साथ खेतों में पहुंचना और शाम ढलने तक फसल की देखभाल करना ज्यूणी घाटी के किसानों की दिनचर्या बन गई है। बरसात के बाद खेतों में लहलहा रही मटर और धनिये की फसल किसानों की मेहनत और पसीने की कहानी बयां कर रही है। अब किसानों को उम्मीद है कि उनकी मेहनत का फल बाजार में अच्छे दाम के रूप में मिलेगा।
शाला, तुना, दाड़ी, जाच्छ, धंग्यारा, लोट, सरयाच, तोखर, चवाली, देवीदड़ और काहूली क्षेत्रों में किसानों ने बड़े पैमाने पर मटर और धनिये की खेती की है। फसल को तैयार करने के लिए किसान निराई-गुड़ाई, सिंचाई समेत अन्य कृषि कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं। किसानों का कहना है कि खेती में मेहनत तो हर साल करनी पड़ती है लेकिन असली चिंता बाजार भाव को लेकर रहती है। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च करने के बाद यदि मटर और धनिये के अच्छे दाम मिल जाएं तो परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ अगले सीजन की खेती में भी निवेश किया जा सकता है। फसल को खेत में तैयार करना किसान के हाथ में है लेकिन उसकी कीमत बाजार तय करता है।
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किसानों की बात
इस बार मटर की फसल काफी अच्छी हुई है। मौसम ने साथ दिया तो उत्पादन भी बेहतर रहने की उम्मीद है। यदि मंडियों में उचित दाम मिले तो किसानों की मेहनत रंग लाएगी और आमदनी में बढ़ोतरी होगी। -हरीश कुमार, किसान
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मटर और धनिये की फसल अच्छी हुई है। किसानों के लिए सबसे जरूरी है कि उपज बेचने के लिए बेहतर विपणन सुविधा के साथ उचित दाम मिलें। यदि स्थानीय स्तर पर बाजार और अच्छी कीमत की सुविधा उपलब्ध हो तो किसानों की आर्थिकी को काफी मजबूती मिल सकती है। -यादव ठाकुर, किसान
धनिये की फसल इस बार खेतों में अच्छी तैयार हुई है। किसानों ने मेहनत के साथ फसल को तैयार किया है। अब उम्मीद है कि बाजार में अच्छे भाव मिलेंगे, जिससे खेती से होने वाली आमदनी बढ़ेगी। -चिंत राम, किसान
स्थानीय स्तर पर खरीद की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को अपनी फसल दूर की मंडियों तक ले जानी पड़ती है। इससे परिवहन खर्च बढ़ता है और कई बार बिचौलियों के कारण उचित दाम भी नहीं मिल पाता। क्षेत्र में विपणन केंद्र, खरीद की व्यवस्था और किसानों को सीधे मंडियों से जोड़ने की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। -पंकज कुमार, किसान
नाचन क्षेत्र में मटर सहित धनिया और अन्य फसलें किसानों की प्रमुख नगदी फसलें हैं। क्षेत्र में नगदी फसलों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। किसान फसल बेचकर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। -राम चंद्र चौधरी, कृषि उपनिदेशक, मंडी