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Mandi News: रिवालसर, नलसर, कुंतभ्यो झील के बहुरेंगे दिन
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मंडी। बल्हघाटी की रिवालसर, नलसर और कुंतभ्यो झील के दिन बहुरेंगे। इन झीलों को गाद और मिट्टी से मुक्त कर संवारा जाएगा। पर्यटकों को लुभाने के लिए झीलों का सौंदर्यीकरण कर सुविधाएं जुटाई जाएंगी। बल्ह विस क्षेत्र के विधायक इंद्र सिंह गांधी ने झीलों के संरक्षण को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है।
मंडी जिले की नलसर, रिवालसर और कुंतभ्यो झील का ऐतिहासिक महत्व है। रिवालसर और इसके साथ लगती कुंतभ्यो झील को हालांकि पर्यटन की दृष्टि से संवारा गया है लेकिन अभी भी यहां पर बहुत कुछ सुविधाएं जुटाना शेष हैं। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले इन स्थलों के प्राचीन अस्तित्व को बनाए रखते हुए इनके पानी के स्रोत किसी तरह की छेड़छाड़ किए बगैर सौंदर्यीकरण करने की योजना है।
बल्ह घाटी की नलसर झील का महाभारतकालीन इतिहास रहा है। करीब 47 बीघा क्षेत्र में फैली झील के बीचों बीच टापू इसकी विशेषता है। बरसात में कमल के फूलों से गुलजार होने वाली इस झील में पर्यटन की अपार संभावना है। अभी तक सरकार की इस ओर नजरें इनायत नहीं हुई हैं। यह स्थल अच्छा पिकनिक स्पाट बन सकता है। जल क्रीड़ा की भी यहां पर अपार संभावना है। कुंतभ्यो झील का भी महाभारतकालीन इतिहास है। किंवदंती है कि अर्जुन ने माता कुंती की प्यास बुझाने के लिए तीर मारकर यहां पानी निकाला था। झील में वर्ष भर पानी रहता है।
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नलसर झील के साथ रिवालसर और कुंतभ्यो को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। इन तीनों झीलों को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है। इन ऐतिहासिक स्थलों को संवार कर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा।
-इंद्र सिंह गांधी, विधायक, बल्ह विधानसभा क्षेत्र
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मंडी जिले की नलसर, रिवालसर और कुंतभ्यो झील का ऐतिहासिक महत्व है। रिवालसर और इसके साथ लगती कुंतभ्यो झील को हालांकि पर्यटन की दृष्टि से संवारा गया है लेकिन अभी भी यहां पर बहुत कुछ सुविधाएं जुटाना शेष हैं। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले इन स्थलों के प्राचीन अस्तित्व को बनाए रखते हुए इनके पानी के स्रोत किसी तरह की छेड़छाड़ किए बगैर सौंदर्यीकरण करने की योजना है।
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बल्ह घाटी की नलसर झील का महाभारतकालीन इतिहास रहा है। करीब 47 बीघा क्षेत्र में फैली झील के बीचों बीच टापू इसकी विशेषता है। बरसात में कमल के फूलों से गुलजार होने वाली इस झील में पर्यटन की अपार संभावना है। अभी तक सरकार की इस ओर नजरें इनायत नहीं हुई हैं। यह स्थल अच्छा पिकनिक स्पाट बन सकता है। जल क्रीड़ा की भी यहां पर अपार संभावना है। कुंतभ्यो झील का भी महाभारतकालीन इतिहास है। किंवदंती है कि अर्जुन ने माता कुंती की प्यास बुझाने के लिए तीर मारकर यहां पानी निकाला था। झील में वर्ष भर पानी रहता है।
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नलसर झील के साथ रिवालसर और कुंतभ्यो को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। इन तीनों झीलों को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है। इन ऐतिहासिक स्थलों को संवार कर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा।
-इंद्र सिंह गांधी, विधायक, बल्ह विधानसभा क्षेत्र