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Mandi News: पत्नी और दो बच्चों को गुजारा भत्ता देने के आदेश
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फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश मंडी की अदालत ने सुनाया फैसला
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश मंडी की अदालत ने पत्नी और उसके दो नाबालिग बच्चों की याचिका स्वीकार करते हुए पति को 18 हजार रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह राशि याचिका दायर करने की तिथि से देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आठ हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में भी अदा करने के लिए कहा गया है।
मामले के तथ्यों के अनुसार महिला ने अदालत को बताया कि उसका विवाह 24 दिसंबर 2012 को हुआ था और उसके दो बच्चे हैं, जो वर्तमान में उसके साथ रह रहे हैं। उसने आरोप लगाया कि विवाह के कुछ सालों बाद पति ने उसके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट शुरू कर दी। मार्च 2018 में उसे बच्चों सहित घर से निकाल दिया गया, जिसके बाद से वह अपने मायके में रह रही है। महिला ने कहा कि उसके पास कोई स्थायी आय का साधन नहीं है और वह अपने माता-पिता पर निर्भर है। वहीं, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक खर्च का बोझ उठाना उसके लिए कठिन हो रहा है। दूसरी ओर पति ने अदालत में इन आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि पत्नी स्वयं घर छोड़कर गई थी। उसने अपनी आय सीमित बताते हुए भरण-पोषण देने में असमर्थता जताई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पति सरकारी कार्यालय में वरिष्ठ लेखाकार के पद पर कार्यरत है और उसकी नियमित आय है। इसके बावजूद उसने पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण में लापरवाही बरती। अदालत ने यह भी माना कि महिला का अलग रहना परिस्थितियों के कारण उचित है और उसे सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है। अदालत ने पत्नी को छह हजार रुपये प्रति माह और दोनों नाबालिग बच्चों को 6-6 हजार रुपये प्रति माह देने के आदेश दिए। इस प्रकार कुल 18 हजार रुपये मासिक भरण-पोषण निर्धारित किया गया।
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मंडी। फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश मंडी की अदालत ने पत्नी और उसके दो नाबालिग बच्चों की याचिका स्वीकार करते हुए पति को 18 हजार रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह राशि याचिका दायर करने की तिथि से देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आठ हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में भी अदा करने के लिए कहा गया है।
मामले के तथ्यों के अनुसार महिला ने अदालत को बताया कि उसका विवाह 24 दिसंबर 2012 को हुआ था और उसके दो बच्चे हैं, जो वर्तमान में उसके साथ रह रहे हैं। उसने आरोप लगाया कि विवाह के कुछ सालों बाद पति ने उसके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट शुरू कर दी। मार्च 2018 में उसे बच्चों सहित घर से निकाल दिया गया, जिसके बाद से वह अपने मायके में रह रही है। महिला ने कहा कि उसके पास कोई स्थायी आय का साधन नहीं है और वह अपने माता-पिता पर निर्भर है। वहीं, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक खर्च का बोझ उठाना उसके लिए कठिन हो रहा है। दूसरी ओर पति ने अदालत में इन आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि पत्नी स्वयं घर छोड़कर गई थी। उसने अपनी आय सीमित बताते हुए भरण-पोषण देने में असमर्थता जताई।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पति सरकारी कार्यालय में वरिष्ठ लेखाकार के पद पर कार्यरत है और उसकी नियमित आय है। इसके बावजूद उसने पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण में लापरवाही बरती। अदालत ने यह भी माना कि महिला का अलग रहना परिस्थितियों के कारण उचित है और उसे सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है। अदालत ने पत्नी को छह हजार रुपये प्रति माह और दोनों नाबालिग बच्चों को 6-6 हजार रुपये प्रति माह देने के आदेश दिए। इस प्रकार कुल 18 हजार रुपये मासिक भरण-पोषण निर्धारित किया गया।
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