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Mandi News: पत्नी को चार, नाबालिग दो बच्चों को 35-35 सौ रुपये मासिक भत्ता देने के आदेश
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मंडी। प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट की अदालत ने भरण पोषण से जुड़ी याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार किया। अदालत ने पत्नी को चार हजार रुपये और नाबालिग दोनों बच्चों को 3,500-3,500 रुपये मासिक भत्ता देने के आदेश दिए।। यह भत्ता याचिका दायर करने की तिथि 22 जून 2022 से लागू होगा। साथ ही अदालत ने पति को तीन माह के भीतर बकाया राशि चुकाने और पांच हजार रुपये मुकदमेबाज़ी खर्च भी अदा करने के निर्देश दिए।
मामले के तथ्यों के अनुसार थुनाग क्षेत्र की महिला का विवाह अर्की क्षेत्र के व्यक्ति के साथ 25 नवंबर 2011 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति ने दहेज की मांग शुरू की। मई 2017 में प्रताड़ना बढ़ने पर हेमलता को मायके जाना पड़ा। 24 मई 2021 को मारपीट की एक और घटना हुई, जिसके बाद महिला बच्चों सहित फिर मायके लौट आई। तब से पति ने न तो कोई आर्थिक सहायता दी और न ही बच्चों का हालचाल पूछा।
सुनवाई के दौरान महिला ने जमीन के दस्तावेज (जमाबंदी), ट्रक के कागजात और बीमा पॉलिसी की कॉपी अदालत में पेश की, जिनसे साबित हुआ कि पति के पास पर्याप्त साधन हैं। पति मदन कुमार ने आरोपों से इन्कार किया और कहा कि पत्नी अपनी मर्जी से मायके में रह रही है। अदालत ने माना कि पत्नी और बच्चों की कोई आय नहीं है और पति सक्षम होते हुए भी उनका पालन-पोषण नहीं कर रहा है।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को दर-दर की ठोकरों से बचाना है। सर्वोच्च न्यायालय भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि सक्षम पति अपनी पत्नी और बच्चों को भूख और तंगी में छोड़ने का अधिकार नहीं रखता। संवाद
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मामले के तथ्यों के अनुसार थुनाग क्षेत्र की महिला का विवाह अर्की क्षेत्र के व्यक्ति के साथ 25 नवंबर 2011 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति ने दहेज की मांग शुरू की। मई 2017 में प्रताड़ना बढ़ने पर हेमलता को मायके जाना पड़ा। 24 मई 2021 को मारपीट की एक और घटना हुई, जिसके बाद महिला बच्चों सहित फिर मायके लौट आई। तब से पति ने न तो कोई आर्थिक सहायता दी और न ही बच्चों का हालचाल पूछा।
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सुनवाई के दौरान महिला ने जमीन के दस्तावेज (जमाबंदी), ट्रक के कागजात और बीमा पॉलिसी की कॉपी अदालत में पेश की, जिनसे साबित हुआ कि पति के पास पर्याप्त साधन हैं। पति मदन कुमार ने आरोपों से इन्कार किया और कहा कि पत्नी अपनी मर्जी से मायके में रह रही है। अदालत ने माना कि पत्नी और बच्चों की कोई आय नहीं है और पति सक्षम होते हुए भी उनका पालन-पोषण नहीं कर रहा है।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को दर-दर की ठोकरों से बचाना है। सर्वोच्च न्यायालय भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि सक्षम पति अपनी पत्नी और बच्चों को भूख और तंगी में छोड़ने का अधिकार नहीं रखता। संवाद