{"_id":"6ab2cdd44e1c77e5c50c6d74","slug":"morning-walk-turns-into-the-final-run-of-lifemorning-walk-turns-into-the-final-run-of-life-mandi-news-c-90-1-mnd1018-214483-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: सुबह की सैर बनी जिंदगी की आखिरी दौड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: सुबह की सैर बनी जिंदगी की आखिरी दौड़
विज्ञापन
थुनाग (मंडी)। किसे खबर थी कि मंगलवार की सुहानी सुबह जिंदगी की आखिरी सुबह बन जाएगी। खिलखिलाती उम्र, आंखों में बेहतर भविष्य के सपने और सीने में कुछ कर गुजरने का जज्बा... लेकिन कुदरत को शायद कुछ और ही मंजूर था। बगस्याड बस स्टॉपेज के पास जब 17 वर्षीय जीत ठाकुर अपने साथियों के साथ दौड़ लगा रहा था। तब कोई नहीं जानता था कि यह उसकी जिंदगी की अंतिम दौड़ साबित होगी। सड़क किनारे अचानक गश खाकर गिरे जीत की सांसें ऐसी थमीं कि फिर कभी न लौट सकीं।
गांव कथियाला ग्राम पंचायत शिल्हीबागी निवासी जीत ठाकुर पुत्र दामोदर दास रोज की तरह मंगलवार सुबह अपने दोस्तों कुशाल, देसराज और टेक सिंह के साथ सुबह सैर पर निकला था। चारों दोस्तों ने सड़क पर खूब दौड़ लगाई। पसीना पोंछते हुए जैसे ही वे बस स्टॉपेज के पास रुके, जीत अचानक बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ा। घबराए साथियों ने तुरंत उसे संभाला और आनन-फानन में सिविल अस्पताल बगस्याड पहुंचाया, लेकिन तब तक उसकी रुह जिस्म का साथ छोड़ चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जीत ने महज एक महीने पहले ही आईटीआई बगस्याड में मोटर व्हीकल मेकेनिक ट्रेड में दाखिला लिया था। अपने सपनों को तराशने के लिए वह बगस्याड में किराये का कमरा लेकर दोस्तों के साथ रह रहा था। जीत अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी एक बहन है, जिसका रो-रोकर बुरा हाल है।
विज्ञापन
इकलौते चिराग के बुझ जाने से हंसते-खेलते परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। कमरा साझेदार दोस्त स्तब्ध हैं। एसपी विनोद कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।
विज्ञापन
गांव कथियाला ग्राम पंचायत शिल्हीबागी निवासी जीत ठाकुर पुत्र दामोदर दास रोज की तरह मंगलवार सुबह अपने दोस्तों कुशाल, देसराज और टेक सिंह के साथ सुबह सैर पर निकला था। चारों दोस्तों ने सड़क पर खूब दौड़ लगाई। पसीना पोंछते हुए जैसे ही वे बस स्टॉपेज के पास रुके, जीत अचानक बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ा। घबराए साथियों ने तुरंत उसे संभाला और आनन-फानन में सिविल अस्पताल बगस्याड पहुंचाया, लेकिन तब तक उसकी रुह जिस्म का साथ छोड़ चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
विज्ञापन
जीत ने महज एक महीने पहले ही आईटीआई बगस्याड में मोटर व्हीकल मेकेनिक ट्रेड में दाखिला लिया था। अपने सपनों को तराशने के लिए वह बगस्याड में किराये का कमरा लेकर दोस्तों के साथ रह रहा था। जीत अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी एक बहन है, जिसका रो-रोकर बुरा हाल है।
विज्ञापन
इकलौते चिराग के बुझ जाने से हंसते-खेलते परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। कमरा साझेदार दोस्त स्तब्ध हैं। एसपी विनोद कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।