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Mandi News: चालक न ईंधन, स्टार्ट नहीं हो पा रहे एंबुलेंस के इंजन
Thu, 29 Aug 2024 05:20 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 29 Aug 2024 05:20 AM IST
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जोगिंद्रनगर अस्पताल में धूल फांक रही भेंट की गई दोनों एंबुलेंस। संवाद
जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर के नागरिक अस्पताल में भेंट की गई दो एंबुलेंस चालक और ईंधन के बजटीय प्रावधान न होने के कारण धूल फांक रही हैं। एक एंबुलेंस दिवंगत सांसद राम स्वरूप शर्मा और दूसरी विधायक प्रकाश राणा ने अस्पताल को भेंट की थी, लेकिन सरकारी व्यवस्था में कमी के कारण इन एंबुलेंस के इंजन भी स्टार्ट नहीं हो पा रहे हैं और वाहन शोपीस बनकर रह गए हैं।
लंबे समय से इस्तेमाल न होने के कारण इन वाहनों की हालत खराब हो गई है और बिना चालक के इनके पहिए भी जाम हो चुके हैं। अस्पताल में पहले तैनात दोनों चालकों के पद खाली होने और आउटसोर्स पर तैनात चालकों के हटाए जाने से यह समस्या और बढ़ गई है। गंभीर मरीजों को भी अस्पताल में उपलब्ध इन एंबुलेंसों का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि जोगिंद्रनगर से मरीजों को टांडा के लिए रेफर किया जाता है।
तीमारदार महेश, सुनील, विनोद कुमार, मीना देवी और सरिता ने बताया कि 108 एंबुलेंस की गैर मौजूदगी में ये एंबुलेंस पहले गंभीर मरीजों के लिए संजीवनी साबित होती थीं, लेकिन अब चालकों की कमी के कारण समस्या खड़ी हो गई है। 100 बिस्तर वाले इस अस्पताल में हर दिन 10 से 15 घायल मरीज आते हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद टांडा या नेरचौक रेफर किया जाता है, लेकिन एंबुलेंस होते हुए भी उन्हें सुविधा नहीं मिल रही है।
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अस्पताल के एसएमओ डॉ. रोशन लाल कौंडल ने बताया कि चालकों की कमी के कारण दोनों एंबुलेंस खड़ी हैं। स्थानीय विधायक प्रकाश राणा ने कहा कि अगर सरकार और स्वास्थ्य विभाग चालकों के रिक्त पदों को भरने में रुचि दिखाते हैं, तो इन एंबुलेंस का लाभ आपातकालीन समय में मरीजों को मिल सकता है।
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लंबे समय से इस्तेमाल न होने के कारण इन वाहनों की हालत खराब हो गई है और बिना चालक के इनके पहिए भी जाम हो चुके हैं। अस्पताल में पहले तैनात दोनों चालकों के पद खाली होने और आउटसोर्स पर तैनात चालकों के हटाए जाने से यह समस्या और बढ़ गई है। गंभीर मरीजों को भी अस्पताल में उपलब्ध इन एंबुलेंसों का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि जोगिंद्रनगर से मरीजों को टांडा के लिए रेफर किया जाता है।
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तीमारदार महेश, सुनील, विनोद कुमार, मीना देवी और सरिता ने बताया कि 108 एंबुलेंस की गैर मौजूदगी में ये एंबुलेंस पहले गंभीर मरीजों के लिए संजीवनी साबित होती थीं, लेकिन अब चालकों की कमी के कारण समस्या खड़ी हो गई है। 100 बिस्तर वाले इस अस्पताल में हर दिन 10 से 15 घायल मरीज आते हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद टांडा या नेरचौक रेफर किया जाता है, लेकिन एंबुलेंस होते हुए भी उन्हें सुविधा नहीं मिल रही है।
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अस्पताल के एसएमओ डॉ. रोशन लाल कौंडल ने बताया कि चालकों की कमी के कारण दोनों एंबुलेंस खड़ी हैं। स्थानीय विधायक प्रकाश राणा ने कहा कि अगर सरकार और स्वास्थ्य विभाग चालकों के रिक्त पदों को भरने में रुचि दिखाते हैं, तो इन एंबुलेंस का लाभ आपातकालीन समय में मरीजों को मिल सकता है।