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Mandi News: ''''महाशिवरात्रि मेले के दौरान धाम के लिए नहीं जाएगा कोई भी देवता''
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मंडी में सर्व देवता समिति की बैठक में चर्चा करते पदाधिकारी। संवाद
मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले के दौरान अब कोई भी देवी-देवता अपना निर्धारित स्थान छोड़कर मेले से धाम के लिए नहीं जाएगा। यह स्पष्ट और सख्त निर्णय सर्व देवता सेवा समिति जिला मंडी की कार्यकारिणी बैठक में लिया गया। बैठक संस्कृति सदन कांगणी में समिति अध्यक्ष शिव पाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कई प्रस्ताव पारित किए गए।
समिति ने चर्चा की कि महाशिवरात्रि मेले में देवी-देवताओं के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में यदि मेले के दौरान देवता धाम के लिए चले जाते हैं तो श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचती है और देव परंपरा की गरिमा भी प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि मेले की अवधि में सभी देवी-देवता अपने निर्धारित स्थान पर ही विराजमान रहेंगे।
बैठक में आम जनता की शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई गई। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि कुछ स्थानों पर कारदारों की ओर से देवताओं को घर बुलाने पर आधा घंटा बैठने के नाम पर भारी राशि वसूले जाने और एक ही दिन में कई कार्यक्रम किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। समिति ने इसे देव आस्था के विपरीत बताते हुए कहा कि कोई भी देवता धन की मांग नहीं करता और श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार स्वयं चढ़ावा चढ़ाते हैं। भविष्य में इस प्रकार की शिकायत मिलने पर संबंधित कारदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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इसके अलावा महाशिवरात्रि मेले के दौरान देवताओं के बैठने की व्यवस्था, गैर-पंजीकृत देवताओं के लिए अलग स्थान निर्धारण, एफआरए के लंबित दस बिस्वा भूमि मामलों के शीघ्र निपटारे और महंगाई को देखते हुए राशन भत्ते में 50 प्रतिशत वृद्धि की मांग से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में पारित किए गए। बैठक में वरिष्ठ उपप्रधान भीम चंद सरोच, उपप्रधान गोबिंद ठाकुर, मुख्य सलाहकार रेवती राम, लेख राज पटियाल, राजू राम, मोहन लाल, तीर्थ राज आदि मौजूद रहे।
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समिति ने चर्चा की कि महाशिवरात्रि मेले में देवी-देवताओं के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में यदि मेले के दौरान देवता धाम के लिए चले जाते हैं तो श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचती है और देव परंपरा की गरिमा भी प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि मेले की अवधि में सभी देवी-देवता अपने निर्धारित स्थान पर ही विराजमान रहेंगे।
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बैठक में आम जनता की शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई गई। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि कुछ स्थानों पर कारदारों की ओर से देवताओं को घर बुलाने पर आधा घंटा बैठने के नाम पर भारी राशि वसूले जाने और एक ही दिन में कई कार्यक्रम किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। समिति ने इसे देव आस्था के विपरीत बताते हुए कहा कि कोई भी देवता धन की मांग नहीं करता और श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार स्वयं चढ़ावा चढ़ाते हैं। भविष्य में इस प्रकार की शिकायत मिलने पर संबंधित कारदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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इसके अलावा महाशिवरात्रि मेले के दौरान देवताओं के बैठने की व्यवस्था, गैर-पंजीकृत देवताओं के लिए अलग स्थान निर्धारण, एफआरए के लंबित दस बिस्वा भूमि मामलों के शीघ्र निपटारे और महंगाई को देखते हुए राशन भत्ते में 50 प्रतिशत वृद्धि की मांग से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में पारित किए गए। बैठक में वरिष्ठ उपप्रधान भीम चंद सरोच, उपप्रधान गोबिंद ठाकुर, मुख्य सलाहकार रेवती राम, लेख राज पटियाल, राजू राम, मोहन लाल, तीर्थ राज आदि मौजूद रहे।