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राशन कार्ड बनाने में देरी पर नप अध्यक्ष-ईओ को हर्जाना
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
Updated Wed, 12 Aug 2015 11:05 PM IST
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राशन कार्ड बनाने में देरी किए जाने पर नगर परिषद के अध्यक्ष और कार्यकारी अधिकारी की सेवाओं में कमी करार देते हुए जिला उपभोक्ता फोरम ने उपभोक्ता के पक्ष में पांच हजार रुपये हर्जाना अदा करने का फैसला सुनाया है। इसके अलावा उन्हें दो हजार रुपये शिकायत व्यय भी अदा करना होगा। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष पुरेंद्र वैद्य और सदस्यों रमा वर्मा व आकाश शर्मा ने सैण मुहल्ला निवासी राकेश सैनी पुत्र मेघ सिंह सैनी की शिकायत को उचित मानते हुए मंडी नगर परिषद के अध्यक्ष और कार्यकारी अधिकारी को उपभोक्ता के पक्ष में उक्त हर्जाना और शिकायत व्यय अदा करने का फैसला सुनाया है। अधिवक्ता डीके भारद्वाज के माध्यम से फोरम में दायर शिकायत के अनुसार उपभोक्ता ने अलग राशन कार्ड बनवाने के लिए नगर परिषद के पास आवेदन किया था। जिसके लिए उपभोक्ता ने शपथ पत्र सहित पचास रुपये बतौर फीस लिए थे। हालांकि नगर परिषद की ओर से उपभोक्ता के परिवार के सदस्यों का नाम उनकी माता के संयुक्त परिवार से काट दिया, लेकिन उन्हें अलग राशन कार्ड देने से इंकार कर दिया।
ऐसे में उपभोक्ता का परिवार एलपीजी सिलेंडर और सस्ते राशन सहित कई सुविधाओं से वंचित हो गया। उपभोक्ता ने कानूनी नोटिस जारी कर राशन कार्ड बनाने के लिए कहा था। इसके बावजूद भी उनका अलग राशन कार्ड जारी नहीं किया गया और यह आपत्ति जताई गई कि उपभोक्ता ने किराया अदा नहीं किया है।
हालांकि उपभोक्ता के मुताबिक उन्होंने सभी किराए चुकाए हुए थे। नगर परिषद के राशन कार्ड जारी न करने से उपभोक्ता को हुई परेशानी के कारण उन्होंने फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि साल 2013 के जनवरी-फरवरी माह में राशन कार्ड नगर परिषद की ओर से जारी होते थे और उन्हें ही उपभोक्ता का कार्ड जारी करना था। लेकिन नगर परिषद ने बिना किसी कारण से उपभोक्ता को राशन कार्ड जारी करने में देरी की। इस गैरजरूरी देरी से उपभोक्ता को कठिनाइयों का सामना करना पडा। उपभोक्ता को नगर परिषद की सेवाओं के कारण असुविधाएं झेलनी पड़ी। जिसके चलते फोरम ने नगर परिषद के प्रधान और कार्यकारी अधिकारी को उपभोक्ता के पक्ष में उक्त हर्जाना और शिकायत व्यय अदा करने का फैसला सुनाया है।
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ऐसे में उपभोक्ता का परिवार एलपीजी सिलेंडर और सस्ते राशन सहित कई सुविधाओं से वंचित हो गया। उपभोक्ता ने कानूनी नोटिस जारी कर राशन कार्ड बनाने के लिए कहा था। इसके बावजूद भी उनका अलग राशन कार्ड जारी नहीं किया गया और यह आपत्ति जताई गई कि उपभोक्ता ने किराया अदा नहीं किया है।
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हालांकि उपभोक्ता के मुताबिक उन्होंने सभी किराए चुकाए हुए थे। नगर परिषद के राशन कार्ड जारी न करने से उपभोक्ता को हुई परेशानी के कारण उन्होंने फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि साल 2013 के जनवरी-फरवरी माह में राशन कार्ड नगर परिषद की ओर से जारी होते थे और उन्हें ही उपभोक्ता का कार्ड जारी करना था। लेकिन नगर परिषद ने बिना किसी कारण से उपभोक्ता को राशन कार्ड जारी करने में देरी की। इस गैरजरूरी देरी से उपभोक्ता को कठिनाइयों का सामना करना पडा। उपभोक्ता को नगर परिषद की सेवाओं के कारण असुविधाएं झेलनी पड़ी। जिसके चलते फोरम ने नगर परिषद के प्रधान और कार्यकारी अधिकारी को उपभोक्ता के पक्ष में उक्त हर्जाना और शिकायत व्यय अदा करने का फैसला सुनाया है।
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