{"_id":"66ed74d0561ae722c60c1cd9","slug":"mango-of-thailand-grow-in-dhaulakunwa-mandi-news-c-177-1-nhn1001-132889-2024-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: धौलाकुआं में थाईलैंड के आम का बगीचा लगाने में भूराराम ने पाई सफलता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: धौलाकुआं में थाईलैंड के आम का बगीचा लगाने में भूराराम ने पाई सफलता
विज्ञापन
धौलाकुआं के प्रगतिशील बागवान भूराराम द्वारा तैयार किया गया थाईलेंड के आम का बगीचा। संवाद
धौलाकुआं में थाईलैंड के आम का बगीचा लगाने में भूराराम ने पाई सफलता
दो साल बाद क्षेत्र के लोग चख सकेंगे विदेशी किस्म के रसीले आम का स्वाद
10 इंच तक होती है आम के फल की लंबाई
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। बागवानी के क्षेत्र में पांवटा ने प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। यहां पर किन्नू और आम की पैदावार कर बागवान अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। इसी कड़ी में क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान भूराराम ने थाईलैंड के आम का बगीचा तैयार करने में सफलता पाई है। दो साल बाद क्षेत्र के लोग थाईलैंड के आम का स्वाद चख सकेंगे।
धौलाकुआं के प्रगतिशील बागवान भूराराम ने बताया कि उनके एक मित्र शिव ओम दो साल पहले थाईलैंड गए हुए थे। उन्होंने वहां के बाद आम के अलग स्वाद और कई प्रकार की विशेष जानकारियां साझा की। इसके बाद उन्होंने अंबाला तक एक पौधा मंगवाया जिसकी देखभाल का विशेष ध्यान रखा गया। खास कर यहां कि जलवायु के अनुसार पौधा तैयार करने में कामयाबी हासिल हुई। इसके बाद उन्हें उम्मीद जग गई।
भूराराम ने बताया कि एक पेड़ तैयार हो जाने के बाद उन्होंने इस पेड़ से अभी तक 50 पौधे तैयार कर बगीचा लगाया है जिसकी संख्या को लगातार बढ़ाया भी जा रहा है। उनसे दो साल तक फल आने की उम्मीद है। इसमें विशेष बात यह भी है कि यह पेड़ यहां दूसरे आम की किस्मों से पहले फल देगा और इसका आकार और रंग भी मनमोहक होगा। उन्होंने बताया कि इस पौधे के फल की लंबाई 10 इंच तक हो सकती है। ऐसे में बेहतरीन फल मिलने की उम्मीद है।
विज्ञापन
बता दें कि क्षेत्र के धौलाकुआं, भारापुर, रामपुर, फूलपुर, शम्भूवाला, बहराल, डोबरी सालवाला, भगाणी सहित समूचे क्षेत्र में 300 परिवार आम की पैदावार कर रोजी रोटी कमाते हैं। यहां अधिकतर आम की 15 किस्में लगाई गई हैं जिसमें दशहरी आम की ज्यादा मांग रहती है। इसके अलावा आम की किस्मों में पांवटा में लंगड़ा, मालदा, चौसा, आम्रपाली, अंबिका, सिंधु, अलफांसो, महाराष्ट्र आदि किस्में प्रमुख हैं।
-भारत में आम की बहुत किस्में तैयार हैं। थाईलैंड की जलवायु में तैयार आम यहां टिक पाएगा या नहीं यह फल आने पर ही पता चलेगा। बागवान की ओर से बाग तैयार किया जाना सराहनीय है।
-संतोष कुमार बख्शी, उपनिदेशक बागवानी विभाग सिरमौर
विज्ञापन
दो साल बाद क्षेत्र के लोग चख सकेंगे विदेशी किस्म के रसीले आम का स्वाद
10 इंच तक होती है आम के फल की लंबाई
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। बागवानी के क्षेत्र में पांवटा ने प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। यहां पर किन्नू और आम की पैदावार कर बागवान अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। इसी कड़ी में क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान भूराराम ने थाईलैंड के आम का बगीचा तैयार करने में सफलता पाई है। दो साल बाद क्षेत्र के लोग थाईलैंड के आम का स्वाद चख सकेंगे।
धौलाकुआं के प्रगतिशील बागवान भूराराम ने बताया कि उनके एक मित्र शिव ओम दो साल पहले थाईलैंड गए हुए थे। उन्होंने वहां के बाद आम के अलग स्वाद और कई प्रकार की विशेष जानकारियां साझा की। इसके बाद उन्होंने अंबाला तक एक पौधा मंगवाया जिसकी देखभाल का विशेष ध्यान रखा गया। खास कर यहां कि जलवायु के अनुसार पौधा तैयार करने में कामयाबी हासिल हुई। इसके बाद उन्हें उम्मीद जग गई।
विज्ञापन
भूराराम ने बताया कि एक पेड़ तैयार हो जाने के बाद उन्होंने इस पेड़ से अभी तक 50 पौधे तैयार कर बगीचा लगाया है जिसकी संख्या को लगातार बढ़ाया भी जा रहा है। उनसे दो साल तक फल आने की उम्मीद है। इसमें विशेष बात यह भी है कि यह पेड़ यहां दूसरे आम की किस्मों से पहले फल देगा और इसका आकार और रंग भी मनमोहक होगा। उन्होंने बताया कि इस पौधे के फल की लंबाई 10 इंच तक हो सकती है। ऐसे में बेहतरीन फल मिलने की उम्मीद है।
विज्ञापन
बता दें कि क्षेत्र के धौलाकुआं, भारापुर, रामपुर, फूलपुर, शम्भूवाला, बहराल, डोबरी सालवाला, भगाणी सहित समूचे क्षेत्र में 300 परिवार आम की पैदावार कर रोजी रोटी कमाते हैं। यहां अधिकतर आम की 15 किस्में लगाई गई हैं जिसमें दशहरी आम की ज्यादा मांग रहती है। इसके अलावा आम की किस्मों में पांवटा में लंगड़ा, मालदा, चौसा, आम्रपाली, अंबिका, सिंधु, अलफांसो, महाराष्ट्र आदि किस्में प्रमुख हैं।
-भारत में आम की बहुत किस्में तैयार हैं। थाईलैंड की जलवायु में तैयार आम यहां टिक पाएगा या नहीं यह फल आने पर ही पता चलेगा। बागवान की ओर से बाग तैयार किया जाना सराहनीय है।
-संतोष कुमार बख्शी, उपनिदेशक बागवानी विभाग सिरमौर