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दो घंटे पहले मिले भूस्खलन की चेतावनी

Wed, 09 Feb 2022 11:06 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 11:06 PM IST
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Landslide warning received two hours ago
मंडी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार लैंडस्लाइड मानीटरिंग एंड अर्ली वार्निंग सिस्टम डिवाइस मंडी जिले में भूस्खलन के अतिसंवदेनशील दस स्थानों पर लगेगा। प्रशासन और आईआईटी मंडी की टीम विभिन्न विभागों के समन्वय से स्थान चिह्नित करेगी। इस उपकरण में लगे सेंसर भूस्खलन से दस से पंद्रह मिनट पहले आसपास के लोगों को फ्लैश लाइट, हूटर और एसएमएस के माध्यम से चेतावनी देंगे।
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सोमवार को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) मंडी के साथ आईआईटी ने एक सहमति करार (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। आईआईटी मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने सहमति करार पर डीडीएमए मंडी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त अरिंदम चौधरी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। लैंडस्लाइड मानीटरिंग एंड अर्ली वार्निंग सिस्टम डिवाइस का विकास स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वरुण दत्त और स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर डॉ. केवी उदय ने 2017 में किया था। कोटरोपी में भूस्खलन से 47 लोगों की मौत के बाद यह सिस्टम इजाद किया गया। कोटरोपी और हणोगी में वर्तमान में यह उपकरण काम कर रहे हैं।
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सुझाव : डेढ़ से दो घंटे पहले मिले चेतावनी
एडीएम राजीव कुमार ने सुझाव दिया कि भविष्य में इस प्रणाली के लिए चेतावनी सीमा 1.5 से दो घंटे तक बढ़ाई जाए। वर्तमान में भूस्खलन की चेतावनी इससे दस मिनट पहले दी जाती है। मिट्टी की गतिविधि में परिवर्तन के आधार पर यह चेतावनी दी जाती है। टेक्स्ट मैसेज भी भेजे जाते हैं। यह सिस्टम पांच मिमी से अधिक बारिश का पूर्वानुमान होने पर वर्षा की चेतावनी भी जारी करता है।
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इस दौरान जिला प्रशासन ने मकई जैसे अनाज (सेहत के लिए अच्छे और आसानी से उपलब्ध) के लिए कम लागत की प्रोसेसिंग यूनिट विकसित करने का आग्रह किया। वहीं, आईआईटी मंडी के निदेशक ने हिमाचल के छोटे गांवों में परिवहन के लिए कम लागत के और इम्प्रोवाइज्ड रोपवे साझा करने का भी सुझाव दिया है।
भूस्खलन पर हमारे पास डेटा विश्लेषण की मजबूत व्यवस्था है और यह किसी स्थिति में विफल नहीं होना चाहिए। हम जब भी कोई प्रौद्योगिकी प्रस्तुत करते हैं तो इसे सर्वश्रेष्ठ और हिमाचल के लिए उपयोगी बनाने पर जोर देते हैं।

-प्रो लक्ष्मीधर बेहरा, निदेशक आईआईटी मंडी
हमारी पहली प्राथमिकता मानव जीवन बचाना है और इस चेतावनी प्रणाली के माध्यम से प्रशासन लोगों को अधिक कुशलता से सुरक्षित निकलने में मदद करेगा। हिमाचल प्रदेश राज्य में भूस्खलन और सड़क समस्याओं के समाधान के लिए भारी निवेश करता है और हमारी यह पहल जन जीवन रक्षा में कारगर होगी। इन चेतावनी प्रणालियों को चोरी या शरारत से बचाने का समाधान भी होना चाहिए।
-अरिंदम चौधरी, डीसी मंडी
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