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औचक निरीक्षण पर पहुंचे कुलपति, एक प्रधानाचार्य और एक अध्यापक के साहारे चलता मिला आयुर्वेदिक कॉलेज
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बी फार्मेसी कालेज जोगिंद्रनगर का औचक निरीक्षण करते कुलपति।
- फोटो : Mandi
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर के कुलपति डॉ. एसपी बंसल ने बीफार्मेसी आयुर्वेदिक कॉलेज अपरोचरोड़ जोगिंद्रनगर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं को पेश आ रही समस्याओं के बारे में जाना। इस समय कॉलेज प्रधानाचार्य और एक शिक्षक के सहारे ही चल रहा है। उन्होंने प्रधानाचार्य डॉ. टेकचंद ठाकुर से इस संदर्भ में जानकारी ली। वहीं, एकमात्र प्राध्यापक सुरेश कुमार भंडारी और सहकर्मियों सहित छात्र-छात्राओं से भी बातचीत की। कुलपति ने कहा कि महाविद्यालय के पास भूमि, भवन और प्रयोगशाला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। यदि प्रदेश सरकार इसका अधिग्रहण करके इसे सरकारी घोषित करती है तो विश्वविद्यालय भी इसमें अपना सहयोग प्रदान करेगा। इस मौके पर उन्होंने आयुर्वेद विभाग शिमला के आला अधिकारियों से भी दूरभाष पर बात भी की। इस मौके पर जोगिंद्रनगर भाजपा मंडल अध्यक्ष पंकज जम्वाल भी उनके साथ थे।
कॉलेज एक दशक से अर्ध सरकारी बच्चों की फीस पर चल रहा है। विद्यार्थियों की मांग है कि सरकार इसका सरकारीकरण करें। एक वर्ष पहले जोगिंद्रनगर प्रवास के दौरान 9 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने जयराम ठाकुर ने इसके सरकारीकरण की घोषणा की थी लेकिन प्रदेश फाइनांस विभाग ने इसमें अपनी असमर्थता दिखाई थी।
डेढ़ करोड़ का हॉस्टल फिर भी किराए के कमरे मजबूरी
गर्ल्स हास्टल बने यहां दो साल से अधिक हो गए हैं। लेकिन, अभी तक यह छात्रावास बच्चों को नहीं दिया गया है। करीब डेढ़ करोड़ की लागत से बना छात्रावास धूल फांक रहा है। छात्रावास न मिलने के चलते छात्राओं को जोगिंद्रनगर शहर में कमरे किराए पर कमरे लेकर रहना पड़ रहा है। इसके चलते उन्हें भारी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
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कॉलेज एक दशक से अर्ध सरकारी बच्चों की फीस पर चल रहा है। विद्यार्थियों की मांग है कि सरकार इसका सरकारीकरण करें। एक वर्ष पहले जोगिंद्रनगर प्रवास के दौरान 9 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने जयराम ठाकुर ने इसके सरकारीकरण की घोषणा की थी लेकिन प्रदेश फाइनांस विभाग ने इसमें अपनी असमर्थता दिखाई थी।
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डेढ़ करोड़ का हॉस्टल फिर भी किराए के कमरे मजबूरी
गर्ल्स हास्टल बने यहां दो साल से अधिक हो गए हैं। लेकिन, अभी तक यह छात्रावास बच्चों को नहीं दिया गया है। करीब डेढ़ करोड़ की लागत से बना छात्रावास धूल फांक रहा है। छात्रावास न मिलने के चलते छात्राओं को जोगिंद्रनगर शहर में कमरे किराए पर कमरे लेकर रहना पड़ रहा है। इसके चलते उन्हें भारी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
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