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Mandi News: शौक ने बुना जाल, अब बना रही चटनी अचार
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मंडी के सेरी मंच पर सजा हाट बाजार में अचार चटनी का स्टॉल सजा कर बिक्री करती महिला हेम नलनी। संव
मंडी। शहर की हेम नलनी ने पहले शौक के तौर पर अचार चटनी बनाना शुरू किया। बाद में यह शौक स्वरोजगार में बदल गया। अब हेम नलनी करियाले, एलो, बुरांस, लसुड़े, लिंगड़, आंवला, हरड़, बांस आदि के अचार बना रही हैं। इससे न केवल अपनी आर्थिकी सुदृढ़ की बल्कि और महिलाओं को रोजगार दिया। जयश्री स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाओं को कच्चा माल लाने के लिए प्रेरित किया। जिला प्रशासन के सहयोग से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को शुक्रवार और शनिवार सेरी मंच पर स्टॉल सजाने की अनुमति दी है ताकि महिलाएं स्वयं तैयार किए स्थानीय और घरेलू उत्पादों को बेच सकें।
हेम नलनी ने बताया कि पहले इस कार्य को शौक के तौर पर करती थीं। 1999 के बाद से उन्होंने इसे स्वरोजगार के रूप में चुना। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से कच्चा सामान खरीद कर हर तरह का अचार तैयार किया है। सबसे ज्यादा मांग लिंगड़, एलो और हरड़ अचार की रहती है। एलो के सेवन से शरीर और हृदय स्वस्थ रहता है। अचार चटनी के साथ वह ग्रामीण कोहलू से निकला कची घानी का कड़वा तेल साढ़े तीन सौ और बुरांस का जूस 150 रुपये प्रति लीटर दाम से बेचती हैं।
उनका कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सभी महिलाएं इस कार्य से अच्छी कमाई कर लेती हैं। विभिन्न तरह का अचार 150 से 500 रुपये तक बेचती हैं। इस काम में उनके परिवार का भी सहयोग रहता है। पति ऑटो चलाते हैं। दो बेटियों को पढ़ाया लिखाया है। उन्होंने जिला प्रशासन और सरकार से मांग रखी है कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए शहर में नियमित बाजार मुहैया करवाया जाए। संवाद
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हेम नलनी ने बताया कि पहले इस कार्य को शौक के तौर पर करती थीं। 1999 के बाद से उन्होंने इसे स्वरोजगार के रूप में चुना। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से कच्चा सामान खरीद कर हर तरह का अचार तैयार किया है। सबसे ज्यादा मांग लिंगड़, एलो और हरड़ अचार की रहती है। एलो के सेवन से शरीर और हृदय स्वस्थ रहता है। अचार चटनी के साथ वह ग्रामीण कोहलू से निकला कची घानी का कड़वा तेल साढ़े तीन सौ और बुरांस का जूस 150 रुपये प्रति लीटर दाम से बेचती हैं।
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उनका कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सभी महिलाएं इस कार्य से अच्छी कमाई कर लेती हैं। विभिन्न तरह का अचार 150 से 500 रुपये तक बेचती हैं। इस काम में उनके परिवार का भी सहयोग रहता है। पति ऑटो चलाते हैं। दो बेटियों को पढ़ाया लिखाया है। उन्होंने जिला प्रशासन और सरकार से मांग रखी है कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए शहर में नियमित बाजार मुहैया करवाया जाए। संवाद
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