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Mandi News: लद्दाख आंदोलन पर हिमाचल के संगठन एकजुट
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सोनम वांगचुक की रिहाई और पर्यावरण संरक्षण की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न संगठनों ने लद्दाख में चल रहे अहिंसक आंदोलन पर हुए पुलिस-प्रशासनिक दमन और गोलीबारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार संवाद के बजाय लाठीचार्ज और गोलीबारी कर रही है।
हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह, सीटू जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, फोरलेन संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष जोगिंद्र वालिया, सर्वजन संरक्षण समिति के राज्य सलाहकार अमर सिंह राघवा, मनरेगा एवं सर्व कामगार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संत राम, आस फाउंडेशन के चेयरमैन लीलाधर चौहान, देव भूमि पर्यावरण रक्षा मंच के अध्यक्ष नरेंद्र सैन आदि ने कहा कि लद्दाख की जनता पिछले पांच वर्षों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रख रही है।
उनकी प्रमुख मांगें हैं कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठवीं अनुसूची में शामिल करना, लोकसभा में दो सीटें और नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता है। उन्होंने आरोप लगाया गया कि सरकार लद्दाख के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को प्राथमिकता दे रही है और बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा, जल विद्युत, खनन और अन्य परियोजनाएं लागू की जा रही हैं, जिससे स्थानीय पर्यावरण और हिमालयी पारिस्थितिकी को खतरा है। संगठनों ने मांग की है कि पर्यावरणविद सोनम वांगचुक और अन्य गिरफ्तार आंदोलनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए। उन पर लगाए गए एनएसए जैसे कड़े प्रावधान हटाए जाएं। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न संगठनों ने लद्दाख में चल रहे अहिंसक आंदोलन पर हुए पुलिस-प्रशासनिक दमन और गोलीबारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार संवाद के बजाय लाठीचार्ज और गोलीबारी कर रही है।
हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह, सीटू जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, फोरलेन संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष जोगिंद्र वालिया, सर्वजन संरक्षण समिति के राज्य सलाहकार अमर सिंह राघवा, मनरेगा एवं सर्व कामगार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संत राम, आस फाउंडेशन के चेयरमैन लीलाधर चौहान, देव भूमि पर्यावरण रक्षा मंच के अध्यक्ष नरेंद्र सैन आदि ने कहा कि लद्दाख की जनता पिछले पांच वर्षों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रख रही है।
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उनकी प्रमुख मांगें हैं कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठवीं अनुसूची में शामिल करना, लोकसभा में दो सीटें और नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता है। उन्होंने आरोप लगाया गया कि सरकार लद्दाख के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को प्राथमिकता दे रही है और बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा, जल विद्युत, खनन और अन्य परियोजनाएं लागू की जा रही हैं, जिससे स्थानीय पर्यावरण और हिमालयी पारिस्थितिकी को खतरा है। संगठनों ने मांग की है कि पर्यावरणविद सोनम वांगचुक और अन्य गिरफ्तार आंदोलनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए। उन पर लगाए गए एनएसए जैसे कड़े प्रावधान हटाए जाएं। संवाद
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