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करसोग अस्पताल में कई वर्षो से रिक्त चल रहा गायनी विशेषज्ञ का पद
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करसोग (मंडी)। नागरिक अस्पताल करसोग में कई सालों से गायनी विशेषज्ञ का पद खाली चल रहा है, जिससे क्षेत्र की महिलाओं को भारी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। पद खाली होने से महिलाओं को जांच के लिए शिमला या फिर मंडी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है। प्रभावित महिलाओं ने शनिवार को एसडीएम के माध्यम से सीएम जयराम ठाकुर को पत्र भेजकर अस्पताल में गायनी चिकित्सक की नियुक्ति की मांग की है। वहीं, महिलाओं का कहना है कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन चिकित्सक न होने से मशीन धूल फांक रही है।
महिलाओं ने ज्ञापन में लिखा है कि हम आपके पड़ोसी हैं। करसोग क्षेत्र आपके सराज विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं के साथ जुड़ा है। ऐसे में शंकरदेहरा, छतरी, बरयोगी, काकड़ाधार, गतु, मानगढ़ व भरेड़ पंचायत से भी लोग उपमंडल के सिविल अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसलिए पड़ोसी होने के नाते यहां तुरंत प्रभाव से विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जाए।
मंडी या शिमला के अलावा कोई चारा नहीं
करसोग के 150 बिस्तर वाले अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से सबसे अधिक परेशानियां महिलाओं को झेलनी पड़ रही हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से महिलाओं को स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए शिमला या फिर मंडी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे उनका पैसा और कीमती समय दोनों बरबाद हो रहे हैं। प्रसव से लिए करसोग लाई जाने वाली महिलाओं को भी विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात न होने के कारण शिमला के लिए रेफर किया जाता है, जिससे प्रसव की पीड़ा झेल रही महिलाओं और साथ आए तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ, अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ, सर्जरी, मेडिसन और बाल रोग विशेषज्ञ की जल्द तैनाती करने की मांग की है।
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अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्रों का सहारा
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन तो है, लेकिन इसके लिए सरकार ने कोई डॉक्टर नहीं भेजा है। ऐसे में यहां इलाज के लिए आने वाली महिलाओं को बाहर निजी क्लीनिकों में 1000 से 1500 रुपये खर्च करके अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है या फिर मजबूरन शिमला और मंडी जाना पड़ता है। यहां इलाज के लिए आने वाली हर दूसरी महिला को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए लिखा जाता है।
चिकित्सकों के 16 पद सृजित, नौ खाली
करसोग अस्पताल के लिए चिकित्सकों के कुल 16 पद सृजित किए गए हैं, लेकिन इसमें अभी तक डॉक्टरों के 9 पद खाली चल रहे हैं, जबकि वर्तमान में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पताल में तैनात नहीं है। प्रतिनिधि मंडल में शामिल प्रधान महिला मंडल बाग ग्राम पंचायत सानना सुभद्रा कुमारी, निर्मला, कुबजा, भीमा, पूनम, वंदना, कांता, मनसादेवी और रमादेवी आदि महिलाओं ने सीएम को ज्ञापन भेजा है।
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महिलाओं ने ज्ञापन में लिखा है कि हम आपके पड़ोसी हैं। करसोग क्षेत्र आपके सराज विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं के साथ जुड़ा है। ऐसे में शंकरदेहरा, छतरी, बरयोगी, काकड़ाधार, गतु, मानगढ़ व भरेड़ पंचायत से भी लोग उपमंडल के सिविल अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसलिए पड़ोसी होने के नाते यहां तुरंत प्रभाव से विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जाए।
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मंडी या शिमला के अलावा कोई चारा नहीं
करसोग के 150 बिस्तर वाले अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से सबसे अधिक परेशानियां महिलाओं को झेलनी पड़ रही हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से महिलाओं को स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए शिमला या फिर मंडी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे उनका पैसा और कीमती समय दोनों बरबाद हो रहे हैं। प्रसव से लिए करसोग लाई जाने वाली महिलाओं को भी विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात न होने के कारण शिमला के लिए रेफर किया जाता है, जिससे प्रसव की पीड़ा झेल रही महिलाओं और साथ आए तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ, अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ, सर्जरी, मेडिसन और बाल रोग विशेषज्ञ की जल्द तैनाती करने की मांग की है।
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अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्रों का सहारा
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन तो है, लेकिन इसके लिए सरकार ने कोई डॉक्टर नहीं भेजा है। ऐसे में यहां इलाज के लिए आने वाली महिलाओं को बाहर निजी क्लीनिकों में 1000 से 1500 रुपये खर्च करके अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है या फिर मजबूरन शिमला और मंडी जाना पड़ता है। यहां इलाज के लिए आने वाली हर दूसरी महिला को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए लिखा जाता है।
चिकित्सकों के 16 पद सृजित, नौ खाली
करसोग अस्पताल के लिए चिकित्सकों के कुल 16 पद सृजित किए गए हैं, लेकिन इसमें अभी तक डॉक्टरों के 9 पद खाली चल रहे हैं, जबकि वर्तमान में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पताल में तैनात नहीं है। प्रतिनिधि मंडल में शामिल प्रधान महिला मंडल बाग ग्राम पंचायत सानना सुभद्रा कुमारी, निर्मला, कुबजा, भीमा, पूनम, वंदना, कांता, मनसादेवी और रमादेवी आदि महिलाओं ने सीएम को ज्ञापन भेजा है।