डेपुटेशन पर थीं सीएचसी रिवालसर की चार स्टाफ नर्सें, एक वार्ड सिस्टर
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मंडी। स्वास्थ्य विभाग में चल रहे डेपुटेशन की पोल खुलने लगी है। रिवालसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की चार स्टाफ नर्सें और एक वार्ड सिस्टर डेपुटेशन पर दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं दे रही थीं। जिस कारण हवाणी गलू के पास कार हादसे के घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाया। हादसे में एक महिला की मौत हो गई थी। इसके बाद गुस्साए लोगों ने सीएचसी में खूब हंगामा किया और महिला का शव अस्पताल परिसर में जलाने की कोशिश की। इसपर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और एक डॉक्टर को निलंबित कर दिया। ग्रामीणों की ओर से प्रदर्शन करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने चार स्टाफ नर्सों, एक वार्ड सिस्टर और एक लैब टेक्नीशियन को सीएचसी रिवालसर में तैनात कर दिया है। रिवालसर क्षेत्र के हवाणी गलू के पास कार हादसे में घायल महिला की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने सीएचसी के बाहर प्रदर्शन कर तोड़ फोड़ कर दी थी।
रिवालसर सीएचसी में तैनात चार स्टाफ नर्सें और एक वार्ड सिस्टर डेपुटेशन पर मंडी जोनल अस्पताल कटौला, रत्ती और कोटली अस्पताल में सेवाएं दे रही थीं। रिवालसर में महिला की मौत पर हुए बवाल के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें फिर रिवालसर सीएचसी भेज दिया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने एक लैब टेक्नीशियन को भी मंडी अस्पताल से रिवालसर भेजा है। स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से एक बात साफ दिखाई देती है कि विभाग हादसों के इंतजार में रहता है और उसके बाद गहरी नींद से जागता है। गत माह एनसीसी कैंप के दौरान छात्रा की मौत हुई थी। बावजूद इससे स्वास्थ्य विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया था। वर्तमान में जिला के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी ऐसी ही स्थिति चल रही है। कर्मचारियों की पगार किसी और संस्थान ने निकल रही है और वे सेवाएं किसी और जगह दे रहे हैं। डेपुटेशन में अधिकतर कर्मचारी ऐसे हैं जो राजनीतिक पहुंच के चलते अपने मनपसंद स्थानों पर सेवाएं दे रहे हैं। जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. देशराज शर्मा ने कहा कि रिवालसर पीएचसी अभी पूरी तरह से सीएचसी के रूप में नहीं चल रही थी। जिस कारण कुछ कर्मचारियों को अन्य संस्थानों में तैनात किया था। जिन्हें अब फिर रिवालसर सीएचसी भेजा गया है।