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Mandi News: बंटवारे की पीड़ा, पूर्वाग्रह और इंसानियत का संदेश लेकर पर्दे पर उतरीं फिल्में

Sun, 05 Jul 2026 01:25 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2026 01:25 AM IST
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Films that hit the screen carrying the pain of Partition, themes of prejudice, and a message of humanity.
देवभूमि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन पिंडी दे गुरुचरण, ब्रिज टू यूटोपिया और मसान ने दर्शकों को किया भावुक
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। संस्कृति सदन कांगणीधार में आयोजित देवभूमि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन शनिवार को सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और विभाजन की त्रासदी पर आधारित फिल्मों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। मशहूर लेखक एवं निर्माता असगर वजाहत की कहानी सरदारजी पर आधारित फिल्म पिंडी दे गुरुचरण ने भारत–पाकिस्तान विभाजन के दौर में इंसानों के भीतर पनपते पूर्वाग्रह, भय और मानवता के संघर्ष को प्रभावी ढंग से पर्दे पर प्रस्तुत किया।
फिल्म के निर्देशक संजय शांति गुप्ता ने बताया कि कहानी को लेकर शुरुआती दौर में कुछ भ्रम की स्थिति बनी थी, जिसे स्पष्ट करते हुए फिल्म को उसके मूल भाव के साथ प्रस्तुत किया गया। कहानी एक मुस्लिम रेलवे कर्मचारी और पाकिस्तान से दिल्ली आए एक सिख परिवार के बीच उपजे अविश्वास से शुरू होती है, जो आगे चलकर इंसानियत, भरोसे और रिश्तों की मिसाल में बदल जाती है। फिल्म यह संदेश देती है कि नफरत और पूर्वाग्रह से ऊपर उठकर मानवीय संवेदनाएं ही समाज को जोड़ती हैं। फिल्म के सह-निर्माता सुरेंद्र जैन ने बताया कि असगर वजाहत के साथ चर्चा के दौरान ख्वाजा अहमद अब्बास की कहानी सरदारजी पर फिल्म बनाने का विचार आया, जिसे बाद में पिंडी दे गुरुचरण के रूप में साकार किया गया।
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फेस्टिवल में रिंकू जायसवाल निर्देशित बंगाली फिल्म ब्रिज टू यूटोपिया का भी प्रदर्शन हुआ, जिसमें मानसिक रूप से अस्थिर एक गर्भवती महिला की परिस्थितियों और समाज के दृष्टिकोण को संवेदनशील ढंग से दर्शाया गया। वहीं विक्रांत सिद्धु के निर्देशन और विनय कुमार जिंदल के निर्माण में बनी फिल्म मसान ने आतंक और सामाजिक कट्टरता जैसे गंभीर विषय को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। फिल्म में रूबी कंदौला, निशान भूल्लर, वकार शेख, आरपी सिंह और विक्टर जॉन सहित कई कलाकारों ने सशक्त अभिनय किया। तीनों फिल्मों को दर्शकों ने खूब सराहा और उनकी प्रस्तुति पर खुलकर चर्चा भी की।
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