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Mandi News: अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन से संवरेगा देश का भविष्य

Mon, 14 Sep 2026 12:04 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 12:04 AM IST
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Early Childhood Care and Education will shape the future of the country
0 से 8 वर्ष तक के बच्चों के मानसिक विकास पर रहेगा फोकस
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85 प्रतिशत दिमागी विकास होता है इसी उम्र में
जिले की 4362 गर्भवती महिलाओं और 33 हजार से अधिक बच्चों को मिल रहा सीधा लाभ
पुष्पराज
मंडी। बच्चों के सुनहरे और उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करने की दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई) पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत मंडी जिले के बच्चों के समग्र विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार मानव मस्तिष्क का करीब 85 प्रतिशत विकास छह वर्ष की आयु से पहले हो जाता है। इसी वैज्ञानिक तथ्य को आधार बनाकर शून्य से आठ वर्ष तक के बच्चों की समग्र देखभाल, स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को एक सुदृढ़ ढांचे में पिरोने की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपी गई है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक देश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव कर 5+3+3+4 का नया ढांचा लागू किया जाएगा। इसमें तीन से छह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी अथवा बालवाटिका तथा छह से आठ वर्ष की आयु के बच्चों के लिए पहली और दूसरी कक्षा शामिल हैं। भविष्य में आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिक स्कूलों से जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चों को खेल-खेल में सीखने का बेहतर अवसर मिल सके।
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इसी क्रम में ‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ अभियान के तहत शून्य से तीन वर्ष की आयु के बच्चों के लिए ‘नवचेतना’ तथा तीन से छह वर्ष के बच्चों के लिए 48 सप्ताह का खेल-आधारित ‘आधारशिला’ पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। रटने की परंपरा को खत्म कर खिलौना-आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल माध्यमों के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी दक्ष बनाया जा रहा है। इस पहल से ईसीसीई में डिप्लोमा प्राप्त युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
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जिले में हजारों बच्चों और महिलाओं को मिल रहा पोषण
जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग 4,362 गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को टेक-होम राशन उपलब्ध करवा रहा है। इसके अलावा तीन से छह वर्ष की आयु के 26,278 बच्चों को घर ले जाने के लिए राशन दिया जा रहा है। वहीं, 7,253 बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्म एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके माध्यम से बच्चों के पोषण के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई) योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में भी विभाग लगातार कार्य कर रहा है। -अजय बदरेल, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग
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