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Mandi News: ड्रोन और रिमोट सेंसिंग से चमकेगी किसानों की तकदीर
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सुंदरनगर में भविष्य की खेती का ब्लू प्रिंट तैयार
सुंदरनगर में आधुनिक ड्रोन की उड़ान से कृषि अधिकारियों ने सीखे गुर
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। ड्रोन और रिमोट सेंसिंग तकनीक से अब किसानों की तकदीर बदलने की राह आसान होगी। सुंदरनगर स्थित कृषक प्रशिक्षण केंद्र इन दिनों कृषि क्षेत्र में हो रहे बड़े तकनीकी बदलाव का केंद्र बना हुआ है। कृषि विभाग की ओर से कृषि में रिमोट सेंसिंग एवं ड्रोन तकनीक का उपयोग विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम महज एक कार्यशाला नहीं, बल्कि पहाड़ी राज्य में आधुनिक कृषि की नई संभावनाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।
प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. नरेश कुमार के मार्गदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 19 कृषि अधिकारियों ने इस हाईटेक प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। इससे हिमाचल की कृषि व्यवस्था में पारंपरिक तौर-तरीकों के साथ सैटेलाइट और ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। प्राचार्य डॉ. ओम प्रकाश बंसल और उप-प्राचार्य डॉ. जगदीश जंजीहा की अगुवानी में शुरू हुए प्रशिक्षण सत्र में प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने रिमोट सेंसिंग एवं ड्रोन तकनीक के इतिहास और मूलभूत सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, संसाधन व्यक्ति डॉ. भुवनेश्वर ने गूगल अर्थ और रिमोट सेंसिंग के माध्यम से खेतों की स्थिति तथा मिट्टी की सेहत का आकलन करने की तकनीकों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण और व्यावहारिक पक्ष तब सामने आया, जब इफ्को के सहयोग से अधिकारियों को बिलासपुर स्थित बीज गुणक फार्म, औहर का भ्रमण करवाया गया। यहां अधिकारियों को आधुनिक कृषि ड्रोन के लाइव संचालन का प्रदर्शन दिखाया गया। साथ ही उन्होंने स्वयं ड्रोन उड़ाकर इसके व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण भी लिया।
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इसके अलावा अभिलाषी विश्वविद्यालय के निदेशक कुनाल सूद ने जीपीएस और सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण के माध्यम से फसल नुकसान के आकलन और पैदावार का अनुमान लगाने की तकनीकों की जानकारी दी।
समापन सत्र में प्राचार्य डॉ. ओम प्रकाश बंसल ने प्रतिभागियों के साथ प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभवों और संभावनाओं पर मंथन किया।
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सुंदरनगर में आधुनिक ड्रोन की उड़ान से कृषि अधिकारियों ने सीखे गुर
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। ड्रोन और रिमोट सेंसिंग तकनीक से अब किसानों की तकदीर बदलने की राह आसान होगी। सुंदरनगर स्थित कृषक प्रशिक्षण केंद्र इन दिनों कृषि क्षेत्र में हो रहे बड़े तकनीकी बदलाव का केंद्र बना हुआ है। कृषि विभाग की ओर से कृषि में रिमोट सेंसिंग एवं ड्रोन तकनीक का उपयोग विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम महज एक कार्यशाला नहीं, बल्कि पहाड़ी राज्य में आधुनिक कृषि की नई संभावनाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।
प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. नरेश कुमार के मार्गदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 19 कृषि अधिकारियों ने इस हाईटेक प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। इससे हिमाचल की कृषि व्यवस्था में पारंपरिक तौर-तरीकों के साथ सैटेलाइट और ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। प्राचार्य डॉ. ओम प्रकाश बंसल और उप-प्राचार्य डॉ. जगदीश जंजीहा की अगुवानी में शुरू हुए प्रशिक्षण सत्र में प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने रिमोट सेंसिंग एवं ड्रोन तकनीक के इतिहास और मूलभूत सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, संसाधन व्यक्ति डॉ. भुवनेश्वर ने गूगल अर्थ और रिमोट सेंसिंग के माध्यम से खेतों की स्थिति तथा मिट्टी की सेहत का आकलन करने की तकनीकों की जानकारी दी।
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प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण और व्यावहारिक पक्ष तब सामने आया, जब इफ्को के सहयोग से अधिकारियों को बिलासपुर स्थित बीज गुणक फार्म, औहर का भ्रमण करवाया गया। यहां अधिकारियों को आधुनिक कृषि ड्रोन के लाइव संचालन का प्रदर्शन दिखाया गया। साथ ही उन्होंने स्वयं ड्रोन उड़ाकर इसके व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण भी लिया।
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इसके अलावा अभिलाषी विश्वविद्यालय के निदेशक कुनाल सूद ने जीपीएस और सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण के माध्यम से फसल नुकसान के आकलन और पैदावार का अनुमान लगाने की तकनीकों की जानकारी दी।
समापन सत्र में प्राचार्य डॉ. ओम प्रकाश बंसल ने प्रतिभागियों के साथ प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभवों और संभावनाओं पर मंथन किया।