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पाप से मुक्ति के लिए छिद्रा करवाने को उमड़ी लोगों की भीड़
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सुराहण में आयोजित काहिका उत्सव में देव खेल खेलते देवता के गूर।
- फोटो : Mandi
द्रंग (मंडी)। पधर उपमंडल के सुराहण में काहिका उत्सव में वीरवार को पाप से मुक्ति को लेकर छिद्रा करवाने के लिए लोगों की खासी तादाद उमड़ी। हराबाग के नड़ परिवार ने सबसे पहले आराध्य देव हुरंग नारायण का छिद्रा किया। उसके बाद लोगों का छिद्रा किया गया।
इस दौरान नड़ परिवार के लोगों ने छिद्रा करते हुए अश्लील भाषा का भी बीच-बीच में प्रयोग किया। देव हुरंग नारायण के गूर सहित सोलह अन्य गूरों और देवता के महलों ने देव खेल से काहिका उत्सव में सुराहण गांव में सुरक्षा दीवार बांधी। जौ के आटे की भुरकी को आसमान में फेंक कर दैवीय क्रियाकलापों को अंजाम दिया गया। आपसी विवाद और लागजोग से मुक्ति को लेकर भी लोगों ने देव हुरंग नारायण के समक्ष हाजिरी भरी।
काहिका उत्सव के दौरान दिनभर आसमान में घने बादल छाए रहे। जनमत है कि जितना मौसम घनघोर बने, उतनी कम लागजोग काहिका में होती है जो जानमाल की हिफाजत को लेकर सुखद माना जाता है। शुक्रवार को काहिका उत्सव के अंतिम दिन छिद्रा रस्म के बाद शाम के वक्त नड़रगड़ा रस्म निभाई जाएगी।
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देवता के गूर की ओर से देव रथ मोहरे से पानी के छींटे फेंकते ही नड़ अचेत अवस्था में चला जाएगा। मूर्च्छित देह को पूरे गांव की परिक्रमा के बाद देवता के आशीर्वाद से ही होश में लाया जाएगा। कोरोना के चलते काहिका उत्सव में हालांकि बेवजह भीड़ पर रोक लगा रखी है बावजूद इसके भारी तादाद में लोगों ने यहां छिद्रा करवाने के लिए हाजिरी भरी। श्रद्धालुओं ने देवता के साथ वाद्य यंत्रों की सुरीली ध्वनि के मधुर संगीत में पहाड़ी नाटी नाचने का भी जमकर लुत्फ उठाया।
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इस दौरान नड़ परिवार के लोगों ने छिद्रा करते हुए अश्लील भाषा का भी बीच-बीच में प्रयोग किया। देव हुरंग नारायण के गूर सहित सोलह अन्य गूरों और देवता के महलों ने देव खेल से काहिका उत्सव में सुराहण गांव में सुरक्षा दीवार बांधी। जौ के आटे की भुरकी को आसमान में फेंक कर दैवीय क्रियाकलापों को अंजाम दिया गया। आपसी विवाद और लागजोग से मुक्ति को लेकर भी लोगों ने देव हुरंग नारायण के समक्ष हाजिरी भरी।
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काहिका उत्सव के दौरान दिनभर आसमान में घने बादल छाए रहे। जनमत है कि जितना मौसम घनघोर बने, उतनी कम लागजोग काहिका में होती है जो जानमाल की हिफाजत को लेकर सुखद माना जाता है। शुक्रवार को काहिका उत्सव के अंतिम दिन छिद्रा रस्म के बाद शाम के वक्त नड़रगड़ा रस्म निभाई जाएगी।
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देवता के गूर की ओर से देव रथ मोहरे से पानी के छींटे फेंकते ही नड़ अचेत अवस्था में चला जाएगा। मूर्च्छित देह को पूरे गांव की परिक्रमा के बाद देवता के आशीर्वाद से ही होश में लाया जाएगा। कोरोना के चलते काहिका उत्सव में हालांकि बेवजह भीड़ पर रोक लगा रखी है बावजूद इसके भारी तादाद में लोगों ने यहां छिद्रा करवाने के लिए हाजिरी भरी। श्रद्धालुओं ने देवता के साथ वाद्य यंत्रों की सुरीली ध्वनि के मधुर संगीत में पहाड़ी नाटी नाचने का भी जमकर लुत्फ उठाया।