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Mandi News: सिर पर खतरा बन मंडा रहे दरकते पहाड़

Tue, 04 Aug 2026 04:10 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 04:10 AM IST
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Crumbling mountains loom overhead, posing a threat.
जोगिंद्रनगर के हारगुनैण पंचायत के डिगली व नागचला में दरकते पहाड़। स्त्रोत जागरूक पाठक
हारगुनैण, कस और गलू पंचायतों में लगातार हो रहा भूस्खलन
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चार साल से बढ़ रहीं दरारें, नहीं करवाया जा रहा भू-वैज्ञानिक सर्वे
ग्रामीण बोले-कहीं कोटरोपी जैसी त्रासदी न दोहराएं हालात
ग्राउंड रिपोर्ट...
राजेश शर्मा
जोगिंद्रनगर (मंडी)। उपमंडल की हारगुनैण, कस और गलू पंचायतों में लगातार दरक रहे पहाड़ ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। कई जगह पहाड़ियों में चौड़ी दरारें उभर आई हैं लेकिन अब तक इन संवेदनशील क्षेत्रों का भू-वैज्ञानिकों से सर्वेक्षण नहीं करवाया गया है। सौ से अधिक परिवार बारिश के दौरान अनहोनी की आशंका में जीवन यापन कर रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से तत्काल वैज्ञानिक सर्वे, सुरक्षा उपाय और निगरानी तंत्र स्थापित करने की मांग उठाई है।
ग्रामीणों हारगुनैण पंचायत से कला देवी, राजकुमारी, बिमला, कस पंचायत से देवेंद्र कुमार, अंकित, विनोद कुमार, गलू पंचायत से शंकुतला, मीना सहित अन्य ने बताया कि दरकते पहाड़ खतरा बन हुए हैं। यहां जल्द सर्वे करवाकर उचित प्रबंध किए जाने चाहिए।
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कस पंचायत के खरोण गांव की पांडो पहाड़ी, हारगुनैण पंचायत के डिगली और नागचला गांव तथा गलू पंचायत के समीप चार साल से लगातार भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं। बीते वर्ष खरोण गांव में हुए भूस्खलन के दौरान मलबा और कीचड़ दस घरों में घुस गया था। इससे करीब 35 लोगों को मानसून के बीच टेंट लगाकर खुले आसमान के नीचे रातें गुजारनी पड़ी थीं। वहीं, डिगली गांव में हालिया भूस्खलन से सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है और नकेहड़ सड़क बह जाने से छोटे वाहनों की आवाजाही भी ठप है। हालात ये हैं कि संवेदनशील स्थानों पर अभी तक चेतावनी बोर्ड और पूर्व चेतावनी प्रणाली की व्यवस्था नहीं की गई है।
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जोगिंद्रनगर के एसडीएम मनीश चौधरी ने कहा कि संभावित भूस्खलन वाले क्षेत्रों का भू-वैज्ञानिकों से सर्वेक्षण करवाने का मामला जिला प्रशासन के समक्ष उठाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जहां पहाड़ी दरकने से खतरा है, वहां प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
बादल फटने की घटनाओं के बाद पहाड़ों की चट्टानें लगातार दरक रही हैं और मलबा नीचे आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। खरोण गांव में पिछले वर्ष हुए भूस्खलन के बाद प्रशासन ने मौके का निरीक्षण तो किया लेकिन भू-वैज्ञानिकों से विस्तृत सर्वेक्षण करवाने की दिशा में कोई प्रभावी पहल नहीं हुई। -देवेंद्र कुमार चौहान, पूर्व प्रधान कस पंचायत

नागचला और डिगली गांवों के संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन से पहले चेतावनी देने वाले सेंसर लगाने की मांग की है। पिछले वर्ष वींचकैंप के पास बादल फटने से पंचायत को लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। इसके बावजूद ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए अभी तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए। -मुकेश, पंचायत प्रधान हारगुनैण

जोगिंद्रनगर के हारगुनैण पंचायत के डिगली व नागचला में दरकते पहाड़। स्त्रोत जागरूक पाठक

जोगिंद्रनगर के हारगुनैण पंचायत के डिगली व नागचला में दरकते पहाड़। स्त्रोत जागरूक पाठक

जोगिंद्रनगर के हारगुनैण पंचायत के डिगली व नागचला में दरकते पहाड़। स्त्रोत जागरूक पाठक

जोगिंद्रनगर के हारगुनैण पंचायत के डिगली व नागचला में दरकते पहाड़। स्त्रोत जागरूक पाठक

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