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कोटरोपी हादसा: कहीं बुजुर्ग तो कहीं केवल मां बाप ही बचे
Updated Thu, 17 Aug 2017 10:55 PM IST
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। पधर उपमंडल के कोटरोपी में हुए दर्दनाक हादसे में उत्तर प्रदेश के मऊ, आजमगढ़ और बलिया के मारे गए लगभग 16 लोगों में से कई की तो अगली पीढ़ियां ही खत्म हो गईं। ये सभी परिवार में किसी न किसी रिश्ते की डोर से आपस में बंधे हुए थे। कुछ परिवारों में अब महज बुुजुर्ग और मां बाप ही बचे हैं। इन सोलह लोगों में से अभी भी 3 महिलाओं के शव नहीं मिले हैं। जो रिश्ते में जेठानी, देवरानी और बहन लगती हैं। मारे गए अन्य तेरह लोग भी रिश्ते में पिता, बेटा, बहन, मामा, भांजे और कई अन्य रिश्ते भी इनके आपस में जुड़ते थे।
उत्तर प्रदेश से आए मृतक सूर्यदेव सिंह के जीजा चंचल सिंह, प्रशांत, पयूश सिंह, सुनील सिंह, धर्मेंद्र सिंह ने दु:खी मन से कहा कि इस हादसे से उनके परिवार का बहुत ही बड़ा नुकसान हुआ है और सारी जिंदगी इसकी भरपाई नहीं हो पाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस हादसे के बाद तो आगे का सारा वंश भी खत्म हो गया है। परिवार में अब केवल बुजुर्ग लोग तथा किसी के माता-पिता ही बचे हैं। यह सभी रक्षाबंधन से पहले घर से घूमने निकल गए थे और इन्होंने स्वर्ण मंदिर के दर्शन किए तथा उसके उपरांत सभी लोग माता वैष्णोदेवी कटड़ा दर्शन कर वापस पठानकोट पहुंचे। वहां देखने लायक कुछ था नहीं और वहां से वे इस बस में कुल्लू मनाली के रवाना हुए थे कि यह हादसा हो गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद इन्होंने शिमला होते हुए घर लौटना था।
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उत्तर प्रदेश से आए मृतक सूर्यदेव सिंह के जीजा चंचल सिंह, प्रशांत, पयूश सिंह, सुनील सिंह, धर्मेंद्र सिंह ने दु:खी मन से कहा कि इस हादसे से उनके परिवार का बहुत ही बड़ा नुकसान हुआ है और सारी जिंदगी इसकी भरपाई नहीं हो पाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस हादसे के बाद तो आगे का सारा वंश भी खत्म हो गया है। परिवार में अब केवल बुजुर्ग लोग तथा किसी के माता-पिता ही बचे हैं। यह सभी रक्षाबंधन से पहले घर से घूमने निकल गए थे और इन्होंने स्वर्ण मंदिर के दर्शन किए तथा उसके उपरांत सभी लोग माता वैष्णोदेवी कटड़ा दर्शन कर वापस पठानकोट पहुंचे। वहां देखने लायक कुछ था नहीं और वहां से वे इस बस में कुल्लू मनाली के रवाना हुए थे कि यह हादसा हो गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद इन्होंने शिमला होते हुए घर लौटना था।
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