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चैक बाऊंस होने पर एक साल का कारावास
Updated Mon, 01 Jan 2018 10:49 PM IST
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मंडी। चेक बाउंस का अभियोग साबित होने पर अदालत ने आरोपी को एक साल के साधारण कारावास और 5,50,000 रुपये के हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर तीन अशोक कुमार के न्यायालय ने औट तहसील के टकोली (नगवाईं) गांव निवासी ज्ञान चंद पुत्र भाग चंद की शिकायत पर चलाए गए अभियोग के साबित होने पर जिला कुल्लू के कलेहली (बजौरा) निवासी अजय पठानिया पुत्र नंद लाल सिंह पठानिया को कारावास और हर्जाने की सजा सुनाई है।
अधिवक्ता लोकेंद्र कुटलैहडिया के माध्यम से अदालत में दायर शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता की देनदारी चुकाने के लिए आरोपी अजय पठानिया ने उन्हें 31 मार्च 2012 को 5,50,000 रुपये का एक चेक जारी किया था। शिकायतकर्ता ज्ञान चंद ने जब यह चेक भुगतान के लिए अपने बैंक में लगाया तो आरोपी के खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण यह बाउंस हो गया था। इसके चलते शिकायतकर्ता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आरोपी को 15 दिनों का कानूनी नोटिस देकर राशि अदा करने को कहा था। लेकिन इसके बावजूद भी राशि अदा न करने के कारण उन्होंने अदालत में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत दायर करके आरोपी के खिलाफ अभियोग चलाया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी के खिलाफ उक्त अधिनियम के तहत चेक बाउंस का अपराध साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी को उक्त कारावास और हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया है।
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अधिवक्ता लोकेंद्र कुटलैहडिया के माध्यम से अदालत में दायर शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता की देनदारी चुकाने के लिए आरोपी अजय पठानिया ने उन्हें 31 मार्च 2012 को 5,50,000 रुपये का एक चेक जारी किया था। शिकायतकर्ता ज्ञान चंद ने जब यह चेक भुगतान के लिए अपने बैंक में लगाया तो आरोपी के खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण यह बाउंस हो गया था। इसके चलते शिकायतकर्ता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आरोपी को 15 दिनों का कानूनी नोटिस देकर राशि अदा करने को कहा था। लेकिन इसके बावजूद भी राशि अदा न करने के कारण उन्होंने अदालत में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत दायर करके आरोपी के खिलाफ अभियोग चलाया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी के खिलाफ उक्त अधिनियम के तहत चेक बाउंस का अपराध साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी को उक्त कारावास और हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया है।
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