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उचित मुआवजे के लिए मानवाधिकार आयोग जाएगी समिति : चिंतराम
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पधर (मंडी)। पठानकोट-मंडी फोरलेन समन्वय समिति लोगों की समस्या को लेकर जल्द ही मानवाधिकार आयोग तथा उच्च न्यायालय जाने की तैयारी में है। समिति के प्रधान चिंतराम ठाकुर और सचिव महेंद्र गुलेरिया ने शनिवार को पत्रकारवार्ता में बताया कि मंडी-पठानकोट फोरलेन में नारला से बिजनी तक के हिस्से के प्रभावित लोगों की बिना सहमति और बिना विश्वास में लिए रोड की अलाइनमेंट कर डीपीआर तैयार कर दी है। निर्माण कार्य की मंजूरी हासिल कर काम भी शुरू कर दिया है।
इस फोरलेन का अलाइनमेंट कार्य वर्ष 2017 से शुरू कर दिया गया था। लोगों को इस बात का पता वर्ष 2022 में चला जब जमीन की मुआवजा राशि अवार्ड की। लोगों को बिना बताए भूमि मूल्य भी निर्धारित कर दिया गया। लोगों के पूछने पर प्रशासन लोगों को गुमराह करता रहा। जब लोगों के खाते में पैसा आया तो पता चला कि दस लाख मूल्य की भूमि का दो लाख मुआवजा दिया गया। आज यही हाल पेड़ों और घरों का हो गया है, लोगों को उनके लघु उद्योग और दुकानों इत्यादि का भी कुछ नहीं दिया गया।
भूमिहीन, आवास हीन के लिए कोई प्रावधान नहीं किया जा रहा है। इन सब के लिए प्रशासन भी अपने हाथ पीछे खींच रहा है। अब प्रशासन लोगों को कोर्ट जाने की सलाह दे रहा है। दूसरी तरफ निर्माण कंपनी अपना काम जोरों पर कर रही है। शुक्रवार को समिति ने मंडी और पधर एसडीएम को पत्र लिखा है। इसमें उचित मुआवजा दिए जाने के बारे में लिखा गया है। समिति लोगों के इस मामले को मानवाधिकार आयोग में ले जाने और उच्च न्यायालय में जाने की तैयारी में है। संवाद
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इस फोरलेन का अलाइनमेंट कार्य वर्ष 2017 से शुरू कर दिया गया था। लोगों को इस बात का पता वर्ष 2022 में चला जब जमीन की मुआवजा राशि अवार्ड की। लोगों को बिना बताए भूमि मूल्य भी निर्धारित कर दिया गया। लोगों के पूछने पर प्रशासन लोगों को गुमराह करता रहा। जब लोगों के खाते में पैसा आया तो पता चला कि दस लाख मूल्य की भूमि का दो लाख मुआवजा दिया गया। आज यही हाल पेड़ों और घरों का हो गया है, लोगों को उनके लघु उद्योग और दुकानों इत्यादि का भी कुछ नहीं दिया गया।
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भूमिहीन, आवास हीन के लिए कोई प्रावधान नहीं किया जा रहा है। इन सब के लिए प्रशासन भी अपने हाथ पीछे खींच रहा है। अब प्रशासन लोगों को कोर्ट जाने की सलाह दे रहा है। दूसरी तरफ निर्माण कंपनी अपना काम जोरों पर कर रही है। शुक्रवार को समिति ने मंडी और पधर एसडीएम को पत्र लिखा है। इसमें उचित मुआवजा दिए जाने के बारे में लिखा गया है। समिति लोगों के इस मामले को मानवाधिकार आयोग में ले जाने और उच्च न्यायालय में जाने की तैयारी में है। संवाद
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