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एआई का उपयोग जनहित में हो : गोपालकृष्णन
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अगले 20-30 वर्षों में भारत में होंगे बड़े बदलाव
आईआईटी मंडी के स्थापना दिवस पर बोले इन्फोसिस लिमिटेड के सह संस्थापक
डिजिटल पर न चलाएं....
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी ने अपना 16 वर्षों का सफर पूरा करते हुए 17वां स्थापना दिवस सोमवार को उत्साह के साथ मनाया। इसमें इन्फोसिस लिमिटेड के सह संस्थापक पद्मभूषण क्रिस गोपालकृष्णन ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। संस्थान की ओर से निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने उन्हें शॉल, टोपी और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
मीडिया से बातचीत में क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तेजी से उभरती हुई तकनीक है और इसके सही उपयोग की जानकारी होना बेहद जरूरी है। यदि एआई का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह समाज के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है। एआई का इस्तेमाल मानव कल्याण और नागरिकों के हित में होना चाहिए। सेना और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी इस तकनीक के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। मुख्य अतिथि ने कहा कि किसी भी संस्थान की पहचान उसके छात्रों और उनके योगदान से बनती है। आईआईटी मंडी अभी अपेक्षाकृत युवा संस्थान है, लेकिन इसकी नींव और यहां के छात्रों का कार्य ही तय करेगा कि भविष्य में इसे किस रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने प्रशिक्षुओं से कहा कि वे इस संस्थान के निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और आने वाले समय में उनकी उपलब्धियां ही इस संस्थान की पहचान बनेंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री विकसित भारत का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने 30 वर्षों में तेज बदलाव देखे हैं और आने वाले 20-30 वर्षों में इससे भी बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
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अगले 20-30 वर्षों में भारत में होंगे बड़े बदलाव
आईआईटी मंडी के स्थापना दिवस पर बोले इन्फोसिस लिमिटेड के सह संस्थापक
डिजिटल पर न चलाएं....
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी ने अपना 16 वर्षों का सफर पूरा करते हुए 17वां स्थापना दिवस सोमवार को उत्साह के साथ मनाया। इसमें इन्फोसिस लिमिटेड के सह संस्थापक पद्मभूषण क्रिस गोपालकृष्णन ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। संस्थान की ओर से निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने उन्हें शॉल, टोपी और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
मीडिया से बातचीत में क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तेजी से उभरती हुई तकनीक है और इसके सही उपयोग की जानकारी होना बेहद जरूरी है। यदि एआई का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह समाज के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है। एआई का इस्तेमाल मानव कल्याण और नागरिकों के हित में होना चाहिए। सेना और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी इस तकनीक के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। मुख्य अतिथि ने कहा कि किसी भी संस्थान की पहचान उसके छात्रों और उनके योगदान से बनती है। आईआईटी मंडी अभी अपेक्षाकृत युवा संस्थान है, लेकिन इसकी नींव और यहां के छात्रों का कार्य ही तय करेगा कि भविष्य में इसे किस रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने प्रशिक्षुओं से कहा कि वे इस संस्थान के निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और आने वाले समय में उनकी उपलब्धियां ही इस संस्थान की पहचान बनेंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री विकसित भारत का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने 30 वर्षों में तेज बदलाव देखे हैं और आने वाले 20-30 वर्षों में इससे भी बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
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