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देवनाटी व पारंपरिक वाद्यों से पड्डल में माहौल भक्तिमय
Updated Mon, 19 Feb 2018 07:48 PM IST
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देवरथों को कंधों पर उठाकर झूमे देवलु
महाशिवरात्रि पर देव ध्वनियों से गूंजी छोटी काशी
मगरू महादेव ने नाटी डाल कर दिया आशीर्वाद
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। देव मानस मिलन के भव्य संगम में देवलुओं के कंधों पर देवरथ में झूमते देवी-देवताओं ने शिवरात्रि पर्व की ऐतिहासिक गरिमा को चार चांद लगा दिए। सोमवार को एक बार फिर देवनाटी हुई, लेकिन यह नाटी विशेष रही। शिवरात्रि के मुख्य देवता मगरू महादेव ने इस नाटी में शिरकत की। वहीं सिराज के खुड्डीजल देवता ने तीन साल बाद मेले में हाजिरी भरी। सिराज के चार विभिन्न स्थानों के देवताओं ने पड्डल मैदान में देवलुओं संग नाटी डाली। देव संस्कृति के विभिन्न पहलू उजागर करने वाली इस नाटी में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी राजीव कुमार तथा सर्व देवता कमेटी के अध्यक्ष शिव पाल शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। ढोल, नगाड़ों और वाद्य यंत्रों की थाप पर श्रद्धालु खुद को झूमने से नहीं रोक सके। एडीएम ने कहा कि पहाड़ों की देव संस्कृति से लोगों को रूबरू करवाने का यह एक उचित मंच है।
इन देवताओं की नाटी सबसे भिन्न : अध्यक्ष
सर्वदेवता सेवा समिति मंडी के अध्यक्ष ने कहा कि इस दौरान छतरी क्षेत्र के प्रमुख देवता देव मगरू महादेव, देव चपलांदू नाग, देव बायला नारायण और देवता खुड्डीजल ने नाटी में भाग लिया। इस क्षेत्र के देवताओं की नृत्य की शैली बिल्कुल अलग है। इनकी रस शैली प्राचीन काल से है। इनकी नाटी अन्य देवताओं की नाटी से भिन्न है। इस दौरान बजंतरियों ने अपनी वाद्य कला का बखूबी प्रदर्शन किया। इससे पहले शनिवार को भी देवनाटी का आयोजन हुआ था। देवनाटी का आयोजन दोपहर साढ़े बारह से ढाई बजे तक किया गया। इसमें इन चार देवताओं के संग आए सैकड़ों देवालुओं ने नाटी में भाग लिया। वहीं, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और देवधुनों से माहौल भक्तिमय हो गया। इस दौरान देवताओं ने एक-दूसरे से मिलन किया और एक-दूसरे संग नाटी डाली।
देवताओं के साथ यह जुड़ी है मान्यता
शिवरात्रि के मुख्य देव हैं मगरू महादेव। मगरूमहादेव को अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव का मुख्य देवता माना जाता है। इन्हीं के नाम से शिवरात्रि मेला शुरू होता है। इस देवता के मुख्य कारदार सुरेंद्र ने बताया कि इस देवता के नौ हार हैं। इस देवता का मूल स्थान छतरी में है। हर शिवरात्रि को भक्त इनके दर्शनों के लिए लालायित रहते हैं।
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02- बुरी शक्तियों से बचाते हैं चपलांदू नाग
चपलांदू नाग बुरी नजर से बचाते हैं। ऐसी मान्यता है कि बुरी ताकतों पर यह नियंत्रण करते हैं। यदि किसी पर गलत शक्तियों का प्रभाव हो या ग्रहों का प्रभाव हो तो इस देवता की पूजा करने से उन पर नियंत्रण पाया जा सकता है। लिहाजा, शिवरात्रि के दौरान यह अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
03- तीन साल बाद की मेले में की शिरकत
सिराज के मूलस्थान खुड्डीगाड़ के देवता ने तीन साल बाद मेले में शिरकत की है। उन्हें बहुत ही प्राचीन देवता के रूप में माना जाता है। लोगों की इस देवता पर बड़ी आस्था है। इस देवता मंदिर कमेटी के प्रधान ओमदत्त ने बताया कि यह देवता शिवरात्रि महोत्सव में लोगों के बीच गहरी आस्था का प्रतीक है।
04- संकट के समय रक्षा का मुख्य देवता
देवबायला नारायण देवता को प्राची देवता माना जाता है। इस देवता का मूलस्थान बायला कंडैली है, और मेले में इनके शिरकत करने से श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होने शुरू हो जाती है। लोगों की इस देवता के प्रति गहरी आस्था जुड़ी हुई है। संकट के समय लोगों की समस्या का निपटारा करने के रूप में इस देवता को माना जाता है।
शनिदेव के दर हजारों ने नवाया शीश
शिवरात्रि मेले में करीब चार सालों से शिरकत कर रहे नागचला के शनिदेव के दर दिनभर हजारों लोगों ने शीश नवाया। लोगों ने अपने ग्रह शांति के लिए उनके दर पर माथा टेका और उनसे आशीर्वाद लिया। नागचला के शनिदेव इस बार मेले का आकर्षण बने हुए हैं और न्याय का देवता होने के कारण हर कोई इनके प्रभाव से परिचित हैं।
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महाशिवरात्रि पर देव ध्वनियों से गूंजी छोटी काशी
मगरू महादेव ने नाटी डाल कर दिया आशीर्वाद
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। देव मानस मिलन के भव्य संगम में देवलुओं के कंधों पर देवरथ में झूमते देवी-देवताओं ने शिवरात्रि पर्व की ऐतिहासिक गरिमा को चार चांद लगा दिए। सोमवार को एक बार फिर देवनाटी हुई, लेकिन यह नाटी विशेष रही। शिवरात्रि के मुख्य देवता मगरू महादेव ने इस नाटी में शिरकत की। वहीं सिराज के खुड्डीजल देवता ने तीन साल बाद मेले में हाजिरी भरी। सिराज के चार विभिन्न स्थानों के देवताओं ने पड्डल मैदान में देवलुओं संग नाटी डाली। देव संस्कृति के विभिन्न पहलू उजागर करने वाली इस नाटी में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी राजीव कुमार तथा सर्व देवता कमेटी के अध्यक्ष शिव पाल शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। ढोल, नगाड़ों और वाद्य यंत्रों की थाप पर श्रद्धालु खुद को झूमने से नहीं रोक सके। एडीएम ने कहा कि पहाड़ों की देव संस्कृति से लोगों को रूबरू करवाने का यह एक उचित मंच है।
इन देवताओं की नाटी सबसे भिन्न : अध्यक्ष
सर्वदेवता सेवा समिति मंडी के अध्यक्ष ने कहा कि इस दौरान छतरी क्षेत्र के प्रमुख देवता देव मगरू महादेव, देव चपलांदू नाग, देव बायला नारायण और देवता खुड्डीजल ने नाटी में भाग लिया। इस क्षेत्र के देवताओं की नृत्य की शैली बिल्कुल अलग है। इनकी रस शैली प्राचीन काल से है। इनकी नाटी अन्य देवताओं की नाटी से भिन्न है। इस दौरान बजंतरियों ने अपनी वाद्य कला का बखूबी प्रदर्शन किया। इससे पहले शनिवार को भी देवनाटी का आयोजन हुआ था। देवनाटी का आयोजन दोपहर साढ़े बारह से ढाई बजे तक किया गया। इसमें इन चार देवताओं के संग आए सैकड़ों देवालुओं ने नाटी में भाग लिया। वहीं, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और देवधुनों से माहौल भक्तिमय हो गया। इस दौरान देवताओं ने एक-दूसरे से मिलन किया और एक-दूसरे संग नाटी डाली।
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देवताओं के साथ यह जुड़ी है मान्यता
शिवरात्रि के मुख्य देव हैं मगरू महादेव। मगरूमहादेव को अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव का मुख्य देवता माना जाता है। इन्हीं के नाम से शिवरात्रि मेला शुरू होता है। इस देवता के मुख्य कारदार सुरेंद्र ने बताया कि इस देवता के नौ हार हैं। इस देवता का मूल स्थान छतरी में है। हर शिवरात्रि को भक्त इनके दर्शनों के लिए लालायित रहते हैं।
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02- बुरी शक्तियों से बचाते हैं चपलांदू नाग
चपलांदू नाग बुरी नजर से बचाते हैं। ऐसी मान्यता है कि बुरी ताकतों पर यह नियंत्रण करते हैं। यदि किसी पर गलत शक्तियों का प्रभाव हो या ग्रहों का प्रभाव हो तो इस देवता की पूजा करने से उन पर नियंत्रण पाया जा सकता है। लिहाजा, शिवरात्रि के दौरान यह अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
03- तीन साल बाद की मेले में की शिरकत
सिराज के मूलस्थान खुड्डीगाड़ के देवता ने तीन साल बाद मेले में शिरकत की है। उन्हें बहुत ही प्राचीन देवता के रूप में माना जाता है। लोगों की इस देवता पर बड़ी आस्था है। इस देवता मंदिर कमेटी के प्रधान ओमदत्त ने बताया कि यह देवता शिवरात्रि महोत्सव में लोगों के बीच गहरी आस्था का प्रतीक है।
04- संकट के समय रक्षा का मुख्य देवता
देवबायला नारायण देवता को प्राची देवता माना जाता है। इस देवता का मूलस्थान बायला कंडैली है, और मेले में इनके शिरकत करने से श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होने शुरू हो जाती है। लोगों की इस देवता के प्रति गहरी आस्था जुड़ी हुई है। संकट के समय लोगों की समस्या का निपटारा करने के रूप में इस देवता को माना जाता है।
शनिदेव के दर हजारों ने नवाया शीश
शिवरात्रि मेले में करीब चार सालों से शिरकत कर रहे नागचला के शनिदेव के दर दिनभर हजारों लोगों ने शीश नवाया। लोगों ने अपने ग्रह शांति के लिए उनके दर पर माथा टेका और उनसे आशीर्वाद लिया। नागचला के शनिदेव इस बार मेले का आकर्षण बने हुए हैं और न्याय का देवता होने के कारण हर कोई इनके प्रभाव से परिचित हैं।