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पंचायत सचिव के 90 दिनों से अधिक अवधि तक निलंबित रखने का आदेश निरस्त
Updated Tue, 17 Jul 2018 10:44 PM IST
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मंडी। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने पंचायत सचिव को 90 दिनों से अधिक अवधि तक निलंबित रखने के विभागीय आदेशों को निरस्त करने का फैसला सुनाया है। इसके अलावा ट्रिब्यूनल ने विभाग को प्रार्थी के पक्ष में निलंबन अवधि का वेतन और भत्ते दो माह के भीतर 9 प्रतिशत ब्याज दर सहित अदा करने के भी निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के न्यायिक सदस्य डीके शर्मा ने मंडी सर्किट बेंच के दौरान सदर तहसील के मैरामसीत निवासी हेत राम की याचिका को स्वीकारते हुए उक्त आदेश पारित किए हैं।
तीन साल तक रखा था निलंबित
अधिवक्ता एसपी चटर्जी के माध्यम से ट्रिब्यूनल में दायर याचिका के अनुसार विभाग ने पंचायत सचिव के पद पर तैनात प्रार्थी हेत राम को अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत 3 सितंबर 2008 को निलंबित कर दिया था और उसे करीब तीन साल तक 21 मई 2011 तक निलंबित रखा था। प्रार्थी ने विभाग के इस आदेशों को ट्रिब्यूनल में याचिका दायर करके चुनौती दी थी।
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम दीपक माली मामले में व्यवस्था दी है कि 90 दिनों के बाद निलंबन आदेश वैध नहीं रहता। अगर इस पर पुनर्विचार करके इसे और अधिक 90 दिनों तक नहीं बढ़ाया जाए। इस मामले में निलंबन की अवधि को 90 दिनों से अधिक अवधि के लिए बढ़ाया नहीं गया है।
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तीन साल तक रखा था निलंबित
अधिवक्ता एसपी चटर्जी के माध्यम से ट्रिब्यूनल में दायर याचिका के अनुसार विभाग ने पंचायत सचिव के पद पर तैनात प्रार्थी हेत राम को अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत 3 सितंबर 2008 को निलंबित कर दिया था और उसे करीब तीन साल तक 21 मई 2011 तक निलंबित रखा था। प्रार्थी ने विभाग के इस आदेशों को ट्रिब्यूनल में याचिका दायर करके चुनौती दी थी।
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ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम दीपक माली मामले में व्यवस्था दी है कि 90 दिनों के बाद निलंबन आदेश वैध नहीं रहता। अगर इस पर पुनर्विचार करके इसे और अधिक 90 दिनों तक नहीं बढ़ाया जाए। इस मामले में निलंबन की अवधि को 90 दिनों से अधिक अवधि के लिए बढ़ाया नहीं गया है।
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