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सेहत से खिलवाड़ : खाद्य पदार्थ गुणवत्ता की जांच का काम बंद
Updated Mon, 04 Dec 2017 10:51 PM IST
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मंडी। प्रदेश के सबसे बड़े जिलों में शुमार करीब 10 लाख की आबादी वाले मंडी जिले में लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। होटलों, ढाबों, फास्ट फूड कार्नर, हलवाई और किराना की दुकानों मेें बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को जांचने का अहम कार्य बंद पड़ा है। लोगों तक पहुंच रही खाने पीने की चीजें सुरक्षित हैं या नहीं, इसके लिए खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत नामित अधिकारी तो तैनात कर दिया गया है, लेकिन खाद्य सुरक्षा के लिए सैंपल उठाने वाले एक भी फूड सेफ्टी आफिसर( निरीक्षक) की तैनाती ही नहीं हो सकी है। इसके चलते बिना किसी रोक टोक के सभी तरह के खाद्य पदार्थ बिना सैंपलिंग के बिक रहे हैं। नामित अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि जिले में रिक्त चल रहे खाद्य सुरक्षा अधिकारी व निरीक्षकों के पदों को भरने के लिए सरकार को सूचित कर दिया गया है। लेकिन, अब तक कोई भी पद नहीं भरा गया है। एक अनुमान के मुताबिक मंडी जिला में करीब 3000 कारोबारी खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े हैं। वहीं, आबकारी एवं कराधान विभाग के पंजीकृत डीलर भी है। जबकि असल में यह आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है।
ब्लॉक स्तर पर एक निरीक्षक का है नियम
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के अनुसार हर ब्लॉक में एक निरीक्षक का होना अनिवार्य है ताकि कोई भी घटिया पदार्थ न बिक सके। मंडी जिले में नामित अधिकारी ही तैनात हो सका है। जिलाभर में एक भी खाद्य निरीक्षक नहीं है। इन अधिकारियों के पद खाली होने के चलते कारोबारी बिना किसी रोकटोक के खाद्य पदार्थों को बेच रहे हैं। यहां तक कि दिवाली के समय भी किसी प्रकार की सैंपलिंग नहीं हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
डायरिया, फूड प्वायजनिंग के कई मामले आ चुुके हैं सामने
जिला के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डायरिया, फूड प्वायजनिंग से संबंधित कई मामले भी सामने आ चुके हैं। लंबे समय से जिले में बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच न होने के चलते यह कभी भी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। डिपुओं, होटलों, ढाबों सहित अन्य व्यापारिक संस्थानों में बेचे जा रहे खाद्य पदार्थोें की जांच होना बहुत जरूरी है। लेकिन, जिले में इस प्रकार की कोई भी सैंपलिंग नहीं हो रही है।
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खाद्य पदार्थों के विज्ञान आधारित मानक होते हैं निर्धारित
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के अनुसार खाद्य से संबंधित विधियों को समकेतिक करने और खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान आधारित मानक निर्धारित किए जाते हैं। खाद्य पदार्थों का निर्माण, भंडारण, वितरण और विक्रय भी निर्धारित किया जाता है। वहीं, खाद्य पदार्थों को मानव प्रयोग के लिए सुरक्षित, स्वास्थ्यप्रद और गुणवत्ता युक्त होने की जांच की जाती है।
ऐसे खाद्य पदार्थों का नमूना लेना जो मानव प्रयोग के लिए आयातित किया गया हो, खाद्य निरीक्षक किसी भी ऐसे स्थान का निरीक्षण कर सकता है जहां पर कोई भी खाद्य से संबंधित वस्तुओं का भंडारण किया गया हो। खराब खाद्य पदार्थों को नष्ट करवाना, अधिनियम के तहत वह किसी भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करने वाले व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
संबंधित विभागों से ली जाएगी रिपोर्ट: उपायुक्त
उपायुक्त मंडी मदन चौहान ने कहा कि संबंधित विभागों से इस संबंध में रिपोर्ट ली जाएगी। जब तक निरीक्षकों की तैनात नहीं होती है, तब तक किसी को डेप्यूट किया जाएगा ताकि सैंपलिंग का काम जिले में हो सके। बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग काफी जरूरी है। सरकार ने जो मानक बनाए हैं, इनकी अनुपालना करना चाहिए। सैंपलिंग का काम शुरू किया जाएगा।
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ब्लॉक स्तर पर एक निरीक्षक का है नियम
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के अनुसार हर ब्लॉक में एक निरीक्षक का होना अनिवार्य है ताकि कोई भी घटिया पदार्थ न बिक सके। मंडी जिले में नामित अधिकारी ही तैनात हो सका है। जिलाभर में एक भी खाद्य निरीक्षक नहीं है। इन अधिकारियों के पद खाली होने के चलते कारोबारी बिना किसी रोकटोक के खाद्य पदार्थों को बेच रहे हैं। यहां तक कि दिवाली के समय भी किसी प्रकार की सैंपलिंग नहीं हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
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डायरिया, फूड प्वायजनिंग के कई मामले आ चुुके हैं सामने
जिला के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डायरिया, फूड प्वायजनिंग से संबंधित कई मामले भी सामने आ चुके हैं। लंबे समय से जिले में बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच न होने के चलते यह कभी भी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। डिपुओं, होटलों, ढाबों सहित अन्य व्यापारिक संस्थानों में बेचे जा रहे खाद्य पदार्थोें की जांच होना बहुत जरूरी है। लेकिन, जिले में इस प्रकार की कोई भी सैंपलिंग नहीं हो रही है।
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खाद्य पदार्थों के विज्ञान आधारित मानक होते हैं निर्धारित
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के अनुसार खाद्य से संबंधित विधियों को समकेतिक करने और खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान आधारित मानक निर्धारित किए जाते हैं। खाद्य पदार्थों का निर्माण, भंडारण, वितरण और विक्रय भी निर्धारित किया जाता है। वहीं, खाद्य पदार्थों को मानव प्रयोग के लिए सुरक्षित, स्वास्थ्यप्रद और गुणवत्ता युक्त होने की जांच की जाती है।
ऐसे खाद्य पदार्थों का नमूना लेना जो मानव प्रयोग के लिए आयातित किया गया हो, खाद्य निरीक्षक किसी भी ऐसे स्थान का निरीक्षण कर सकता है जहां पर कोई भी खाद्य से संबंधित वस्तुओं का भंडारण किया गया हो। खराब खाद्य पदार्थों को नष्ट करवाना, अधिनियम के तहत वह किसी भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करने वाले व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
संबंधित विभागों से ली जाएगी रिपोर्ट: उपायुक्त
उपायुक्त मंडी मदन चौहान ने कहा कि संबंधित विभागों से इस संबंध में रिपोर्ट ली जाएगी। जब तक निरीक्षकों की तैनात नहीं होती है, तब तक किसी को डेप्यूट किया जाएगा ताकि सैंपलिंग का काम जिले में हो सके। बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग काफी जरूरी है। सरकार ने जो मानक बनाए हैं, इनकी अनुपालना करना चाहिए। सैंपलिंग का काम शुरू किया जाएगा।