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दुर्घटना करने के आरोपी चालक की नौकरी बहाल, चलेगी जांच
Updated Thu, 02 Nov 2017 10:48 PM IST
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मंडी। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने अनुबंध पर रखे गए परिवहन निगम के चालक की ओर से दुर्घटना करने पर समाप्त कर दी गई नौकरी को बहाल करने का फैसला सुनाया है। हालांकि ट्रिब्यूनल ने निगम को इस मामले में चालक की संलिप्तता के संबंध में जांच करने से रोक नहीं लगाई है। ट्रिब्यूनल के न्यायिक सदस्य डीके शर्मा की बेंच ने मंडी सर्किट के दौरान परिवहन निगम के चालक जसवंत सिंह की सेवाएं बहाल करने का फैसला सुनाया है।
अधिवक्ता एसपी चटर्जी के माध्यम से ट्रिब्यूनल में दायर याचिका के अनुसार निगम ने 22 जनवरी 2010 को याचिकाकर्ता जसवंत सिंह को अनुबंध के आधार पर चालक के पद पर नियुक्त किया था। ड्यूटी के दौरान याचिकाकर्ता की बस की टक्कर एक वैन से हो गई थी। जिसके कारण निगम ने चालक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनकी सेवाओं को निरस्त कर दिया और अनुबंध को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता ने सेवा को निरस्त करने के आदेशों को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी। ट्रिब्यूनल ने याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाए फैसले में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दी गई व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि सेवा से बर्खास्त करने का फैसला जांच बिठाए बगैर नहीं किया जा सकता है। अस्थायी कर्मचारियों, प्रोबेशनर और अनुबंध कर्मचारियों सभी पर यह आदेश लागू होता है। बिना जांच बिठाए कर्मचारी को सेवा मुक्त कर देना संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है। इस मामले में भी चालक को बिना जांच बिठाए ही सेवामुक्त कर दिया गया है। जिसके चलते ट्रिब्यूनल ने चालक को सेवामुक्त करने के आदेशों को निरस्त करके उसकी सेवाएं बहाल करने का फैसला सुनाया है। हालांकि ट्रिब्यूनल ने चालक के खिलाफ निगम द्वारा आवश्यक कार्रवाई करने से रोक नहीं लगाई है।
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अधिवक्ता एसपी चटर्जी के माध्यम से ट्रिब्यूनल में दायर याचिका के अनुसार निगम ने 22 जनवरी 2010 को याचिकाकर्ता जसवंत सिंह को अनुबंध के आधार पर चालक के पद पर नियुक्त किया था। ड्यूटी के दौरान याचिकाकर्ता की बस की टक्कर एक वैन से हो गई थी। जिसके कारण निगम ने चालक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनकी सेवाओं को निरस्त कर दिया और अनुबंध को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता ने सेवा को निरस्त करने के आदेशों को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी। ट्रिब्यूनल ने याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाए फैसले में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दी गई व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि सेवा से बर्खास्त करने का फैसला जांच बिठाए बगैर नहीं किया जा सकता है। अस्थायी कर्मचारियों, प्रोबेशनर और अनुबंध कर्मचारियों सभी पर यह आदेश लागू होता है। बिना जांच बिठाए कर्मचारी को सेवा मुक्त कर देना संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है। इस मामले में भी चालक को बिना जांच बिठाए ही सेवामुक्त कर दिया गया है। जिसके चलते ट्रिब्यूनल ने चालक को सेवामुक्त करने के आदेशों को निरस्त करके उसकी सेवाएं बहाल करने का फैसला सुनाया है। हालांकि ट्रिब्यूनल ने चालक के खिलाफ निगम द्वारा आवश्यक कार्रवाई करने से रोक नहीं लगाई है।
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