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वाह रे सरकार ! और कितनी जिदंगियों से होगा खिलवाड़
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मंडी। औट-लुहरी एनएच पर बयोट मोड़ पर हुए भयावह बस हादसे को 12 दिन बीत चुके हैं। यह हादसा 46 लोगों की जिंदगी लील कर क्षेत्रवासियों को कभी न भूलने वाले गहरे जख्म दे गया है। लेकिन, जिस स्थान पर बस हादसा हुआ है, वहां सरकारी तंत्र ने क्रैश बैरियर और पैरापिट तक नहीं लगाए हैं। हैरत की बात है कि हादसे वाले मोड़ पर एनएच प्राधिकरण ने औपचारिकता निभाने के लिए लिए महज डंडे और टेप की रेंलिग लगा दी है। यदि इसी स्पॉट पर भगवान न करे कोई और हादसा होता है तो इसके परिणाम भी 20 जुलाई वाले भयंकर हादसे की तरह होंगे। यह मार्ग मंडी जिले को आपस में जोड़ता है। रोजाना मंडी से सैकड़ों लोग इसी मार्ग से होकर सराज, शिमला और गाड़ागुशैणी और छतरी होकर जंजैहली के लिए निकलते हैं लेकिन चढ़ाई वाले इन तीखे मोड़ों पर सुरक्षा के कोई इंतजाम न होता देख लोग डर के साये में सफर करने को मजबूर हैं। आलम यह है कि हादसे वाले मोड़ को अभी तक भी ब्लैक स्पाट घोषित नहीं किया गया है। जबकि बंजार से गाड़ागुशैणी और जलोड़ी मार्ग पर कई ऐसे कई खतरनाक मोड़ हादसों को न्योता दे रहे हैं।
क्यों घोषित नहीं हुआ ब्लैक स्पाट
इस मार्ग पर रोजाना सफर करने वालों भीमसैन, योगराज, ताराचंद, शेर सिंह, खेम सिंह, बुद्धे राम आदि का कहना है कि 2012 में औट-लूहरी 305 को एनएच का दर्जा मिलने के बाद भी एनएच अथॉरिटी ने बयोट मोड़ को ब्लैक स्पॉट घोषित नहीं किया। सवाल उठता है कि जब विभाग को पता था कि यह मोड़ बेहद खतरनाक है तो इसे ब्लैक स्पॉट घोषित क्यों नहीं किया गया? अगर इस मार्ग को ब्लैक स्पॉट घोषित किया जाता तो यह वाहनों की आवाजाही के लिए अधिक सुरक्षित होता।
इस मार्ग पर अब तक बड़े हादसे
1998 में बालीचौकी के दाड़ी के पास एक निजी बस हादसा हुआ था। इसमें करीब 21 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय 42 सीटर बस में 55 से भी अधिक यात्री सवार थे। 2007 में एक बार फिर दाड़ी के पास बस हादसा हुआ था। इसमें 23 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी 42 सीटर बस में 64 से अधिक यात्री सवार थे। उसके बाद 2013 में नगवाईं के झीड़ी में एक निजी बस हादसा हुआ था जिसमें करीब 40 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी 42 सीटर बस में 60 से अधिक यात्री सवार थे। वहीं, 20 जून को हुए बंजार के बयोट मोड़ के पास हुए हादसे में 42 सीटर महावीर बस में 87 सवारियां सवार थीं, जिनमें से अब तक 46 लोगों की मौत हो गई है।
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जल्द लगा दिए जाएंगे पैरापिट : एक्सईएन
एनएच पंडोह के अधिशासी अभियंता महेश राणा ने माना कि बयोट को ब्लैक स्पॉट घोषित नहीं किया गया है। जल्द इस स्पॉट को दुरुस्त कर दिया जाएगा और यहां पर पैरापिट लगा दिए जाएंगे। उनके अनुसार क्रैश बैरियर उन स्थानों पर लगाया जाता है, जहां हादसे का ज्यादा खतरा होता है। उधर, बंजार के स्थानीय विधायक सुरेंद्र शौरी का कहना है कि हादसे वाली जगह पर जल्द पैरापिट या क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे। भविष्य में ऐसे हादसे न हो, इसके लिए भी डेंजर जोन पर रेलिंग लगाई जाएगी।
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क्यों घोषित नहीं हुआ ब्लैक स्पाट
इस मार्ग पर रोजाना सफर करने वालों भीमसैन, योगराज, ताराचंद, शेर सिंह, खेम सिंह, बुद्धे राम आदि का कहना है कि 2012 में औट-लूहरी 305 को एनएच का दर्जा मिलने के बाद भी एनएच अथॉरिटी ने बयोट मोड़ को ब्लैक स्पॉट घोषित नहीं किया। सवाल उठता है कि जब विभाग को पता था कि यह मोड़ बेहद खतरनाक है तो इसे ब्लैक स्पॉट घोषित क्यों नहीं किया गया? अगर इस मार्ग को ब्लैक स्पॉट घोषित किया जाता तो यह वाहनों की आवाजाही के लिए अधिक सुरक्षित होता।
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इस मार्ग पर अब तक बड़े हादसे
1998 में बालीचौकी के दाड़ी के पास एक निजी बस हादसा हुआ था। इसमें करीब 21 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय 42 सीटर बस में 55 से भी अधिक यात्री सवार थे। 2007 में एक बार फिर दाड़ी के पास बस हादसा हुआ था। इसमें 23 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी 42 सीटर बस में 64 से अधिक यात्री सवार थे। उसके बाद 2013 में नगवाईं के झीड़ी में एक निजी बस हादसा हुआ था जिसमें करीब 40 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी 42 सीटर बस में 60 से अधिक यात्री सवार थे। वहीं, 20 जून को हुए बंजार के बयोट मोड़ के पास हुए हादसे में 42 सीटर महावीर बस में 87 सवारियां सवार थीं, जिनमें से अब तक 46 लोगों की मौत हो गई है।
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जल्द लगा दिए जाएंगे पैरापिट : एक्सईएन
एनएच पंडोह के अधिशासी अभियंता महेश राणा ने माना कि बयोट को ब्लैक स्पॉट घोषित नहीं किया गया है। जल्द इस स्पॉट को दुरुस्त कर दिया जाएगा और यहां पर पैरापिट लगा दिए जाएंगे। उनके अनुसार क्रैश बैरियर उन स्थानों पर लगाया जाता है, जहां हादसे का ज्यादा खतरा होता है। उधर, बंजार के स्थानीय विधायक सुरेंद्र शौरी का कहना है कि हादसे वाली जगह पर जल्द पैरापिट या क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे। भविष्य में ऐसे हादसे न हो, इसके लिए भी डेंजर जोन पर रेलिंग लगाई जाएगी।