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उहल तृतीय परियोजना की रेजर वायर में सफल जल भराव
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अमर उजाला ब्यूरो
जोगिंद्रनगर (मंडी)। ऊहल तृतीय परियोजना की रेजर वायर में सफल जल भराव के बाद इसी वर्ष दिसबंर माह में विद्युत उत्पादन होने की उम्मीद है। शनिवार को भी परियोजना की रेजरवायर में सफल जलभराव पर परियोजना प्रबंधन ने खुशियां मनाईं और मिठाई बांट कर अपने सहयोगियों को बधाई दी। बीएचएल और व्यास वैली पावर कार्पोरेशन की देखरेख में निर्मित परियोजना में हाईटेक मशीनरी का इस्तेमाल किया गया है। पैन स्टोक, जनरेटर सुविधा सहित टेंपरेचर टेस्ट के परीक्षण सफल हो चुके हैं। इनमें आंशिक रूप से पैदा हुई खामियों को काफी हद तक सुधार लिया गया है। ब्रिटिश नागरिक कर्नल बैटी की ओर से आजादी से पहले संजोए गए सपने साकार होते दिख रहे हैं। वर्ष 1932 की ऐतिहासिक 110 मेगावाट शानन ऊहल प्रथम, वर्ष 1970 की 66 मेगावाट बस्सी द्वितीय और अब जल्द ही उहल तृतीय विद्युत परियोजना में भी 100 मेगावाट विद्युत उत्पादन शुरू होगा। लक्ष्य 300 मेगावाट विद्युत उत्पादन का रखा गया है। उपमंडल जोगिंद्रनगर को अब विद्युत नगरी के नाम से भी जाना जाएगा क्योंकि एक साथ तीन विद्युत परियोजनाओं में 300 मेगावाट विद्युत उत्पादन एक समय में शुरू होने का रास्ता साफ हो चुका है। प्रदेश और बाहरी राज्यों को रोशन करने वाला शहर अब विद्युत नगरी बनने जा रहा है। बड़ी बात यह है कि पानी की प्रचुर मात्रा के दौरान तीनों परियोजनाएं अपनी क्षमता से भी अधिक का विद्युत उत्पादन करेंगी। वहीं, नई परियोजना शुरू होने पर क्षेत्र के युवाओं को भी रोजगार के अवसर हासिल होंगे। परियोजना के प्रबंध निदेशक दिनेश चौधरी, अधिशासी अभियंता सिविल राजीव शर्मा और अजय व विक्रांत ने योजना के बारे में बताया है कि तमाम चुनौतियों को पार करते हुए व्यास वैली कार्पोरेशन ऊहल तृतीय परियोजना को अंतिम रूप दे चुका है। रेजर वायर में सफल जल भराव होने के बाद दिसंबर में परियोजना की तीनों यूनिटों पर विद्युत उत्पादन शुरू होगा। इससे प्रदेश को अरबों रुपयों की आमदनी शुरू होगी।
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। ऊहल तृतीय परियोजना की रेजर वायर में सफल जल भराव के बाद इसी वर्ष दिसबंर माह में विद्युत उत्पादन होने की उम्मीद है। शनिवार को भी परियोजना की रेजरवायर में सफल जलभराव पर परियोजना प्रबंधन ने खुशियां मनाईं और मिठाई बांट कर अपने सहयोगियों को बधाई दी। बीएचएल और व्यास वैली पावर कार्पोरेशन की देखरेख में निर्मित परियोजना में हाईटेक मशीनरी का इस्तेमाल किया गया है। पैन स्टोक, जनरेटर सुविधा सहित टेंपरेचर टेस्ट के परीक्षण सफल हो चुके हैं। इनमें आंशिक रूप से पैदा हुई खामियों को काफी हद तक सुधार लिया गया है। ब्रिटिश नागरिक कर्नल बैटी की ओर से आजादी से पहले संजोए गए सपने साकार होते दिख रहे हैं। वर्ष 1932 की ऐतिहासिक 110 मेगावाट शानन ऊहल प्रथम, वर्ष 1970 की 66 मेगावाट बस्सी द्वितीय और अब जल्द ही उहल तृतीय विद्युत परियोजना में भी 100 मेगावाट विद्युत उत्पादन शुरू होगा। लक्ष्य 300 मेगावाट विद्युत उत्पादन का रखा गया है। उपमंडल जोगिंद्रनगर को अब विद्युत नगरी के नाम से भी जाना जाएगा क्योंकि एक साथ तीन विद्युत परियोजनाओं में 300 मेगावाट विद्युत उत्पादन एक समय में शुरू होने का रास्ता साफ हो चुका है। प्रदेश और बाहरी राज्यों को रोशन करने वाला शहर अब विद्युत नगरी बनने जा रहा है। बड़ी बात यह है कि पानी की प्रचुर मात्रा के दौरान तीनों परियोजनाएं अपनी क्षमता से भी अधिक का विद्युत उत्पादन करेंगी। वहीं, नई परियोजना शुरू होने पर क्षेत्र के युवाओं को भी रोजगार के अवसर हासिल होंगे। परियोजना के प्रबंध निदेशक दिनेश चौधरी, अधिशासी अभियंता सिविल राजीव शर्मा और अजय व विक्रांत ने योजना के बारे में बताया है कि तमाम चुनौतियों को पार करते हुए व्यास वैली कार्पोरेशन ऊहल तृतीय परियोजना को अंतिम रूप दे चुका है। रेजर वायर में सफल जल भराव होने के बाद दिसंबर में परियोजना की तीनों यूनिटों पर विद्युत उत्पादन शुरू होगा। इससे प्रदेश को अरबों रुपयों की आमदनी शुरू होगी।