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किचन शेड और टॉयलेट के लिए काट डाले देवदार के पेड़
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अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। शैटाधार और जोगीपाथर की खूबसूरती को पर्यटन के नाम पर बदसूरत किया जा रहा है। शैटाधार में वन विभाग अवैज्ञानिक तरीके से निर्माण कर रहा है जो प्राकृतिक सुंदरता से खिलवाड़ तो है ही साथ ही धार्मिक भावनाओं को भी आहत कर रहा है। वन विभाग ने ईको टूरिज्म के नाम पर धार्मिक स्थल शैटाधार का सौंदर्य बिगाड़ दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने शैटाधार पर पर्यटकों के लिए किचन, शैड और टॉयलेट बनाने के चक्कर में देवदार, रई और तोष के पेड़ काट दिए हैं। एक ओर जहां सुप्रीम कोर्ट ने इस पर पूर्णतया रोक लगा रखी है वहीं, दूसरी ओर यहां जंगल के रक्षक ही भक्षक बने बैठे हैं। इतना ही नहीं विभाग ने जोगीपाथर और जोगणी मंदिर के पास पत्थरों के ढेर लगा लगा रखे हैं और जगह-जगह पर खुदाई कर इस स्थल को बदसूरत बना दिया है। इस मनमाने निर्माण के लिए वन विभाग ने न देव कमेटी और न ही स्थानीय पंचायतों को विश्वास में लिया है। प्रशासन ने भी इस अवैध निर्माण के लिए मौन स्वीकृति दे रखी है। वन विभाग की ओर से ईको टूरिज्म के नाम पर मंदिर परिसर के समीप कुछ टेंट गाढ़कर वहां पक्के शौचालय, शेड और किचन बनाए जा रहे हैं। हैलीपैड के समीप एक अन्य सड़क बनाकर पहाड़ी को काटकर समतल किया जा चुका है। यहां पर भी कुछ कंक्रीट का भवन बनाने की चर्चा है। जोगीपाथर के आसपास पत्थरों का ढेर लगाया गया है, वहां पर भी बाउंड्री वाल जैसा कुछ निर्माण करने की योजना है। पर्यटन के नाम पर जो भी निर्माण हो, वह शैटाधार स्थित मंदिर परिसर से दो किलोमीटर की परिधि से बाहर होना चाहिए, जिससे शैटाधार का नैसर्गिक सौंदर्य बरकरार रह सके।
क्या कहते हैं देव संस्कृति से जुड़े लोग
देव संस्कृति से जुड़े लोगों हेम सिंह, उमेश सिंह, हेत राम, यादव राम, नवीन, काकू, पुनीत, सूरज सिंह, भीम सेन, वीर सिंह सहित अन्य का कहना है कि मंदिर परिसर के आसपास अवैज्ञानिक तरीके से निर्माण किया जा रहा है। इससे पर्यावरण को हानि हो रही है और शैटाधार की प्राकृतिक सुंदरता नष्ट हो रही है। मंदिर परिसर में पहले से निर्मित सरायों के अलावा किसी भी प्रकार का निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश सरकार और विभाग से मांग की है कि शैटाधार और जोगीपाथर में हो रहे स्थायी अथवा अस्थायी निर्माण को रोका जाए। कहा कि शैटाधार के आसपास बहुत सारा क्षेत्र है जो सड़क से जुड़ा हुआ है, वहां पर निर्माण किया जा सकता है।
आरोप निराधार : डीएफओ
इसके बारे में नाचन के डीएफओ टीआर धीमान का कहना है कि जो भी आरोप लगाए गए हैं, वे गलत है। यहां पर आसपास कोई भी देवदार, रई और तोष के पेड़ नहीं है। वहीं, मंदिर परिसर से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर किचन शेड और शौचालय बनाए जा रहे हैं, जिससे यहां की सुंदरता बनी रहे।
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मंडी। शैटाधार और जोगीपाथर की खूबसूरती को पर्यटन के नाम पर बदसूरत किया जा रहा है। शैटाधार में वन विभाग अवैज्ञानिक तरीके से निर्माण कर रहा है जो प्राकृतिक सुंदरता से खिलवाड़ तो है ही साथ ही धार्मिक भावनाओं को भी आहत कर रहा है। वन विभाग ने ईको टूरिज्म के नाम पर धार्मिक स्थल शैटाधार का सौंदर्य बिगाड़ दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने शैटाधार पर पर्यटकों के लिए किचन, शैड और टॉयलेट बनाने के चक्कर में देवदार, रई और तोष के पेड़ काट दिए हैं। एक ओर जहां सुप्रीम कोर्ट ने इस पर पूर्णतया रोक लगा रखी है वहीं, दूसरी ओर यहां जंगल के रक्षक ही भक्षक बने बैठे हैं। इतना ही नहीं विभाग ने जोगीपाथर और जोगणी मंदिर के पास पत्थरों के ढेर लगा लगा रखे हैं और जगह-जगह पर खुदाई कर इस स्थल को बदसूरत बना दिया है। इस मनमाने निर्माण के लिए वन विभाग ने न देव कमेटी और न ही स्थानीय पंचायतों को विश्वास में लिया है। प्रशासन ने भी इस अवैध निर्माण के लिए मौन स्वीकृति दे रखी है। वन विभाग की ओर से ईको टूरिज्म के नाम पर मंदिर परिसर के समीप कुछ टेंट गाढ़कर वहां पक्के शौचालय, शेड और किचन बनाए जा रहे हैं। हैलीपैड के समीप एक अन्य सड़क बनाकर पहाड़ी को काटकर समतल किया जा चुका है। यहां पर भी कुछ कंक्रीट का भवन बनाने की चर्चा है। जोगीपाथर के आसपास पत्थरों का ढेर लगाया गया है, वहां पर भी बाउंड्री वाल जैसा कुछ निर्माण करने की योजना है। पर्यटन के नाम पर जो भी निर्माण हो, वह शैटाधार स्थित मंदिर परिसर से दो किलोमीटर की परिधि से बाहर होना चाहिए, जिससे शैटाधार का नैसर्गिक सौंदर्य बरकरार रह सके।
क्या कहते हैं देव संस्कृति से जुड़े लोग
देव संस्कृति से जुड़े लोगों हेम सिंह, उमेश सिंह, हेत राम, यादव राम, नवीन, काकू, पुनीत, सूरज सिंह, भीम सेन, वीर सिंह सहित अन्य का कहना है कि मंदिर परिसर के आसपास अवैज्ञानिक तरीके से निर्माण किया जा रहा है। इससे पर्यावरण को हानि हो रही है और शैटाधार की प्राकृतिक सुंदरता नष्ट हो रही है। मंदिर परिसर में पहले से निर्मित सरायों के अलावा किसी भी प्रकार का निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश सरकार और विभाग से मांग की है कि शैटाधार और जोगीपाथर में हो रहे स्थायी अथवा अस्थायी निर्माण को रोका जाए। कहा कि शैटाधार के आसपास बहुत सारा क्षेत्र है जो सड़क से जुड़ा हुआ है, वहां पर निर्माण किया जा सकता है।
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आरोप निराधार : डीएफओ
इसके बारे में नाचन के डीएफओ टीआर धीमान का कहना है कि जो भी आरोप लगाए गए हैं, वे गलत है। यहां पर आसपास कोई भी देवदार, रई और तोष के पेड़ नहीं है। वहीं, मंदिर परिसर से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर किचन शेड और शौचालय बनाए जा रहे हैं, जिससे यहां की सुंदरता बनी रहे।
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