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वाहनों में ओवलोडिंग से आखिर कब तक होता रहेगा लोगों की जिदंगियों से खिलवाड़
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आखिर कब तक होता रहेगा जिंदगियों से खिलवाड़
ओवरलोडिंग पर सिर्फ नाम की होती है कार्रवाई, दुर्घटनाएं बदस्तूर जारी
फाइलों में ही दफन हो जाते हैं सरकार और विभाग के नियम
ब्लैक स्पॉट घोषित बयोट मोड़ के पास सुरक्षा के नहीं थे इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। अगर किसी भी बस हादसे की जांच पर गौर करें तो ओवरलोडिंग, अप्रशिक्षित चालक और सड़कों की दयनीय हालत ही इसके लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। दिल दहलाने वाले उपमंडल बंजार के बयोट मोड़ पर हुए दर्दनाक हादसे ने कई घरों के चिराग बुझा दिए। सरकार और प्रशासन की ओर से बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर आखिर कब तक लोगों की जान के साथ खिलवाड़ होता रहेगा? सरकार और प्रशासन के पास यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने के लिए समय नहीं है। दुख: की बात तो यह है कि प्रशासन ऐसे लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस और खटारा बसों की पासिंग कैसे कर देता है, यह समझ से परे है। वहीं, बसों की क्षमता से अधिक सवारियों को अधिक पैसे कमाने के चक्कर में ठूंस-ठूंस कर भर दिया जाता है लेकिन, फिर भी सरकार और प्रशासन यातायात के नियमों के उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते हैं। सरकार और प्रशासन उस समय कार्रवाई करते हैं, जब किसी सड़क हादसों में लोगों की मौत हो जाती है। वहीं, राष्टीय राजमार्ग 305 औट-लूहरी सड़क को एनएच का दर्जा तो मिल गया है, लेकिन हालत संपर्क मार्ग से भी ज्यादा बदतर है।
ब्लैक स्पॉट घोषित पर सुरक्षा के इंतजाम जीरो
बंजार के बयोट मोड़ के पास ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है, लेकिन यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यहां पर मात्र चुनिंदा स्थानों पर ही रेलिंग लगाई गई है। इसमे एनएच आथॉरिटी की लापरवाही भी उजागर होती है। इस से पहले भी इस जगह पर कई हादसे हो चुके हैं। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि अगर ओवरलोडिंग पर पूूर्ण रूप से प्रतिबंध है तो विभाग ने आज तक इन बस मालिकों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? हादसे के दिन 42 सीटर महावीर बस में 81 से भी अधिक सवारियां बिठाई गई थीं। इस सड़क दुर्घटना के पीछे ओवरलोडिंग और सड़क की दुर्दशा इस हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है। मंडी-कुल्लू जिले में अब तक जितने भी बड़े हादसे हुए हैं, वहां पर ओवरलोडिंग ही बड़ा कारण रहा है। ऐसे में लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए है।
अब तक के बड़े हादसे
1998 में बालीचौकी के दाड़ी के पास एक निजी बस हादसा हुआ था। इसमें करीब 21 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय 42 सीटर बस में 55 से भी अधिक यात्री सवार थे। 2007 में एक बार फिर दाड़ी के पास बस हादसा हुआ था, जिसमें 23 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी 42 सीटर बस में 64 से अधिक यात्री सवार थे। उसके बाद 2013 में नगवाईं के झीड़ी में एक निजी बस हादसा हुआ था, जिसमें करीब 40 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी 42 सीटर बस में 60 से अधिक यात्री सवार थे। वहीं, 20 जून 2019 यानी वीरवार को हुए बंजार के बयोट मोड़ के पास हुए हादसे में 42 सीटर महावीर बस में 81 से भी अधिक सवारियां सवार थीं। इसमें अब तक 45 लोगों की मौत हो गई है। गौरतलब है कि इतने हादसेे होने के बावजूद दोनों सरकारें इन सड़क हादसों को रोकने के लिए आज तक कुछ नहीं कर पाई हैं।
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ओवरलोडिंग पर सिर्फ नाम की होती है कार्रवाई, दुर्घटनाएं बदस्तूर जारी
फाइलों में ही दफन हो जाते हैं सरकार और विभाग के नियम
ब्लैक स्पॉट घोषित बयोट मोड़ के पास सुरक्षा के नहीं थे इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। अगर किसी भी बस हादसे की जांच पर गौर करें तो ओवरलोडिंग, अप्रशिक्षित चालक और सड़कों की दयनीय हालत ही इसके लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। दिल दहलाने वाले उपमंडल बंजार के बयोट मोड़ पर हुए दर्दनाक हादसे ने कई घरों के चिराग बुझा दिए। सरकार और प्रशासन की ओर से बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर आखिर कब तक लोगों की जान के साथ खिलवाड़ होता रहेगा? सरकार और प्रशासन के पास यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने के लिए समय नहीं है। दुख: की बात तो यह है कि प्रशासन ऐसे लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस और खटारा बसों की पासिंग कैसे कर देता है, यह समझ से परे है। वहीं, बसों की क्षमता से अधिक सवारियों को अधिक पैसे कमाने के चक्कर में ठूंस-ठूंस कर भर दिया जाता है लेकिन, फिर भी सरकार और प्रशासन यातायात के नियमों के उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते हैं। सरकार और प्रशासन उस समय कार्रवाई करते हैं, जब किसी सड़क हादसों में लोगों की मौत हो जाती है। वहीं, राष्टीय राजमार्ग 305 औट-लूहरी सड़क को एनएच का दर्जा तो मिल गया है, लेकिन हालत संपर्क मार्ग से भी ज्यादा बदतर है।
ब्लैक स्पॉट घोषित पर सुरक्षा के इंतजाम जीरो
बंजार के बयोट मोड़ के पास ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है, लेकिन यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यहां पर मात्र चुनिंदा स्थानों पर ही रेलिंग लगाई गई है। इसमे एनएच आथॉरिटी की लापरवाही भी उजागर होती है। इस से पहले भी इस जगह पर कई हादसे हो चुके हैं। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि अगर ओवरलोडिंग पर पूूर्ण रूप से प्रतिबंध है तो विभाग ने आज तक इन बस मालिकों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? हादसे के दिन 42 सीटर महावीर बस में 81 से भी अधिक सवारियां बिठाई गई थीं। इस सड़क दुर्घटना के पीछे ओवरलोडिंग और सड़क की दुर्दशा इस हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है। मंडी-कुल्लू जिले में अब तक जितने भी बड़े हादसे हुए हैं, वहां पर ओवरलोडिंग ही बड़ा कारण रहा है। ऐसे में लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए है।
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अब तक के बड़े हादसे
1998 में बालीचौकी के दाड़ी के पास एक निजी बस हादसा हुआ था। इसमें करीब 21 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय 42 सीटर बस में 55 से भी अधिक यात्री सवार थे। 2007 में एक बार फिर दाड़ी के पास बस हादसा हुआ था, जिसमें 23 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी 42 सीटर बस में 64 से अधिक यात्री सवार थे। उसके बाद 2013 में नगवाईं के झीड़ी में एक निजी बस हादसा हुआ था, जिसमें करीब 40 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी 42 सीटर बस में 60 से अधिक यात्री सवार थे। वहीं, 20 जून 2019 यानी वीरवार को हुए बंजार के बयोट मोड़ के पास हुए हादसे में 42 सीटर महावीर बस में 81 से भी अधिक सवारियां सवार थीं। इसमें अब तक 45 लोगों की मौत हो गई है। गौरतलब है कि इतने हादसेे होने के बावजूद दोनों सरकारें इन सड़क हादसों को रोकने के लिए आज तक कुछ नहीं कर पाई हैं।
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