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कुल्लू: बाह्य सराज में अनोखी महाशिवरात्रि, केमटू की माला बनाकर की पूजा-अर्चना
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कुल्लू। जिलेभर में महाशिवरात्रि पर्व पर लोगों में खासा उत्साह रहा। शनिवार को देवालयों में भगवान शिव के दर्शन के लिए भीड़ लगी रही, वहीं कुल्लू जिले के बाह्य सराज में शिवरात्रि को अनोखे तरीके से मनाया।
बाह्य सराज के सेरीगढ़, जांजा, जलोड़ी से रघुपुरगढ़ इलाके के साथ निरमंड क्षेत्र में पर्व मनाया गया। सुबह ग्रामीणों ने केमटू (फल) की माला (सैंई) बनाई। छह से सात फीट लंबी माला को पाजा, नोइर, ध्रुव और जौ की पतियों से सजाया। इसे दोपहर 12:00 बजे से पहले घर के एक साफ सुथरे कमरे के कोने में लगाया गया।
इसके बाद आटे के बने मेमने, हलवा और पूरी का मंडल सजाया। इस दौरान लोगों ने तरह-तरह के व्यंजन परोसे। शाम के समय शिव माला की आरती उतारी और रात को गांव के लोग एकत्रित होकर ढोल-नगाड़ों और अन्य वाद्ययंत्रों के साथ नाचे। गांववासी पूरे गांव में हर घर जाकर भगवान शिवजी की आराधना कर उन्हें खुश करते हैं।
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महाशिवरात्रि पर्व को यादगार बनाने के लिए लोगों ने एक सप्ताह पहले से ही तैयारियां की थीं। ग्रामीण सोहन लाल, जगदीश, लाल चंद, मान सिंह, उगम राम, पदम राठौर आदि ने कहा कि बाह्य सराज में शिवरात्रि मनाने की परंपरा सबसे अलग है। यहां सदियों से केमटू की माला को भगवान शिवजी के रूप में पूजा जाता है।
घाटी में बालू, लोट, कमांद, फनौटी, जुहड़, करशाला, कोलथा, बिशलाधार, कोठी, पकरेड़ सहित पूरी जलोड़ी और जांजा इलाके में शिवरात्रि की धूम रही। पुरोहित शिवराज भारद्वाज ने कहा कि 18 फरवरी को शिवरात्रि उत्सव मनाया गया। कहा कि बाह्य सराज में इस पर्व को अनोखे तरीके से मनाया जाता है। संवाद
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बाह्य सराज के सेरीगढ़, जांजा, जलोड़ी से रघुपुरगढ़ इलाके के साथ निरमंड क्षेत्र में पर्व मनाया गया। सुबह ग्रामीणों ने केमटू (फल) की माला (सैंई) बनाई। छह से सात फीट लंबी माला को पाजा, नोइर, ध्रुव और जौ की पतियों से सजाया। इसे दोपहर 12:00 बजे से पहले घर के एक साफ सुथरे कमरे के कोने में लगाया गया।
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इसके बाद आटे के बने मेमने, हलवा और पूरी का मंडल सजाया। इस दौरान लोगों ने तरह-तरह के व्यंजन परोसे। शाम के समय शिव माला की आरती उतारी और रात को गांव के लोग एकत्रित होकर ढोल-नगाड़ों और अन्य वाद्ययंत्रों के साथ नाचे। गांववासी पूरे गांव में हर घर जाकर भगवान शिवजी की आराधना कर उन्हें खुश करते हैं।
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महाशिवरात्रि पर्व को यादगार बनाने के लिए लोगों ने एक सप्ताह पहले से ही तैयारियां की थीं। ग्रामीण सोहन लाल, जगदीश, लाल चंद, मान सिंह, उगम राम, पदम राठौर आदि ने कहा कि बाह्य सराज में शिवरात्रि मनाने की परंपरा सबसे अलग है। यहां सदियों से केमटू की माला को भगवान शिवजी के रूप में पूजा जाता है।
घाटी में बालू, लोट, कमांद, फनौटी, जुहड़, करशाला, कोलथा, बिशलाधार, कोठी, पकरेड़ सहित पूरी जलोड़ी और जांजा इलाके में शिवरात्रि की धूम रही। पुरोहित शिवराज भारद्वाज ने कहा कि 18 फरवरी को शिवरात्रि उत्सव मनाया गया। कहा कि बाह्य सराज में इस पर्व को अनोखे तरीके से मनाया जाता है। संवाद