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Kullu News: बल्ह में टमाटर ब्लाइट की चपेट में, 20 प्रतिशत फसल खराब
Mon, 12 Jun 2023 11:29 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 12 Jun 2023 11:29 PM IST
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बल्ह घाटी में ब्लाइट रोग की चपेट में आई टमाटर की फसल को दिखाता किसान
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500 हेक्टेयर भूमि पर की गई है खेती, हर साल होता है करोड़ों का कारोबार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। बल्ह घाटी में टमाटर की फसल ब्लाइट की चपेट में आ गई है। इससे टमाटर उत्पादक सकते में हैं। अब तक 20 प्रतिशत फसल इस बीमारी के कारण खराब हो चुकी है। इससे किसानों को लाखों की चपत लग गई है।
रोग के फैलते ही कृषि विभाग में भी हड़कंप मच गया है। विभाग के कर्मचारी खेतों में जाकर फसल को बचाने के तरीका किसानों को बता रहे हैं। किसानों का कहना है कि बेमौसमी बरसात से रोग तेजी से फैल रहा है। अगर जल्द रोग पर काबू नहीं किया तो किसानों को करोड़ों का घाटा हो जाएगा। बल्ह घाटी में करीब 1500 हेक्टेयर में टमाटर की खेती की गई है। अब जब टमाटर की फसल तैयार है तो किसान फसल को बचाने के लिए परेशान हैं। विभाग की टीम ने सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र टांवा, कुम्मी, स्टोह, राजगढ़, नागचला का दौरा कर किसानों को बीमारी की रोकथाम के उपाय बताए।
टीम की अगवाई बल्ह ब्लॉक के एसएमएस डॉ. धर्म सिंह चौहान ने की। उन्होंने स्वयं खेतों का निरीक्षण किया। बल्ह घाटी की बात करें तो टमाटर की खेती मुख्य रूप से टांवा, खांदला, भयुरा, राजगढ़, स्टोह, घट्टा, कुम्मी, ढ़ावण, लोहारा, चंडयाल ढांगू, नेरचौक रत्ती, नागचला, भडयाल आदि स्थानों पर की गई है। टमाटर की खेती को खराब होता देख कृषि विभाग भंगरोटू की टीम ने भी खेतों का दौरा किया है।
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ये हैं बीमारी के लक्षण
टमाटर की फसल को लगने वाली ब्लाइट बीमारी के दो मुख्य लक्षण हैं। इसमें मुख्य रूप से पौधों में धब्बे आना व टमाटर पर दाग आना मुख्य है। मौसम में बदलाव होना, बार-बार बारिश से खेतों में नमी ज्यादा आ रही है। इससे जमीन का तापमान कम हो रहा है। 20 डिग्री व इससे कम तापमान होने से फसल बीमारी की चपेट में आ रही है। ज्यादा बारिश टमाटर की खेती के लिए नुकसानदायक है।
बचाव में यह करें किसान
एसएमएस डॉ. धर्म सिंह चौहान ने बताया कि बीमारी से फसल को बचाने के लिए किसान टमाटर के पौधों पर कॉपर ऑक्साइड व स्ट्रेप्टोसाइक्लीन दवाई का घोल बना कर स्प्रे यानी छिड़काव करें। कॉपर ऑक्साइड का प्रयोग तीन ग्राम प्रति लीटर पानी में किया जाए। जबकि स्ट्रेप्टोसाइक्लीन का प्रयोग 6 ग्राम प्रति 60 लीटर पानी में प्रयोग कर फसल पर स्प्रे किया जाए।
क्या कहते हैं किसान
किसान राकेश ठाकुर, श्याम लाल, गुलाब सिंह, अन्नू, केसर सिंह, चंद सिंह, बिट्टू, तिलक, चुन्नीलाल, चंद्रकांत, हितेश, सकलानी, बिंदर ठाकुर, देवेंद्र, धनदेव, रमेश ठाकुर ने बताया कि उनकी 20 से 30 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। बरसाती नदियों के किनारे जहां-जहां पर टमाटर की फसल हुई है वहां वहां पर बीमारी ज्यादा लगी है। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें लाखों रुपए का घाटा हो रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। बल्ह घाटी में टमाटर की फसल ब्लाइट की चपेट में आ गई है। इससे टमाटर उत्पादक सकते में हैं। अब तक 20 प्रतिशत फसल इस बीमारी के कारण खराब हो चुकी है। इससे किसानों को लाखों की चपत लग गई है।
रोग के फैलते ही कृषि विभाग में भी हड़कंप मच गया है। विभाग के कर्मचारी खेतों में जाकर फसल को बचाने के तरीका किसानों को बता रहे हैं। किसानों का कहना है कि बेमौसमी बरसात से रोग तेजी से फैल रहा है। अगर जल्द रोग पर काबू नहीं किया तो किसानों को करोड़ों का घाटा हो जाएगा। बल्ह घाटी में करीब 1500 हेक्टेयर में टमाटर की खेती की गई है। अब जब टमाटर की फसल तैयार है तो किसान फसल को बचाने के लिए परेशान हैं। विभाग की टीम ने सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र टांवा, कुम्मी, स्टोह, राजगढ़, नागचला का दौरा कर किसानों को बीमारी की रोकथाम के उपाय बताए।
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टीम की अगवाई बल्ह ब्लॉक के एसएमएस डॉ. धर्म सिंह चौहान ने की। उन्होंने स्वयं खेतों का निरीक्षण किया। बल्ह घाटी की बात करें तो टमाटर की खेती मुख्य रूप से टांवा, खांदला, भयुरा, राजगढ़, स्टोह, घट्टा, कुम्मी, ढ़ावण, लोहारा, चंडयाल ढांगू, नेरचौक रत्ती, नागचला, भडयाल आदि स्थानों पर की गई है। टमाटर की खेती को खराब होता देख कृषि विभाग भंगरोटू की टीम ने भी खेतों का दौरा किया है।
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ये हैं बीमारी के लक्षण
टमाटर की फसल को लगने वाली ब्लाइट बीमारी के दो मुख्य लक्षण हैं। इसमें मुख्य रूप से पौधों में धब्बे आना व टमाटर पर दाग आना मुख्य है। मौसम में बदलाव होना, बार-बार बारिश से खेतों में नमी ज्यादा आ रही है। इससे जमीन का तापमान कम हो रहा है। 20 डिग्री व इससे कम तापमान होने से फसल बीमारी की चपेट में आ रही है। ज्यादा बारिश टमाटर की खेती के लिए नुकसानदायक है।
बचाव में यह करें किसान
एसएमएस डॉ. धर्म सिंह चौहान ने बताया कि बीमारी से फसल को बचाने के लिए किसान टमाटर के पौधों पर कॉपर ऑक्साइड व स्ट्रेप्टोसाइक्लीन दवाई का घोल बना कर स्प्रे यानी छिड़काव करें। कॉपर ऑक्साइड का प्रयोग तीन ग्राम प्रति लीटर पानी में किया जाए। जबकि स्ट्रेप्टोसाइक्लीन का प्रयोग 6 ग्राम प्रति 60 लीटर पानी में प्रयोग कर फसल पर स्प्रे किया जाए।
क्या कहते हैं किसान
किसान राकेश ठाकुर, श्याम लाल, गुलाब सिंह, अन्नू, केसर सिंह, चंद सिंह, बिट्टू, तिलक, चुन्नीलाल, चंद्रकांत, हितेश, सकलानी, बिंदर ठाकुर, देवेंद्र, धनदेव, रमेश ठाकुर ने बताया कि उनकी 20 से 30 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। बरसाती नदियों के किनारे जहां-जहां पर टमाटर की फसल हुई है वहां वहां पर बीमारी ज्यादा लगी है। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें लाखों रुपए का घाटा हो रहा है।