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Kullu News: फिर जानलेवा बन चुके पेड़ों की पहचान करेगा प्रशासन
Sat, 31 May 2025 10:46 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 31 May 2025 10:46 PM IST
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जान खतरे में डालने के लिए नदी-नाले में उतर रहे सैलानी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। पार्वती घाटी में दो माह के भीतर पेड़ गिरने से दूसरा मामला सामने आया है। 30 मार्च को मणिकर्ण में अंधड़ चलने से एक देवदार से पेड़ गिर गया था। हादसे में छह सैलानियों की मौत हो गई थी।
इसके बाद प्रशासन ने जिले की ऐसे संवेदनशील जगहों पर खतरनाक पेड़ों की पहचान कर उन्हें काटा था। शनिवार को सूमारोपा में पार्वती नदी में सैर सपाटे को पहुंची लुधियाना की दो महिला पर्यटकों पर एक पेड़ गिर गया।
हादसे के बाद जिला प्रशासन ने फिर से जानलेवा बने पेड़ों की पहचान करने का निर्णय लिया है। उपायुक्त तोरुल एस रवीश ने कहा कि 30 मार्च को हुए हादसे के बाद ऐसे पेड़ों की पहचान कर उन्हें काटा गया था। अब फिर से पूरी पार्वती घाटी में ऐसे पेड़ों की पहचान की जाएगी। इसके लिए एसडीएम की अध्यक्षता में वन विभाग के साथ एक कमेटी का गठन होगा। कहा कि मनाली में पहले ही ऐसे पेड़ों को चिह्नित कर दिया गया है। कुल्लू-मनाली आने लाले सैलानी ब्यास, तीर्थन, पार्वती और लाहौल की चंद्रा नदी के किनारे जाने से बाज नहीं आ रहे हैं। रोज सैकड़ों की संख्या में सैलानी कुल्लू से मनाली तक ब्यास नदी में उतर मस्ती करने को उतर रहे हैं। अधिकतर जगह पर चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं, फिर भी सैलानी जाने को जोखिम में डाल रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। पार्वती घाटी में दो माह के भीतर पेड़ गिरने से दूसरा मामला सामने आया है। 30 मार्च को मणिकर्ण में अंधड़ चलने से एक देवदार से पेड़ गिर गया था। हादसे में छह सैलानियों की मौत हो गई थी।
इसके बाद प्रशासन ने जिले की ऐसे संवेदनशील जगहों पर खतरनाक पेड़ों की पहचान कर उन्हें काटा था। शनिवार को सूमारोपा में पार्वती नदी में सैर सपाटे को पहुंची लुधियाना की दो महिला पर्यटकों पर एक पेड़ गिर गया।
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हादसे के बाद जिला प्रशासन ने फिर से जानलेवा बने पेड़ों की पहचान करने का निर्णय लिया है। उपायुक्त तोरुल एस रवीश ने कहा कि 30 मार्च को हुए हादसे के बाद ऐसे पेड़ों की पहचान कर उन्हें काटा गया था। अब फिर से पूरी पार्वती घाटी में ऐसे पेड़ों की पहचान की जाएगी। इसके लिए एसडीएम की अध्यक्षता में वन विभाग के साथ एक कमेटी का गठन होगा। कहा कि मनाली में पहले ही ऐसे पेड़ों को चिह्नित कर दिया गया है। कुल्लू-मनाली आने लाले सैलानी ब्यास, तीर्थन, पार्वती और लाहौल की चंद्रा नदी के किनारे जाने से बाज नहीं आ रहे हैं। रोज सैकड़ों की संख्या में सैलानी कुल्लू से मनाली तक ब्यास नदी में उतर मस्ती करने को उतर रहे हैं। अधिकतर जगह पर चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं, फिर भी सैलानी जाने को जोखिम में डाल रहे हैं।
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