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Kullu News: बागवानों को फ्लावरिंग के बीच डराने लगा मौसम
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कुल्लू। जिले में मौसम का मिजाज एक बार फिर बिगड़ गया है। इससे कुल्लू के बागवानों को सेब की फसल को लेकर डर सताने लगा है। ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश से सेब की सेटिंग पर संकट के बादल मंडरा गए हैं।
इस समय सेब के पौधों में फ्लावरिंग अंतिम दौर में चली हुई है। सेब पौधों में सेटिंग फ्लावरिंग की प्रक्रिया के अनुसार होती है। बागवान चिंतित हो गए हैं कि अगर मौसम प्रतिकूल रहता है तो बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। मौसम विभाग ने ओलावृष्टि का भी पूूर्वानुमान भी जताया है। ओलावृष्टि कई बार बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर देती है। इन दिनों फ्लावरिंग और सेटिंग के बीच प्रक्रिया में ओलावृष्टि होने से अधिक नुकसान होता है। हालांकि, जिले के कई क्षेत्रों में शुक्रवार को ओलावृष्टि की भी सूचना है। स्थानीय बागवान रेशम राम ठाकुर, चरण दास, टेक चंद और प्रेम चंद ठाकुर ने कहा कि निचले इलाकों में सेब के पौधों में पहले चरण की सेटिंग हो गई है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहले चरण की सेटिंग अभी होनी है। मौसम ने जिस तरह से करवट बदली है, इससे आगामी साल सेब के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि जिले में करीब 30,000 हेक्टेयर भूमि पर सेब की पैदावार होती है। सेब का प्रतिवर्ष जिले में करोड़ों का कारोबार होता है और कुल्लू की करीब 80 प्रतिशत आबादी सेब बागवानी से जुड़ी हुई है। इसके साथ ही सेब सीजन के दौरान दूसरे राज्यों के सैकड़ों प्रवासी कामगारों को भी अस्थायी रोजगार मिलता है। कुल्लू फलोत्पादक मंडल के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि इस बार सेब की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। सेब की सेटिंग होने तक मौसम का अनुकूल होना जरूरी है।
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इस समय सेब के पौधों में फ्लावरिंग अंतिम दौर में चली हुई है। सेब पौधों में सेटिंग फ्लावरिंग की प्रक्रिया के अनुसार होती है। बागवान चिंतित हो गए हैं कि अगर मौसम प्रतिकूल रहता है तो बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। मौसम विभाग ने ओलावृष्टि का भी पूूर्वानुमान भी जताया है। ओलावृष्टि कई बार बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर देती है। इन दिनों फ्लावरिंग और सेटिंग के बीच प्रक्रिया में ओलावृष्टि होने से अधिक नुकसान होता है। हालांकि, जिले के कई क्षेत्रों में शुक्रवार को ओलावृष्टि की भी सूचना है। स्थानीय बागवान रेशम राम ठाकुर, चरण दास, टेक चंद और प्रेम चंद ठाकुर ने कहा कि निचले इलाकों में सेब के पौधों में पहले चरण की सेटिंग हो गई है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहले चरण की सेटिंग अभी होनी है। मौसम ने जिस तरह से करवट बदली है, इससे आगामी साल सेब के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
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गौरतलब है कि जिले में करीब 30,000 हेक्टेयर भूमि पर सेब की पैदावार होती है। सेब का प्रतिवर्ष जिले में करोड़ों का कारोबार होता है और कुल्लू की करीब 80 प्रतिशत आबादी सेब बागवानी से जुड़ी हुई है। इसके साथ ही सेब सीजन के दौरान दूसरे राज्यों के सैकड़ों प्रवासी कामगारों को भी अस्थायी रोजगार मिलता है। कुल्लू फलोत्पादक मंडल के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि इस बार सेब की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। सेब की सेटिंग होने तक मौसम का अनुकूल होना जरूरी है।
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