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Kullu News: सौ बोरी तक सेब पर जमाबंदी की शर्त खत्म
Sat, 10 Jan 2026 10:25 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 10 Jan 2026 10:25 PM IST
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सूखे जैसे हालात की मार झेल रहे प्रदेश के बागवानों को मिली बड़ी राहत
बागवानी संगठनों के कड़े विरोध के बाद एचपीएमसी ने लिया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। प्रदेश के सेब बागवानों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) ने बागवानी संगठनों के कड़े विरोध के बाद जमाबंदी की अनिवार्य शर्त में बड़ा संशोधन कर दिया है।
अब 100 बोरी तक सेब देने वाले बागवानों को भुगतान के लिए जमाबंदी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प्रदेश के बागवान सूखे और घटती पैदावार से पहले ही परेशान चल रहे हैं। कुल्लू फलोत्पादक मंडल ने इस शर्त को पहले ही तुगलकी फरमान करार देते हुए सरकार और एचपीएमसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
कुल्लू फलोत्पादक मंडल के महामंत्री रिमन सिंह ठाकुर ने इस संशोधन को बागवानों की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि अब 100 बोरी तक सेब देने वाले छोटे और मध्यम बागवानों को राजस्व विभाग के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
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उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भविष्य में बागवानों के हित से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले बागवानी संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया जाए ताकि जमीनी स्तर पर बागवानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। इस फैसले से प्रदेश के हजारों छोटे बागवानों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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बागवानी संगठनों के कड़े विरोध के बाद एचपीएमसी ने लिया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। प्रदेश के सेब बागवानों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) ने बागवानी संगठनों के कड़े विरोध के बाद जमाबंदी की अनिवार्य शर्त में बड़ा संशोधन कर दिया है।
अब 100 बोरी तक सेब देने वाले बागवानों को भुगतान के लिए जमाबंदी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प्रदेश के बागवान सूखे और घटती पैदावार से पहले ही परेशान चल रहे हैं। कुल्लू फलोत्पादक मंडल ने इस शर्त को पहले ही तुगलकी फरमान करार देते हुए सरकार और एचपीएमसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
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कुल्लू फलोत्पादक मंडल के महामंत्री रिमन सिंह ठाकुर ने इस संशोधन को बागवानों की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि अब 100 बोरी तक सेब देने वाले छोटे और मध्यम बागवानों को राजस्व विभाग के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
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उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भविष्य में बागवानों के हित से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले बागवानी संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया जाए ताकि जमीनी स्तर पर बागवानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। इस फैसले से प्रदेश के हजारों छोटे बागवानों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।