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Kullu News: पुल बहा, वादे तैरते रहे, पार्वती पर अब भी झूले के सहारे जिंदगी

Mon, 23 Feb 2026 10:41 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Mon, 23 Feb 2026 10:41 PM IST
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The bridge is washed away, promises remain afloat, but life on Parvati is still dependent on a swing.
शारनी में लगाया गया झूला, जहां से जान में डाल कर लोग आरपार होते हैं। वीडियोग्रेब
आपदा के डेढ़ साल बाद भी बलाधी और शारनी पंचायतों में नहीं बन पाए पैदल पुल
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झूला पुल के सहारे आर-पार करनी पड़ रही पार्वती नदी, खतरे में रहती है जान
विद्यार्थी भी झूले से ही जाते हैं स्कूल, सवाल- हादसा हो जाए तो जिम्मेदार कौन

संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में आई आपदा को डेढ़ साल बीत चुका है लेकिन शारनी में हालात अब भी 2024 की तबाही में अटके हैं। पार्वती नदी पर बहा पैदल पुल आज तक नहीं बना है। स्कूली विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर झूले से आर-पार हो रहे हैं।
वर्ष 2025 में आई आपदा ने कुल्लू को गहरे जख्म दिए हैं। भले ही आपदा से निकलकर जिंदगी पटरी पर दौड़ी है लेकिन धरातल पर हालात अभी भी चौंकाने वाले हैं। अगस्त 2024 में मलाणा-एक प्रोजेक्ट का डैम फटने से हुई तबाही के बाद बलाधी और शारनी में पुल बह गए थे।
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न तो बलाधी में पुल बना और न ही शारनी में पार्वती नदी पर पैदल पुल बनाने के प्रयास हो पाए। बलाधी में एक छोटी पुलिया के सहारे काम चलाया गया है। शारनी में लोग झूले से नदी के आर-पार होते हैं। स्कूल के विद्यार्थी भी झूले से आते हैं। झूला पार करना खतरे से खाली नहीं होता है। पार्वती नदी की गहराई से हर कोई परिचित है। ऐसे में झूला पार करते कोई हादसा हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन है।
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बड़ा सवाल यह है कि जब पुल बह गया था कि इसे बनाने की जिम्मेदारी किसकी थी। सरकार के पास आपदा के बाद करोड़ों रुपये आए। एक पैदल पुल के लिए क्या प्रशासन के पास बजट नहीं है। हालांकि कई बार मामले को प्रशासन के ध्यान में लाया गया। पूर्व में बरशैणी वार्ड से जिला परिषद सदस्य रहीं रेखा गुलेरिया ने भी बैठकों के माध्यम से प्रशासन के ध्यान में मामला लाया। दो साल से ग्रामीण शारनी में पुल लगने के इंतजार में हैं। उधर, नायब तहसीलदार जरी हेमराज शर्मा ने कहा कि प्रशासन के पास फिलहाल पुल को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं आया है।
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शारनी में पुल न बनना निराशाजनक है। लोग झूले से आर-पार होते हैं। अभी तक सरकार की नींद नहीं टूटी है। यहां पुल बनना जरूरी है। लोगों की सुविधा के लिए बाढ़ में बहे पुल की जगह नया पुल बनाया जाए। - ओमप्रकाश, पूर्व पंचायत समिति सदस्य

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झूले से पार होते समय हादसे का डर रहता है। कई जगह पर झूलों में हादसे हो चुके हैं। बनाशा की तरफ जाने वाले ग्रामीणों के लिए भुंतर-मणिकर्ण सड़क तक पहुंचना शारनी पुल से आसान होता था। लोगों के पास कोई और विकल्प नहीं है। - गगनदीप, पीणी पंचायत
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