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मंडियों में पहुंचा अर्ली वैरायटी का रेडब्यूट प्लम
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कुल्लू की सब्जी मंडी भुंतर में पहुंची प्लम की खेप। -संवाद
- फोटो : Kullu
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू/खराहल। जिला कुल्लू में रसीले प्लम का सीजन शुरू हो गया है। अर्ली वैरायटी का रेडब्यूट प्लम मंडियों में आना शुरू हो गया है।
प्लम की खेप सब्जी मंडी बंदरोल में पहुंची है। ए श्रेणी का प्लम 80 रुपये प्रति किलो बिका। कुछ दिन पहले 108 रुपये में भी इस वैरायटी का प्लम बिक चुका है। हालांकि पिछले साल इस वैरायटी के प्लम की 120 रुपये प्रति किलो तक बोली लगी थी। इस साल सूखे के चलते फल का आकार और रंग बेहतर नहीं होने से दाम में गिरावट आई है।
जिले में 1,200 हजार हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न वैरायटी के प्लम की पैदावार होती है। बागवानों का कहना है कि मार्च से पर्याप्त बारिश नहीं होने से अर्ली किस्म के प्लम का साइज और रंग भी प्रभावित हुआ है। कुछ दिनों में बारिश होती है तो देरी से तैयार होने वाली किस्म के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। अगर बारिश नहीं होती है तो निश्चित तौर पर इस पर भी विपरीत असर पड़ सकता है। जिले के बागवान प्रताप पठानिया, बुद्धि प्रकाश शर्मा, विजय पठानिया, महेश शर्मा, देवेंद्र भंडारी तथा सुशील भंडारी ने कहा कि अर्ली वैरायटी का प्लम तैयार हो गया है। सूखे की वजह से फल का आकार थोड़ा ठीक नहीं है। फल के दाम पिछले साल की अपेक्षा 12 रुपये कम मिल रहे हैं।
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान मोहन लाल ठाकुर ने कहा कि मंडियों में अर्ली वैरायटी का प्लम पहुंचने लगा है। रेडब्यूट प्लम रविवार से मंडियों में पहुंचना शुरू हुआ। चार-पांच दिन पहले मंडियों में इस वैरायटी का प्लम 108 रुपये किलो तक बिका था। उन्होंने बागवानों से आग्रह किया है कि फलों की गुणवत्ता पर ध्यान दें और कच्चा माल मंडियों में न भेजें। बागवानों को अच्छे फल के बेहतर दाम मिलेंगे। कृषि विपणन बोर्ड के सचिव सुशील गुलेरिया ने कहा कि शुरुआत में प्लम पिछले साल के मुकाबले 12 रुपये कम दाम पर बिका है।
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कुल्लू/खराहल। जिला कुल्लू में रसीले प्लम का सीजन शुरू हो गया है। अर्ली वैरायटी का रेडब्यूट प्लम मंडियों में आना शुरू हो गया है।
प्लम की खेप सब्जी मंडी बंदरोल में पहुंची है। ए श्रेणी का प्लम 80 रुपये प्रति किलो बिका। कुछ दिन पहले 108 रुपये में भी इस वैरायटी का प्लम बिक चुका है। हालांकि पिछले साल इस वैरायटी के प्लम की 120 रुपये प्रति किलो तक बोली लगी थी। इस साल सूखे के चलते फल का आकार और रंग बेहतर नहीं होने से दाम में गिरावट आई है।
जिले में 1,200 हजार हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न वैरायटी के प्लम की पैदावार होती है। बागवानों का कहना है कि मार्च से पर्याप्त बारिश नहीं होने से अर्ली किस्म के प्लम का साइज और रंग भी प्रभावित हुआ है। कुछ दिनों में बारिश होती है तो देरी से तैयार होने वाली किस्म के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। अगर बारिश नहीं होती है तो निश्चित तौर पर इस पर भी विपरीत असर पड़ सकता है। जिले के बागवान प्रताप पठानिया, बुद्धि प्रकाश शर्मा, विजय पठानिया, महेश शर्मा, देवेंद्र भंडारी तथा सुशील भंडारी ने कहा कि अर्ली वैरायटी का प्लम तैयार हो गया है। सूखे की वजह से फल का आकार थोड़ा ठीक नहीं है। फल के दाम पिछले साल की अपेक्षा 12 रुपये कम मिल रहे हैं।
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आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान मोहन लाल ठाकुर ने कहा कि मंडियों में अर्ली वैरायटी का प्लम पहुंचने लगा है। रेडब्यूट प्लम रविवार से मंडियों में पहुंचना शुरू हुआ। चार-पांच दिन पहले मंडियों में इस वैरायटी का प्लम 108 रुपये किलो तक बिका था। उन्होंने बागवानों से आग्रह किया है कि फलों की गुणवत्ता पर ध्यान दें और कच्चा माल मंडियों में न भेजें। बागवानों को अच्छे फल के बेहतर दाम मिलेंगे। कृषि विपणन बोर्ड के सचिव सुशील गुलेरिया ने कहा कि शुरुआत में प्लम पिछले साल के मुकाबले 12 रुपये कम दाम पर बिका है।
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