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मैदान न होने से राष्ट्रीय खेल में पिछड़ रहे खिलाड़ी
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कुल्लू। जिला कुल्लू के युवा मैदान की सुविधा के बिना हॉकी के मेजर ध्यानचंद कैसे बन पाएंगे। जिले में राष्ट्रीय खेल हॉकी के प्रति सैकड़ों बच्चों और युवाओं में काफी रुचि है। उनकी प्रतिभा निखारने के लिए अच्छे मैदान नहीं है। कहीं पर मैदान नहीं नहीं है, जहां है वह ऊबड़-खाबड़ है।
मुख्यालय ढालपुर में ही दो मैदान हैं। इनमें से एक मैदान बंद रखा गया है, जबकि दूसरे मैदान के 70 फीसदी क्षेत्र में क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए खेलने और अभ्यास करने की व्यवस्था की गई है। मैदान के महज 30 फीसदी शेष भाग में युवाओं को हॉकी और फुटबाल खेलना पड़ता है। यह मैदान भी समतल नहीं है। हॉकी के अभ्यास और खेलने के लिए मैदान न होने के चलते खिलाड़ी परेशानी में हैं। हालांकि कुल्लू के हॉकी खिलाड़ी बिना मैदान के भी प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं खेल चुके हैं। ऐसे में प्रतिभावान खिलाड़ियों को अगर मैदान की सुविधा मिले, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने हुनर का लोहा मनवा सकेंगे। जिला हॉकी एसोसिएशन के संयुक्त सचिव यशपाल ने कहा कि जिले में हॉकी के खिलाड़ियों की कमी नहीं है। खेलने के लिए मैदान न मिलने के कारण युवाओं को हालात से समझौता करना पड़ रहा है। इसके बावजूद कुल्लू के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक की हॉकी प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं।
कुल्लू में खेलने लायक नहीं मैदान
शिव चंद ने कहा कि कुल्लू में खेलने लायक मैदान नहीं हैं। ढालपुर शहर में क्रिकेट मैदान के ही थोड़े से क्षेत्र में खेलना पड़ता है। इसके कारण हॉकी खिलाड़ी अपनी प्रतिभा नहीं निखार पाते हैं। प्रशासन व सरकार को युवा खिलाड़ियों के लिए मैदान की व्यवस्था करनी चाहिए।
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मैदान समतल न होने से खिलाड़ी परेशान
गुलशन करियाल ने कहा कि ढालपुर मैदान पूरी तरह से समतल नहीं है। क्रिकेट मैदान के छोटे से हिस्से में हॉकी का अभ्यास करना पड़ता है। लेकिन मैदान का यह क्षेत्र भी ऊबड़-खाबड़ है। खराब मैदान के कारण हॉकी खेलने में दिक्कत होती है।
राष्ट्रीय खेल होने के बावजूद व्यवस्था सही नहीं
पंकज ठाकुर ने कहा कि हॉकी राष्ट्रीय खेल है। इसके बावजूद जिले में व्यवस्था सही नहीं है। हॉकी के खिलाड़ियों को अभ्यास करने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। प्रशासन और नगर परिषद को जिला मुख्यालय में स्थित मैदानों को समतल करना चाहिए।
अभ्यास करने की नहीं व्यवस्था
पल्लवी शर्मा ने कहा कि हॉकी खिलाड़ियों के लिए अभ्यास करने की व्यवस्था नहीं है। ढालपुर में महज क्रिकेट और फुटबाल प्रतियोगिताएं ही करवाई जाती हैं। हॉकी की ओर खेल विभाग का कोई ध्यान नहीं है। बिना अभ्यास के खिलाड़ी अपनी कमियों में सुधार नहीं ला सकते।
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मुख्यालय ढालपुर में ही दो मैदान हैं। इनमें से एक मैदान बंद रखा गया है, जबकि दूसरे मैदान के 70 फीसदी क्षेत्र में क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए खेलने और अभ्यास करने की व्यवस्था की गई है। मैदान के महज 30 फीसदी शेष भाग में युवाओं को हॉकी और फुटबाल खेलना पड़ता है। यह मैदान भी समतल नहीं है। हॉकी के अभ्यास और खेलने के लिए मैदान न होने के चलते खिलाड़ी परेशानी में हैं। हालांकि कुल्लू के हॉकी खिलाड़ी बिना मैदान के भी प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं खेल चुके हैं। ऐसे में प्रतिभावान खिलाड़ियों को अगर मैदान की सुविधा मिले, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने हुनर का लोहा मनवा सकेंगे। जिला हॉकी एसोसिएशन के संयुक्त सचिव यशपाल ने कहा कि जिले में हॉकी के खिलाड़ियों की कमी नहीं है। खेलने के लिए मैदान न मिलने के कारण युवाओं को हालात से समझौता करना पड़ रहा है। इसके बावजूद कुल्लू के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक की हॉकी प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं।
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कुल्लू में खेलने लायक नहीं मैदान
शिव चंद ने कहा कि कुल्लू में खेलने लायक मैदान नहीं हैं। ढालपुर शहर में क्रिकेट मैदान के ही थोड़े से क्षेत्र में खेलना पड़ता है। इसके कारण हॉकी खिलाड़ी अपनी प्रतिभा नहीं निखार पाते हैं। प्रशासन व सरकार को युवा खिलाड़ियों के लिए मैदान की व्यवस्था करनी चाहिए।
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मैदान समतल न होने से खिलाड़ी परेशान
गुलशन करियाल ने कहा कि ढालपुर मैदान पूरी तरह से समतल नहीं है। क्रिकेट मैदान के छोटे से हिस्से में हॉकी का अभ्यास करना पड़ता है। लेकिन मैदान का यह क्षेत्र भी ऊबड़-खाबड़ है। खराब मैदान के कारण हॉकी खेलने में दिक्कत होती है।
राष्ट्रीय खेल होने के बावजूद व्यवस्था सही नहीं
पंकज ठाकुर ने कहा कि हॉकी राष्ट्रीय खेल है। इसके बावजूद जिले में व्यवस्था सही नहीं है। हॉकी के खिलाड़ियों को अभ्यास करने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। प्रशासन और नगर परिषद को जिला मुख्यालय में स्थित मैदानों को समतल करना चाहिए।
अभ्यास करने की नहीं व्यवस्था
पल्लवी शर्मा ने कहा कि हॉकी खिलाड़ियों के लिए अभ्यास करने की व्यवस्था नहीं है। ढालपुर में महज क्रिकेट और फुटबाल प्रतियोगिताएं ही करवाई जाती हैं। हॉकी की ओर खेल विभाग का कोई ध्यान नहीं है। बिना अभ्यास के खिलाड़ी अपनी कमियों में सुधार नहीं ला सकते।