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सुबह से इलाज करवाने निकले मरीज लौटे मायूस
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में विशेषज्ञ डॉक्टर पेन डाउन हड़ताल कर रहे हैं। ऐसे में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल रहा है। हड़ताल से सबसे अधिक परेशानी दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उठानी पड़ रही है। उन्हें भूखे-प्यासे उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है। दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले लोगों को टेस्ट करवाने और इलाज के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। कई मरीज सुबह से उपचार करवाने कुल्लू पहुंचना पड़ रहा, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने से उनको मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
शाम के समय घर लौटने के लिए गाड़ियां भी नहीं मिल रही हैं। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में रोजाना 500 से 800 मरीजों का उपचार किया जाता है, लेकिन सुबह 11:30 बजे तक ओपीडी में डॉक्टरों के सेवाएं न देने से मरीजों को लाइनों में खड़े रहकर दर्द सहना पड़ रहा है। दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों पर हड़ताल का अधिक असर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सरकारी और निजी बसों के कम रूट हैं। कम सवारियों वाले रूटों को अभी बहाल नहीं किया गया है। ऐसे में कई मरीजों को बिना उपचार के ही घर लौटना पड़ रहा है, तो कई निजी अस्पतालों में महंगा उपचार करवाने के लिए मजबूर हैं। अस्पताल में सैंज से उपचार करवाने आए सेसराम ने कहा कि वह सुबह छह बजे घर से निकले हैं। अस्पताल आने पर पहले उपचार नहीं मिला, जब डॉक्टर ने स्वास्थ्य जांचा तो टेस्ट करवाने को कहा। उन्हें अब सोमवार को दोबारा टेस्ट करवाने आना पड़ेगा। उधर, खराहल के शिवराम, गड़सा की शिवानी, रोहित, अजय, जरी के सुभाष, अदिति, रामी देवी ने कहा कि सुबह के समय ओपीडी में उपचार न होने से मरीजों के सरकारी टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को रोज अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इस संबंध में अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेश ने कहा कि चिकित्सक पेन डाउन हड़ताल कर रहे हैं। इसके बावजूद अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
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कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में विशेषज्ञ डॉक्टर पेन डाउन हड़ताल कर रहे हैं। ऐसे में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल रहा है। हड़ताल से सबसे अधिक परेशानी दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उठानी पड़ रही है। उन्हें भूखे-प्यासे उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है। दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले लोगों को टेस्ट करवाने और इलाज के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। कई मरीज सुबह से उपचार करवाने कुल्लू पहुंचना पड़ रहा, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने से उनको मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
शाम के समय घर लौटने के लिए गाड़ियां भी नहीं मिल रही हैं। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में रोजाना 500 से 800 मरीजों का उपचार किया जाता है, लेकिन सुबह 11:30 बजे तक ओपीडी में डॉक्टरों के सेवाएं न देने से मरीजों को लाइनों में खड़े रहकर दर्द सहना पड़ रहा है। दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों पर हड़ताल का अधिक असर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सरकारी और निजी बसों के कम रूट हैं। कम सवारियों वाले रूटों को अभी बहाल नहीं किया गया है। ऐसे में कई मरीजों को बिना उपचार के ही घर लौटना पड़ रहा है, तो कई निजी अस्पतालों में महंगा उपचार करवाने के लिए मजबूर हैं। अस्पताल में सैंज से उपचार करवाने आए सेसराम ने कहा कि वह सुबह छह बजे घर से निकले हैं। अस्पताल आने पर पहले उपचार नहीं मिला, जब डॉक्टर ने स्वास्थ्य जांचा तो टेस्ट करवाने को कहा। उन्हें अब सोमवार को दोबारा टेस्ट करवाने आना पड़ेगा। उधर, खराहल के शिवराम, गड़सा की शिवानी, रोहित, अजय, जरी के सुभाष, अदिति, रामी देवी ने कहा कि सुबह के समय ओपीडी में उपचार न होने से मरीजों के सरकारी टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को रोज अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इस संबंध में अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेश ने कहा कि चिकित्सक पेन डाउन हड़ताल कर रहे हैं। इसके बावजूद अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
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