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लोक परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करने की जरूरत : महेश्वर
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कुल्लू। जिला मुख्यालय कुल्लू के साथ लगते वैष्णो माता मंदिर में रविवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय युवा इतिहासकार संगोष्ठी का समापन हुआ। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना और केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला द्वारा आयोजित संगोष्ठी में देशभर के 17 प्रांतों से आए हुए 250 युवा इतिहासकारों ने अपने शोध पत्र पढ़े।
संगोष्ठी के समापन अवसर पर पूर्व सांसद महेश्वर सिंह ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि लोक पंरपराएं, लोक संस्कृति और त्योहार भी इतिहास के पक्ष को दर्शाते हैं। इनको संरक्षित करने की जरूरत है। जिससे आने वाली पीढ़ी इतिहास से परिचित हो सके। वहीं, कृषि विश्वविद्यालय पूर्व कुलपति डॉ. तेजप्रताप ने कहा कि किसान का इतिहास पुराना है। एक किसान ने 27 प्रकार के परिवारों को पालता था।
इस तरह के प्रयास किए जाने चाहिए कि संसार में किसान का गौरव फिर से वापस लौट आए। अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति के प्रांत अध्यक्ष डॉ. सूरत ठाकुर ने कहा कि दो दिवसीय संगोष्ठी में करीब 250 से अधिक इतिहासकार शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं। शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले सभी युवा युवाओं का एक ही मत था कि ऐसेे इतिहास को आगे लाना है कि जिससे भावी पीढ़ी भारतीय होने पर गर्व कर सके। इस दौरान भारतीय इतिहास संकलन समिति के विभिन्न पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
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संगोष्ठी के समापन अवसर पर पूर्व सांसद महेश्वर सिंह ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि लोक पंरपराएं, लोक संस्कृति और त्योहार भी इतिहास के पक्ष को दर्शाते हैं। इनको संरक्षित करने की जरूरत है। जिससे आने वाली पीढ़ी इतिहास से परिचित हो सके। वहीं, कृषि विश्वविद्यालय पूर्व कुलपति डॉ. तेजप्रताप ने कहा कि किसान का इतिहास पुराना है। एक किसान ने 27 प्रकार के परिवारों को पालता था।
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इस तरह के प्रयास किए जाने चाहिए कि संसार में किसान का गौरव फिर से वापस लौट आए। अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति के प्रांत अध्यक्ष डॉ. सूरत ठाकुर ने कहा कि दो दिवसीय संगोष्ठी में करीब 250 से अधिक इतिहासकार शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं। शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले सभी युवा युवाओं का एक ही मत था कि ऐसेे इतिहास को आगे लाना है कि जिससे भावी पीढ़ी भारतीय होने पर गर्व कर सके। इस दौरान भारतीय इतिहास संकलन समिति के विभिन्न पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
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