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Kullu News: रस्सा दौड़ में जाणा फाटी के लोग जीते
Sun, 14 Jan 2024 12:32 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 14 Jan 2024 12:32 PM IST
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कुल्लू के नगर गनेड़ के दौरान परंपरा का निर्वहन करते देवलू।-
पतलीकूहल/नग्गर (कुल्लू)। जिले की ऊझी घाटी के धरोहर गांव नग्गर में शनिवार को गनेड़ उत्सव मनाया गया। इस दौरान नग्गर फाटी और जाणा फाटी के लोगों के बीच रस्सा दौड़ हुई जिसमें जाणा फाटी के लोगों ने जीत हासिल की।
यह दौड़ एक धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। उत्सव में परंपरा का निर्वहन 100 सालों से भी अधिक समय से निभाया जा रहा है। गनेड़ उत्सव के लिए जाणा गांव के देवता जीव नारायण अपने हारियानों के साथ नग्गर पहुंचे और प्राचीन परंपरा को निभाया। देवता के बिना इस प्रथा को नहीं निभाया जा सकता।
गनेड़ उत्सव में नग्गर गांव की माता त्रिपुरा सुंदरी की भी अहम भूमिका रहती है। गनेड़ में माता के जठाली के सिर के ऊपर सींग लगाया जाता है और अश्लील गालियां दी जाती हैं।
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पूरी प्रक्रिया धार्मिक रीति रिवाज के तहत होती है। माता त्रिपुरा सुंदरी के कारदार जोगिंद्र आचार्य ने बताया कि नग्गर गनेड़ का इतिहास बहुत ही पुराना है। इस दिन माता के जठाली के सिर के ऊपर सींग लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि नग्गर गनेड़ को जठाली के सिर के ऊपर सींग लगाना, अश्लील गालियां बोलना और रस्सा दौड़ सभी प्राचीन धार्मिक परंपरा का हिस्सा है जिन्हें आज भी निभाया जा रहा है। संवाद
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यह दौड़ एक धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। उत्सव में परंपरा का निर्वहन 100 सालों से भी अधिक समय से निभाया जा रहा है। गनेड़ उत्सव के लिए जाणा गांव के देवता जीव नारायण अपने हारियानों के साथ नग्गर पहुंचे और प्राचीन परंपरा को निभाया। देवता के बिना इस प्रथा को नहीं निभाया जा सकता।
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गनेड़ उत्सव में नग्गर गांव की माता त्रिपुरा सुंदरी की भी अहम भूमिका रहती है। गनेड़ में माता के जठाली के सिर के ऊपर सींग लगाया जाता है और अश्लील गालियां दी जाती हैं।
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पूरी प्रक्रिया धार्मिक रीति रिवाज के तहत होती है। माता त्रिपुरा सुंदरी के कारदार जोगिंद्र आचार्य ने बताया कि नग्गर गनेड़ का इतिहास बहुत ही पुराना है। इस दिन माता के जठाली के सिर के ऊपर सींग लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि नग्गर गनेड़ को जठाली के सिर के ऊपर सींग लगाना, अश्लील गालियां बोलना और रस्सा दौड़ सभी प्राचीन धार्मिक परंपरा का हिस्सा है जिन्हें आज भी निभाया जा रहा है। संवाद