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जिले में गहराया 12:32:16 खाद का संकट
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कुल्लू। मटर और टमाटर के बाद जिले में रबी की फसल पर 12:32:16 खाद का संकट खड़ा हो गया है। किसानों को खाद नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले में 12:32:16 की करीब चार हजार टन खाद की मांग है।
इन दिनों जिले में गेहूं, जौ के साथ लहसुन में इस खाद का इस्तेमाल किया जाता है। किसान मेघ सिंह, दुनी चंद, लाभ सिंह, प्रेम लाल, किशन चंद, सोहन लाल, जगदीश ठाकुर, लीला प्रकाश, सुरेंद्र ठाकुर और लाल चंद ने कहा कि 12:32:16 खाद नहीं मिलने से किसानों परेशान हैं। रबी की फसल के लिए किसान इसी खाद का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि रबी के बाद किसान-बागवान सेब के बगीचों में भी इसी खाद का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि रबी के साथ सर्दी में बागवानों को सेब के बगीचों में तौलिए बनाने के दौरान इस खाद की बहुत मांग रहती है। जिले में 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की खेती की जाती है। इसमें गेहूं सबसे अधिक 11,000 हेक्टेयर, जौ 2,400 और लहसुन 1,500 हेक्टेयर में बिजाई होती है।
दशहरा के बाद नवंबर में सेब के पेड़ों की प्रूनिंग के बाद दिसंबर तक बगीचों में तौलिये बनाए जाते हैं। इनमें 12:32:16 समेत पोटाश का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन खाद की सप्लाई न होने से बागवानों की चिंता अभी से बढ़ने लगी है। इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड के पास खाद का स्टॉक नहीं है। इसकी जगह पीएडी और 16:16 खाद देने की बात कही जा रही है। जिले में करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की फसल का उत्पादन होता है।
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अगर 12:32:16 बागवानों को नहीं मिलती है तो बागवान पीएडी खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं। इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड भी किसानों को इसी खाद का वितरण कर रही है जबकि 12:32:16 खाद की बहुत कमी चल रही है। -रोहित, क्षेत्रीय अधिकारी, इफको
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इन दिनों जिले में गेहूं, जौ के साथ लहसुन में इस खाद का इस्तेमाल किया जाता है। किसान मेघ सिंह, दुनी चंद, लाभ सिंह, प्रेम लाल, किशन चंद, सोहन लाल, जगदीश ठाकुर, लीला प्रकाश, सुरेंद्र ठाकुर और लाल चंद ने कहा कि 12:32:16 खाद नहीं मिलने से किसानों परेशान हैं। रबी की फसल के लिए किसान इसी खाद का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि रबी के बाद किसान-बागवान सेब के बगीचों में भी इसी खाद का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि रबी के साथ सर्दी में बागवानों को सेब के बगीचों में तौलिए बनाने के दौरान इस खाद की बहुत मांग रहती है। जिले में 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की खेती की जाती है। इसमें गेहूं सबसे अधिक 11,000 हेक्टेयर, जौ 2,400 और लहसुन 1,500 हेक्टेयर में बिजाई होती है।
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दशहरा के बाद नवंबर में सेब के पेड़ों की प्रूनिंग के बाद दिसंबर तक बगीचों में तौलिये बनाए जाते हैं। इनमें 12:32:16 समेत पोटाश का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन खाद की सप्लाई न होने से बागवानों की चिंता अभी से बढ़ने लगी है। इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड के पास खाद का स्टॉक नहीं है। इसकी जगह पीएडी और 16:16 खाद देने की बात कही जा रही है। जिले में करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की फसल का उत्पादन होता है।
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अगर 12:32:16 बागवानों को नहीं मिलती है तो बागवान पीएडी खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं। इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड भी किसानों को इसी खाद का वितरण कर रही है जबकि 12:32:16 खाद की बहुत कमी चल रही है। -रोहित, क्षेत्रीय अधिकारी, इफको